छात्र हित संरक्षण में प्रभावी भूमिका निभाये

राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन में करें सक्रिय सहयोग
राज्यपाल श्री पटेल ने निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग समीक्षा में दिए निर्देश

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि निजी विश्वविद्यालयों में छात्र हित संरक्षण में विनियामक आयोग प्रभावी भूमिका निभायें। समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी हो। निराकरण समय-सीमा में किया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निजी विश्वविद्यालयों में प्रभावी क्रियान्वयन हो इस कार्य में समन्वयक और मार्गदर्शक की भूमिका में आयोग सक्रिय सहयोग करें।

राज्यपाल श्री पटेल राजभवन में निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की समीक्षा आज कर रहे थे। राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा, अपर सचिव श्री मनोज खत्री, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति श्री भरत शरण सिंह, सचिव डॉ. के.पी. साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयोग निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर की निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाये कि परीक्षाएँ समय पर हों। मूल्यांकन कार्य निर्धारित समय अवधि में पूर्ण हो जाये। परीक्षाओं के परिणाम भी निर्धारित समय पर घोषित किए जायें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या और उसकी तुलना में प्लेसमेंट की स्थिति की जानकारी भी वर्षवार संधारित की जाए। सभी विश्वविद्यालयों में प्लेसमेंट सेल का गठन होना चाहिए। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, कार्यरत शिक्षकों की समस्या समाधान की ऑनलाइन व्यवस्था किए जाने की भी जरुरत बताई।

राज्यपाल श्री पटेल ने सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाने के प्रयासों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों और वर्गों में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात कम है। उसे बढ़ाने के संबंध में नियोजित प्रयास किए जायें। प्रदेश में पुरुष महिला सकल नामांकन अनुपात बराबर होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित किए जाने की जरुरत बताई। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करने के लिए निर्देशित किया।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में वर्तमान पाठ्यक्रमों में सुधार, अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान दिया जाए। उद्योगों, निजी परोपकारी संस्थानों द्वारा छात्रवृत्ति फण्ड स्थापित कराने, ऑनलाइन माध्यम से पाठ्यक्रम संचालन द्वारा वंचित और नि:शक्त छात्रों के लिए शिक्षा की पहुँच बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया जाना चाहिए। फैकल्टी अप-स्किल्स एंड मोटिवेशन के कार्यों को भी विस्तारित कराने पर ध्यान केन्द्रित किया जाये। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार वर्तमान पाठ्यक्रमों के साथ अंत: विषय, पाठ्यक्रमों को जोड़ने के प्रभावी प्रयास किए जाये। निजी विश्वविद्यालयों को इन्फ्रा-स्ट्रक्चर में सुधार और उच्च ग्रेडिंग हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

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