जामगढ़ वैश्विक धरोहर महाशिवरात्रि पर्व लगता है मेला

गोविन्द दुबे रायसेन/बरेली।
बरेली। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर ग्राम जामगढ की विंध्याचल पर्वत माला पर स्थित शिवगुफा पर उमडता है शिव भक्तों का जनशैलाब। जामगढ के समीप विन्ध्याचल की पहाडी पर स्थित प्राकृतिक शिव गुफा का अलग ही महत्व है यहां स्थानीय एवं दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और त्रिलोकीनाथ के दर्शन पूजन अभिषेक कर अपने आप को धन्य करते हैं। बरेली से लगभग २० किलो मीटर दूर स्थित विंध्याचल पर्वत माला के बीचों-बीच भावी को मेटने में समर्थ त्रिपुरारी विराजते हैं यहां का इतिहास उतना ही पुराना है जितना विंध्याचल पर्वत माला का इस पर्वत के ठीक मध्य में गुफा है। यहां औगढदानी प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं वर्षा ऋतु में हरे भरे वृक्ष और झरने की कल-कल ध्वनियां यहां का सौन्दर्य बढाती है। वर्षा ऋतु में यह पर्वत माला अनेक छोटे झरनों के कारण धूदिया पहाडी का रूप धारण कर लेती है और एक बडा झरना वर्षा काल में जल प्रपात के रूप में सौन्दर्य को बढाता है।रहस्यमयी बावडी
गुफा के बीच में जहां प्राकतिक शिवलिंग है वहीं भीतर एक प्राकृतिक बावडी मौजूद है इस रहस्यमयी बावडी में पानी तक लेटकर जाना पडता है। प्राकृतिक क्षरण के जैसे कारणों से बावडी तक पहुंचना अवश्य कठिन होता जा रहा है किन्तु यहां सदैव जल भरा रहता है जो तीर्थों के जल जैंसा पवित्र माना जाता है। अनुमान है कि गुफा पहाडी के काफी अंदर तक है।11वीं सदी का पाषाण सुरई मंदिर
रीछइमल (जामवंत) जी द्वारा हाथ से निर्मित पत्थरों का बना प्राचीन एतिहासिक पुरातत्वविद डॉं. आरसी पांड, मो. बसीम खां, कुंअर बजाहत शाह ने हजारों वर्ष पुराने होने का दावा किया है। यहां मौजूद पद चिन्ह व अन्य पुरातत्वीय संमदा शैलानियों दर्शनार्थियों को आकर्षित करती है।

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