बगलबाड़ा नर्मदा तट पर प्रति बर्ष की भांति होगा धार्मिक आयोजन

गोविन्द दुबे 9893802968

बरेली यह क्षेत्र मां नर्मदा की आस्था के केन्द्र माना जाता है इस क्षेत्र के ग्रामीण अचंलों से निकली मां नर्मदा कल-कल बहती है। हर वर्ष मकर संक्राति पर आस्था का सैलाब नर्मदा तटों पर उमडता है। नवाबी शासन के दौरान भी बगलबाडा में एक माह का मेला भरा करता था। वर्तमान में मेले की विशालता के साथ समय भी अब कम हो गया है। ब्रह्मलीन वनखंडी वाले महाराज की तपोस्थली नर्मदा तट बगलवाडा में मकर संक्रांति पर्व पर १३ से १९ जनवरी तक श्री विष्णु महापुराण साप्ताहिक कथा की सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। बगलबाडा में प्राचीन विशाल मंदिर कुटी संस्कृत पाठशाला भी मौजूद है। तीन नदियों के बीच बगलवाडा बसा हुआ है ऐंसा नर्मदा मैया के अन्य उत्तर तटों पर पुण्यदायी संगम की स्थिति नही होने से सदियों से बगलबाडा नर्मदा भक्तों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

तीन नदियों का संगम

नर्मदा मैया के ऊपरी हिस्से पूर्व दिशा में सागर जिले से निकली तेंदौनी नदी नर्मदा में मिली है। तो पश्चिम दिशा में विन्ध की पर्वत श्रेणियों से निकली बारना नदी सेमरी घांट ग्राम के पास मिलती है। इन दोनो नदियों के बीच ग्राम बगलवाडा है और उत्तरी घांट पर मकर संक्रांति पर्व पर एक माह का विशाल मेला लगने की परम्परा प्राचीन है।

निकट पुंडा बाबा स्थान

नर्मदा मैया में मिलने से पूर्व तेंदौनी नदी किनारे का एक स्थान पुंडा बाबा के नाम से ख्याति प्राप्त है। ऐंसी मान्यता और कथा प्रचलित है कि नर्मदा के उत्तर तट पर पांडवों ने यज्ञ किया था जिनमें हाथी, घोडों की बली दी गई थी। बरेली और बगलवाडा के बीच एक स्थान सिला पौर के नाम से जाना जाता है। सिद्ध द्वार शायद अपभ्रंग होकर सिला पौर हो गया होगा। नर्मदा मैया के उत्तरी तट पर कभी घनघोर बियावान जंगल रहा होगा और जंगल में हिंसक पशुओं की भारी संख्या रहती होगी।

सात दिवसीय रूद्राभिषेक कथा

पुण्य सलीला मां नर्मदा के उत्तर तट पर विभिन्न पर्वों पर धार्मिक श्रृद्धालुओं की भारी उपस्थिति रहती है। मकर संक्रांति का स्नान पर्व १४ जनवरी को पडता है। तपो भूमि बगलवाडा में १३ जनवरी से महा मंडलेश्वर गिरीशदास महाराज के द्वारा श्री विष्णु महापुराण का साप्ताहिक आयोजन होने जा रहा है। विद्या वाचसस्पति आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय के श्रीमुख से धार्मिक श्रद्धालुओं को कथा श्रवण का अवसर प्राप्त होगा। इसी के साथ महारूद्राभिषेक का प्रात सत्र में आयोजन होगा।

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