डॉ. संतोष चौबे को मिलेगा राष्ट्रीय गुणाकर मुले सम्मान

भोपाल। संस्कृति विभाग हिंदी भाषा के विकास में अमूल्य योगदान देने वालों को वर्ष 2019 और वर्ष 2020 के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करेगा। राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान-2019 जयदीप कर्णिक, दिल्ली, 2020 का संस्था ऋतम, दिल्ली को, राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान-2019 डॉ. कृष्ण कुमार, बर्मिंघम, 2020 का रोहित कुमार हैप्पी को, न्यूजीलैंड, राष्ट्रीय फादर कामिल बुल्के सम्मान-2019 डॉ. बीरसेन जागासिंह, मॉरीशस, 2020 का प्रो. हिदिकी इशिका, टोक्यो को, राष्ट्रीय गुणाकर मुले सम्मान-2019 पद्माकर धनंजय सराफ, 2020 का डॉ. संतोष चौबे, भोपाल को प्रदान किया जाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय हिंदी सेवा सम्मान-2019 डॉ. शीला कुमारी, त्रिवेंद्रम, 2020 सुधीर मोता, भोपाल को प्रदान किया जाएगा। ये अलंकरण 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाएंगे। इस अलंकरण में वर्ष 2018 के राष्ट्रीय निर्मल वर्मा सम्मान से सम्मानित अर्चना पैन्यूली, डेनमार्क और वर्ष 2018 के राष्ट्रीय फादर कामिल बुल्के सम्मान से सम्मानित आनी मांतो को भी निमंत्रित किया जा रहा है क्योंकि विगत अलंकरण में यह दोनों शामिल नहीं हो पाए थे।

गुणाकर मूले ?

गुणाकर मूले का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के सिंधु बुजुर्ग गाँव में 3 जनवरी 1935 को हुआ था। मराठी मूल का होने के बावजूद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गणित में एम.ए. की उपाधि‍ प्राप्त की और लेखन के लिए हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं को माध्यम बनाया। अपने जीवन के अनेक कीमती वर्ष उन्हों दार्जीलिंग स्थित राहुल संग्रहागार से संबद्ध रह कर बिताए। उसके बाद वे 1971-72 में दिल्ली आ गए और फिर दिल्ली ही उनके जीवन का अंतिम पड़ाव बनी। गुणाकर मूले जी ने 30 किताबें और अनगिनत लेख लिखे। प्रमुख पुस्तकें हैं- संसार के महान गणितज्ञ, आकाशदर्शन, महान वैज्ञानिक, नक्षत्र लोक, आपेक्षिकता का सिद्वान्त, भारतीय लिपियों की कहानी, भारतीय अंकपद्वति की कहानी, अंतरिक्ष यात्रा, केपलर, अर्किमिडीज इत्यादि। उन्होंने दूरदर्शन से प्रसारित ‘विज्ञान भारती’ प्रोग्राम के लिए दो सालों तक स्क्रिप्ट लेखन का भी कार्य किया।

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