मैं चुनती हूं रोज कलम अपनी
कलम ने भारतीय नारी को चुना
हर वक्त खोजती रही मैं नया
मुझे अपनी ही मातृभूमि में मिला।।

मैं चुनती हूं रोज कलम अपनी
कलम ने भारतीय नारी को चुना
हर वक्त खोजती रही मैं नया
मुझे अपनी ही मातृभूमि में मिला।।

है नमन , हे भारतीय नारी तुम्हें
अबला नहीं सबला बनकर
जब तुमने है दिखलाया ,
पुरुषों की नगरी में भी तुमने
अपना परचम लहराया ।।

ऐसी ही एक महिला है
जिनकी निष्ठा मातृभूमि के संग
जिस दिन जन्मी वह कृषक के घर
उस दिन मातृभूमि को सम्मान मिला ।।

मातृभूमि की सेवा की जिद ने
नेतृत्व की परिभाषा बतलाई
निष्ठा रखकर भारत के प्रति
भारतीय सेना में नाम किया।।

है गर्व मुझे हर उस महिला पर
जो समर्पित हैं देश के लिए ,
मात-पिता की शिक्षा पाकर
कुछ ऐसा ही श्रीमती पुनीता जी ने किया।।

सेवा ही है सच्ची मेवा,
यह दुनिया को है बतलाया
वन प्रथम महिला नौसेना में ,
परम विशिष्ट सेवा का सम्मान लिया।।

प्रथम महिला के रूप में
श्रीमती पुनीता जी ने भी
नारी शक्ति को बतलाया
पुरुषों की नगरी में रहकर
जिनको पुरुषों सा सम्मान मिला।।

नारी शक्ति को प्रणाम
जय हिंद जय भारती

प्रतिमा दुबे अभिलाषी
ग्वालियर मध्य प्रदेश

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