30 अगस्त को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज

30 अगस्त को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज

ग्वालियर संवादाता ।। जन्माष्टमी का पर्व हर साल भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने बताया कि हिंदू मान्यता अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए ये त्योहार बेहद ही खास होता है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और रात के 12 बजे कृष्ण जी की पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। भगवान कृष्ण ने मथुरा नगरी में कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया था अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11.25 बजे से होगी और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को 01.59 बजे पर होगी। रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ 30 अगस्त को सुबह 06.39 बजे पर होगा और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे होगी। पूजा का समय 30 अगस्त की रात 11.59 बजे से 12.44 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट की है। जन्माष्टमी व्रत के नियम: इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। ये व्रत एक निश्चित अवधि में तोड़ा जाता है। अमूमन जन्माष्टमी व्रत अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद तोड़ा जाता है। यदि सूर्योदय के बाद इन दोनों में से कोई भी मुहूर्त सूर्यास्त से पहले समाप्त नहीं होता तो व्रत सूर्यास्त के बाद तोड़ा जाता है। अगर इन दोनों में से कोई भी एक मुहूर्त पहले समाप्त हो जाये तो उस समय के बाद जन्माष्टमी व्रत का पारण किया जा सकता है।

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