आइटीएम यूनिवर्सिटी की विद्यार्थी निशा को मिली सफलता, औषधीय मशरूम पर शोध कर तैयार किए 11 तरीके के खाद्य पदार्थ

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संवाददाता सुरेश मालवीय

ग्वालियर । नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की उपासना की जाती है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। मां अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। स्कंदमाता के आशीर्वाद से शोध के क्षेत्र में शहर की बेटियां लगातार सफल होकर देश का नाम रोशन कर रही हैं। आइटीएम यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर विभाग की विद्यार्थी निशा निरंजन ने मेडिसनल मशरूम कॉर्डिसेप्स मिली पाइरेस पर शोध कर दुनिया को स्वस्थ रहने का मंत्र दिया है। हालांकि इससे पहले भी मशरूम को लेकर शोध कार्य होते रहे हैं, लेकिन यह शोध अन्य से अलग है, क्योंकि इसे शाकाहारी रूप में विकसित किया गया है। इससे पहले कॉर्डिसेप्स की उत्पत्ति मासाहारी में होती रही है। अब शाकाहारी होने की वजह से ऐसे लोग भी इसका सेवन कर सकेंगे, जो मासाहारी भोजन नहीं करते हैं। मेडिसनल मशरूम की कीमत लाखों में होती है। लैब में तैयार मशरूम से 11 खाद्य पदार्थ तैयार कर बाजार में उतारे गए हैं, जो लोगों को बेहद पसंद आए हैं। निशा ने बताया कि उनकी स्टार्टअप कंपनी का टर्नओवर 14 लाख तक हो चुका है।

एंटी टॉक्सिक मटेरियल किए तैयार: बाजार में आने वाले स्नैक्स चिप्स आदि खाद्य पदार्थों में टॉक्सीटी ज्यादा होने की वजह से वे सेहत के लिए अच्छे नहीं होते। शोध सफल होने के बाद मशरूम से सात सेहतमंद उत्पाद, पांच फूड उत्पाद तैयार किए गए। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित हुए। इन खाद्य पदार्थों को बाजार में उतारने के बाद इनकी बाजार में काफी ज्यादा डिमांड है।

लाकडाउन में बिताया लैब में समयः निशा ने बताया कि कोरोना के दौर में लंबे लाकडाउन की वजह से पढ़ाई बेहद प्रभावित हो रही थी। इसलिए लैब में मेडिसनल मशरूम उगाना शुरू कर उन पर शोध शरू किया। पहले चरण में 300 ग्राम मशरूम ही उगाई गई। इन मशरूम को उगाते समय बहुत सावधानी रखी। जिस तरह एक मरीज आइसीयू में रहता है ठीक उसी तरह मशरूम की देख रेख की। मेडिशन मशरूम की कीमत अन्य मशरूम से 70 प्रतिशत ज्यादा होती है। लैब में 300 ग्राम मशरूम करीब 43 हजार रुपये का उगाया गया। शोध सफल होने के बाद इसे बाजार में लाया गया।

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