बहन की मुस्कुराहट से प्रसन्न होते हैं यमराज-भागवताचार्य

बहन की मुस्कुराहट से प्रसन्न होते हैं यमराज-भागवताचार्य पं. घनश्याम शास्त्री जी
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानी दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित घनश्याम शास्त्री जी महाराज के अनुसार इस बार भाई दूज का त्योहार 06 नवंबर 2021 दिन शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक करके उनकी लंबी आयु, उन्नति व बेहतर भविष्य की कामना करती हैं। भाई भी बहन के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लेते हैं।
भाई दूज शुभ मुहूर्त-
भाई दूज 06 नवंबर 2021 दिन शनिवार
भाईदूज पर तिलक का समय: दोपहर 01:10 मिनट से शाम 03:21 बजे तक रहेगा।
तिलक अवधि: कुल मिलाकर 2 घंटा 11 मिनट की रहेगी।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि आरंभ : 05 नवंबर 2021 दिन शुक्रवार को रात 11 बजकर 14 मिनट से।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त : 06 नवंबर 2021 दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 44 मिनट पर।

भाई दूज तिलक विधि-
भाई दूज के लिए थाली तैयार करें उसमें रोली, अक्षत, गोला और मिष्ठन रखें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान पूजन करें। अब घर की उत्तर-पूर्व दिशा में चौक बनाएं और फिर लकड़ी की पटरी पर भाई को बिठाकर तिलक करें और गोला देकर मिष्ठान खिलाएं। इसके बाद प्रेम पूर्वक भाई को भोजन करवाना चाहिए।
भाई दोज के नियम-
जहां रक्षा बंधन के त्योहार पर बहनें भाई के घर आती हैं तो वहीं भाई दूज पर बहनों के घर जाने का विधान हैं क्योंकि इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर गए थे, इसलिए जिनकी बहनों की शादी हो चुकी है उन भाइयों को अपनी बहन के घर जाना चाहिए। जिनकी शादी नहीं हुई है वे अपने घर पर ही तिलक कर सकती हैं।
इस दिन बहनों को अपने भाई को आमंत्रित कर, उनके मनपसंद भोज्य पदार्थ बनाकर खिलाने चाहिए और उनका तिलक करके उन्हें पान खिलाना चाहिए।
तिलक करवाने के बाद भाई को भी अपनी बहन का आशीर्वाद लेना चाहिए व उन्हें भेंट में कुछ देना चाहिए

भाई दूज की पौराणिक कथाएं
भागवताचार्य जी ने बताया कि भविष्य पुराण में वर्णित यह द्वितीया की कथा सर्वमान्य एवं महत्वपूर्ण है, इसके अनुसार काल देवता यमराज की लाडली बहन का नाम-यमुना है, यमुना अपने प्रिय भाई यमराज को बार-बार अपने घर आने के लिए संदेश भेजती थी और निराशा ही पाती थी. उनका एक दिन अनुरोध सफल हुआ और यमराज अपनी बहन यमुना के घर जा पहुंचे. यमुना उन्हें द्वार पर देखकर हर्ष-विभोर हो उठीं. अपने घर में उसने भाई का जी भर कर आदर सत्कार किया. उन्हें मंगल-टीका लगाया तथा अपने हाथों से बना हुआ स्वादिष्ट भोजन कराया.यमराज बहन के स्नेह को देखकर प्रसन्न हो गए और उन्होंने बहन से कुछ मांगने का आग्रह किया. यमुना भाई के आगमन से ही सब कुछ पा चुकी थीं. भाई के आग्रह पर बस एक ही वरदान मांगा था, और वह वरदान था- आज का दिन भाई –बहन के स्नेह का पर्व बनाकर सदा स्मरणीय रहे. उस दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया थी, तब से यह दिन भाई बहन के प्रेम का पर्व बन गया. इस दिन प्रत्येक बहन अपनी सामर्थ्य के अनुसार स्वादिष्ट भोजन बनाकर अपने भाई को खिलाती हैं और भाई उसे भेंट अर्पित करता है, लोक धारणा है कि बहन के घर भोजन करने से भाई को यम बाधा नहीं सताती तथा उसकी कीर्ति एवं समृद्धि में वृद्धि होती है

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