तृतीय दिवस भगवान कपिल और माता अनुसुइया की कथा का हुआ वर्णन-

भारत जैसी माँ पूरे विश्व की संस्कृति में कहीं नहीं पाई जाती है- आचार्य मनोज अवस्थी

भिंड/ अटेर—– कृषि फार्म मैन रोड ग्राम खड़ीत में श्रीमद्भागवत कथा की ज्ञान गंगा बह रही है, कथा के आयोजक श्याम सुंदर कटारे, पारीक्षत अवधेश कटारे और चित्रकूट धाम से पधारे गुरुदेव श्री श्री 108 सुंदरदास जी महाराज के आशीर्वाद से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस अंतरराष्ट्रीय कथावाचक समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने भगवान कपिल और सती अनुसुइया का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने परीक्षित के जीवन चरित्र, सुखदेव जी का वृतान्त और कलयुग व महाराज परीक्षित के बिच संवाद, कलयुग का आगमन व भगवान ब्रह्मजी कि उत्पति के बारे में विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भगवान कपिल अवतार का प्रसंग के साथ ही सती अनुसुइया का प्रसंग सुनाते हुए बताया नारद जी ने लक्ष्मी, पार्वती व ब्राह्माणी के पास माता सती अनुसुइया की प्रशंसा की, नारद जी द्वारा सती अनुसुइया की प्रशंसा सुनकर तीनों देवियां सोचने लगी कि क्या अनुसुइया ही सती हैं हम नहीं? इस पर लक्ष्मी ने विष्णु को, पार्वती ने शिव को व ब्राह्माणी ने ब्रह्मा जी को माता सती अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए भेजा। तीनों साधू रूप धारण का माता अनुसुइया के पास अलख जगाते हैं कि माता हमें भोजन करवाओ। हम कई दिन के भूखे हैं। माता उन्हें घर में ले गई और भोजन की व्यवस्था करने लगी। साधू बोले की उन्हें भोजन करवाना है तो विवस्त्र अवस्था में करवायेंगीं तो ही करेंगे नहीं तो चले जाएंगे। इतना कहने पर माता ने तीनों को छह मास के बालक बनाकर पालने में डाल दिया और प्रत्येक को बारी-बारी से दूध पिलाने लगी। जब कई मास बीत गए तो माता लक्ष्मी, पार्वती व ब्राह्माणी अपने-अपने पतियों को लेने के लिए आई। सती अनुसुइया ने उन्हें अपना-अपना पति ले जाने की अनुमति दी लेकिन तीनों अपने-अपने पति को पहचानने में असमर्थ थी। कथावाचक ने माता पिता के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि माता की ममता को और पिता की क्षमता का दुनियां में कोई भी आंकलन नहीं कर सकता, भारत जैसी माँ पूरे विश्व की संस्कृति में कहीं नहीं पाई जाती है। मैं किसी राजनैतिक दल जे संबन्ध नहीं रखता हूँ लेकिन आज पूरे देश मे धर्म और संस्कृति की बातें चल रही इससे लगता है कि आज हमारे देश की बागडोर सुरक्षित हाथों में है अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमें विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। भागवत कथा के दौरान कथा पंडाल में सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष आचार्य अवस्थी जी की कथा सुनकर भावविभोर हुए, कथा में आये हुए अतिथियों का पटका डालकर सम्मान भी किया गया।

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