“ह्रदय दृश्यम” का दूसरा दिन संगीत कला की अद्भुत प्रस्तुतियों के नाम

“ह्रदय दृश्यम” संगीत समारोह के दूसरे दिन शहर के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर देश और विदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने संगीत कला की अद्भुत प्रस्तुति दी। समारोह की शुरूआत संचालक संस्कृति श्री अदिति कुमार त्रिपाठी, ओमेगा के श्री सुशील प्रकाश द्वारा दीप जला कर की। जनजातीय संग्रहालय में मध्यप्रदेश राग भोपाली द्वारा जरी जरदोजी पैटर्न डिजाईन प्रतियोगिता के 48 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कलाकार पंडित विजय घाटे द्वारा ‘ताल चक्र’ की प्रस्तुति दी गई।

 कलाकार पंडित विजय घाटे ने कहरवा ताल में शिव स्तुति की प्रस्तुति दी। ताल कहरवा को रूपांतरित करते हुये उन्होंने तीन ताल में रचना मेलोडी और रिदम प्रस्तुत किया। साथ ही कथक नृत्यांगना शीतल कोलवलकर ने कथक और वोकल पर सुरंजन खंडालकर ने आकर्षक प्रस्तुति दी।

भारत भवन में संतूर वादक राहुल शर्मा ने संतूर वादन में राग गावती में अलाप, जोड़ और झाला की प्रस्तुति दी। उन्होंने रूपक ताल, मध्य लय एवं द्रुत लय की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति का समापन उन्होंने पहाड़ी धुन से किया।

रवींद्र भवन में पद्मश्री सुश्री सोमा घोष और श्री जो अल्वारेस के साथ माटटियो फ्राबोनी (इटली) ने फ्यूजन म्यूजिक की मधुर धुनों की प्रस्तुति दी। ड्राइव इन सिनेमा में लाइरन मेय्यूहास (इजराइल) द्वारा एथनिक संगीत की प्रस्तुति दी गई और ध्रुवा बैंड के कलाकारों द्वारा कई गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी गई। बैंड के कलाकारों ने शुरुआत वैदिक मंत्र से की। उन्होंने गजाननं गजाननं…, अच्युतम केशवं रामनारायण…, तब न जारे हृदयं (प्रेमगीत)…,भज गोविन्दम…, हम ध्रुवा हैं…, मन लागो मेरो यार फकीरी में…, नर्मदा गीत…, मधुराष्टकं और अन्य भजन और गीतों की प्रस्तुति दी। मंच पर डॉ. संजय द्विवेदी, ज्ञानेश्वरी द्विवेदी, वैभव संतोरे, स्वप्निल बगुल, विजय गौर, राकेश सतनाकर एवं अन्य ने संगत की। प्रस्तुतियों के दौरान बड़ी संख्या में कला प्रेमी और जनसमूह उपस्थित रहा।

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