गैर मान्यताप्राप्त पत्रकारों को क्यों नजरअंदाज कर रही है सरकारें

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में राज्य स्तर/जनपद स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्यों की विशिष्टता के दृष्टिगत उनके स्वास्थ्य जोखिमों के कारण उन्हें एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी चिकित्सालयों के अलावा नजदीकी प्राइवेट चिकित्सालयों में भी उपचार कराए जाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना’ के अन्तर्गत सम्मिलित करते हुए चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है। इस सम्बन्ध में शासन द्वारा निर्देश जारी कर दिया गया है।जो निश्चित ही स्वागत योग्य है लेकिन गैर मान्यताप्राप्त पत्रकारों की लगातार अनदेखी करना भी ठीक नहीं है सरकार को गैर मान्यताप्राप्त पत्रकारों पर भी ध्यान देना चाहिए।
पत्रकारों की संस्था जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंड़िया (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा कि सरकार और समाज के बीच की मजबूत कड़ी है पत्रकार। गैर मान्यताप्राप्त पत्रकार भी पूरी निष्ठा और इमानदारी के साथ अपने कार्य को अंजाम देते है। फिर उन्हे क्यों नजरअंदाज किया जाता है।
आज देश में लगातार सच का सामना कराने पर पत्रकारों के साथ अभद्रता मारपीट व झूठे मुकदमे दर्ज होने के मामले सामने आ रहे है। सरकार द्वारा पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने पर कार्यवाही होने की बात तो कही जाती है लेकिन कोई कार्यवाही न होने से दबंगो के हौसले और बुलंद होते जा रहे है और इस पर सरकारों का उदासीन रवैया चिंतनीय है।
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि पत्रकार निष्पक्ष और निर्भीक होकर अपने काम को अंजाम दे। पत्रकारों के संगठन काफी समय से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग करते आ रहे है लेकिन सरकारे इस पर ध्यान नहीं दे रही।हाल ही में पांच राज्यों मे विधानसभा चुनाव है पर अभी तक किसी पार्टी ने भी पत्रकारों के लिए कोई घोषणा नहीं की । सभी पार्टियाँ मीडिया से हमेशा सहयोग चाहती है लेकिन मीडिया कर्मियों की समस्याओ के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।

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