पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार पर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने उठाए सवाल?

पत्रकारों के साथ पुलिस के व्यवहार पर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने उठाए सवाल?

सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व डीजीपी से की अपील

देश के अंदर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं देश में कई पत्रकारों की हत्या कर दी गई देशभर में पत्रकारों ने इसको लेकर बड़ा विरोध दर्ज किया उसके बावजूद यह हमले कम नहीं हो रहे हैं इसी को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने मोर्चा खोल दिया है पत्रकारों के हित में काम करने वाले जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की है इसको लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और नेता विपक्ष को पत्र भी लिखे जा चुके हैं पत्रकारों को भयमुक्त पत्रकारिता करने के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है लगातार ग्राउंड रिपोर्ट करने जा रहे पत्रकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी कार्यालय और पुलिस विभाग में भी पत्रकारों के साथ सही सुलूक नहीं हो रहा है।
अभी ताजा मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से सामने आया है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सदर बाजार पुलिस द्वारा पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को लेकर जिलेंभर के पत्रकारों में गहरा रोष व्याप्त हो चुका है। पत्रकारों का कहना है कि एक तरफ योगी सरकार पत्रकारों की सुरक्षा का दम्भ भरती है, वहीं जनपद पुलिस किसी भी पत्रकार को जांच किए बिना मुकदमा दर्ज कर लेती है। पुलिस की इस दमनात्मक कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में मनीष अग्रवाल को झूठा फंसाया गया, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इस पर स्थानीय पत्रकारों ने डीएम अखिलेश सिंह एवं एसएसपी डॉ.एस चन्नपा को ज्ञापन भी सौंपा है। पत्रकार मनीष अग्रवाल के अनुसार 2 अगस्त 20 को ट्वीटर हैण्डल पर एक मैसेज संकल्प नैब द्वारा अपने मोबाइल नम्बर से सोशल मीडिया पर रिपोस्ट किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कोरोना इलाज के लिए मरीजों की निगेटिव रिपोर्ट को पॉजिटिव बनाने का गोरखधंधा से संबंधित खबर चलायी गयी थी। जिसमें सीएमओ डॉ.बीएस सोढी ने उक्त प्रकरण में संकल्प नैब के विरूद्ध थाना जनकपुरी पर सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की अपेक्षा जतायी थी। मनीष अग्रवाल ने बताया कि इस संकल्प नैब के खिलाफ थाना जनकपुरी में रिपोर्ट दर्ज समेत अन्य मामलों को उन्होंने व्हाट्सप ग्रुप पर उजागर किया था। इसी बात से खिन्न होकर संकल्प नैब ने थाना सदर बाजार पर शराब पीकर धमकी देने व गाली गलौच करने से संबंधित मुकदमा दर्ज कराया। जो सरासर गलत एवं निराधार है।
इसी को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इंडिया के दिल्ली संयोजक साइम इसरार ने कहा पुलिस का पत्रकारों के साथ व्यवहार ठीक नहीं है थानों में पत्रकारों के साथ बदसलूकी की जाती है पत्रकारों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता यही कारण है कि छोटी घटनाएं बड़े रूप ले लेती हैं शुरुआती दौर में पुलिस पत्रकारों की शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करती कहीं पत्रकारों को धमकाया जाता है तो कहीं झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है प्रशासन मूकदर्शक बना देख रहा है पत्रकार अपने काम को खौफ के साए में अंजाम दे रहे हैं। जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इंडिया सभी प्रदेशों के सभी मुख्यमंत्रियो व डीजीपी से अपील करती है कि पुलिस पत्रकारों के साथ सम्मान से पेश आएं क्योंकि पत्रकार जनता और सरकार के बीच में एक पुल की तरह काम करता है।

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