जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी साथ देने वाले एंबुलेंस ड्राइवर असली कोरोना योद्धा

झाबुआ। कोरोना योद्धा सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं और उन सभी को कहा जाता हैं जो कोरोना वायरस य कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे हैं, उनमें विशेषकर वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई है वो है एंबुलेंस के ड्राइवर जो कोरोना से संक्रमित मरीजों को जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं जो अपनी जान की परवाह किए बिना 24 घंटे ब्यूटी के साथ संक्रमित मरीजों को घर से अस्पताल और अस्पताल से कब्रिस्तान या शमशान घाट तक ले जाने में अपनी जिंदगी को दांव पर रखकर मानवीय सेवा में लगे है, यह वह लोग हैं जो पर्दे के पीछे की भूमिका निभा रहे हैं उन्हें समझने वाला कोई नहीं। देखा गया है कि कोरोना वायरस के ज़ोर-शोर के दौर में कई यातायात से जड़े लोग भी इस वैश्विक महामारी की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। उनकी ज़िंदगी इस पूरे दौर में काफ़ी कठिन रही है। एक काफ़ी चर्चित वाक़िया गत वर्ष जिला अस्पताल झाबुआ मे पदस्थ एंबुलेंस ड्राइवर जो कोरोना के दौर में कुछ महीने तक वो कोरोना के मरीज़ों की जांच के सैंपल इंदौर से झाबुआ -इंदौर से झाबुआ और इससे पीड़ित मरीजो के स्थानांतरण का काम रात-दिन कर रहा था।अंततः वो ख़ुद कोरोना की चपेट मे आने की वजह से गुज़र गया। कई अन्य ड्राईवर इसी तरह अपनी जान गंवा चुके हैं जिनके अलग से आँकड़े किसी संस्थान ने जारी नहीं किए, और आज भी कई एंबुलेंस ड्राइवर जो सरकारी व निजी अस्पतालों में अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात कोविड संक्रमित मरीजो के स्थानांतरण कार्य में लगे है, देखा जाए तो कोरोना के असली योद्धा ये है। सरकारी एंबुलेंस ड्राइवर की व्यवस्था कोरोना होने पर कुछ भी घटना होने पर सरकार द्वारा आर्थिक सहायता की जाती है, लेकिन निजी अस्पतालों में कार्यरत ड्राइवरों को जिंदगी के बाद क्या ?

जीवन ज्योति अस्पताल मेघनगर के एंबुलेंस ड्राइवर बसंत मेड़ा ने बताया कि एंबुलेंस ड्राइवर होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम मरीज को समय पर अस्पताल तक पहुंचा कर उसकी जिंदगी बचाए, हमारे लिए मरीज की जिंदगी महत्वपूर्ण है। कहां की हम एंबुलेंस ड्राइवर जिंदगी के साथ भी और जिंदगी खत्म होने के बाद तक मरीज का साथ देते हैं।

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