जिला एवं स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा

झाबुआ। covid-19 कोरोना संक्रमण के मामले प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं झाबुआ जिले में अब तक सरकारी आंकड़े 200 पार हो चुके है और ऐसे कई संक्रमित जो अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं और घर पर ही मेडिकल से दवाई गोली लाकर खा रहे हैं वह लोग परिवार के सदस्यों के साथ अन्य पड़ोसियों को भी संक्रमित कर रहे जिस पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान नहीं है महज शहरों में अनाउंसमेंट करवा कर अपनी सक्रियता दिखाने से कुछ नही होगा। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन एस.डी. एम. एवं तहसीलदार के आदेश का पालन करते हुए 2 से 3 विभाग की संयुक्त टीम बनाकर चौराहों पर बैठकर मास्क नहीं लगाने वाले वाहन चालको पर 100 रुपए की चालानी कार्यवाही कर छोड़ रहे हैं और पैदल चलने वाले बिना मास्क के आसानी से इधर-उधर घूम रहे हैं उनका क्या ? यह कैसा नियम जो वाहन चालको से संक्रमण की संभावना ज्यादा और पैदल चलने वालों से नहीं, खेर शासन की इनकम तो हो रही है और दूसरी और लापरवाही बरतने वालों पर भविष्य में ऐसी लापरवाही नहीं करने की सीख भी मिल रही है लेकिन यह सच भी है कि शासन की गाइडलाइन का पालन किसी भी विभाग में विशेषकर स्वास्थ्य विभाग मैं नहीं हो रहा है जहां मरीज उपचार के लिए विभिन्न बीमारियों से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं लेकिन सोशल डिस्टेंस नहीं रखते और नहीं कोई कर्मचारी अस्पताल परिसर में लगाया जो आने जाने वालों को इन नियमों का पालन करवा सकें। देखा जा रहा है कि स्वास्थ्य अमला संपूर्ण जिले में निष्क्रिय और लापरवाह नजर आने लगा है।

जांच के बिना सीधे ले रहे दवाइयां-:

स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता के चलते कोरोना महामारी अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपनी चपेट में लेने लगी है अधिक संख्या में ग्रामीण एरिया से मरीज सरकारी अस्पताल, निजी अस्पताल व झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक पर इलाज करवाने पहुंच रहे हैं अधिकतर मरीज कोरोना के लक्षण वाले है जिनकी परेशानी सुनकर डॉक्टर दवाई देकर भेज देते। कई मरीज सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर दवाई ले जा रहे हैं और समय रहते स्वास्थ्य में सुधार नहीं आने पर गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं तब तक पता नहीं कितने लोगों को संक्रमित कर देते हैं।

जमीनी स्तर तक फैला आमला निष्क्रिय-:

कई मरीज कोविड-19 से संक्रमित होते हैं जिनकी पहचान जांच के बिना नहीं की जा सकती है, यही मरीज ग्रामीण इलाकों मैं अन्य लोगों को भी संक्रमित कर रहे हैं स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, राजस्व विभाग के कोटवाल, स्वास्थ्य विभाग के ए.एन. एम. व आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में गांव लेवल तक कर्मी है, जो ऐसे मरीजों को चिन्हित कर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग जांच के लिए भेजे ताकि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार एवं समाज जनों से अलग रखकर उपचार किया जाकर संक्रमण से दूसरे लोगों को बचाया जा सके।

हर पांचवे घर में मरीज-:

कोरोना महामारी के इस दौर में ढूंढने पर हर पांचवे घर में एक दो मरीज आसानी से मिल जाएंगे। जिन्हें कोरोना जैसे लक्षण है, लेकिन मरीज अस्पताल पहुंचने के बजाय घर पर ही दवाई खा कर रह जाते है फिर गंभीर हालात होने पर इधर-उधर भटकते रहते है।

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