वैज्ञानिकों ने बताए स्टोन के अपशिष्ट को मुनाफे में बदलने के तरीके

वर्कशॉप का लोगों को जिले को मिलेगा लाभ- कलेक्टर श्री मिश्रा

जागृति पार्क में मार्बल, स्टोन के वेस्ट मटेरियल से नए प्रोडक्ट बनाने वर्कशॉप का हुआ आयोजन

कटनी-कटनी स्टोन को पहचान दिलाने जागृति पार्क में आयोजित कटनी स्टोन आर्ट फेस्टिवल आधारशिला के दौरान मार्बल व स्टोन से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल का कैसे बेहतर उपयोग हो सकता है, इसको लेकर जिला पुरातत्व, पर्यटन और संस्कृति परिषद व जिला खनिज प्रतिष्ठान द्वारा एडवांस मटेरियल प्रोसेस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल के सहयोग से वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें भोपाल से आए एमप्री के वैज्ञानिकों ने स्टोन के अपशिष्ट को मुनाफे में कैसे बदला जा सकता है, इस बात की जानकारी दी। वर्कशॉप के शुभारंभ में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने वर्कशॉप के आयोजन पर प्रकाश डाला। कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत स्टोन को चुनने के बाद स्टोन का उत्पादन बढ़ाने, व्यवसायियों को दूसरी जगह के व्यापारियों की अपेक्षा कास्ट कम कैसे आए और मार्बल, स्टोन उद्योग से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल का क्या उपयोग हो सकता है, इसको लेकर यह कार्यशाला आयोजित की गई। वैज्ञानिक वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर नई इकाईयां स्थापित करने की जानकारी देंगे और यदि जिले के व्यवसायी इस क्षेत्र में काम करेंगे तो जिला प्रशासन उनकी पूरी तरह से मदद करेगा। कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि स्टोन फेस्टिवल एक बार फेस्टिवल नहीं है बल्कि स्टोन उद्योग को बढ़ाने लगातार यह प्रक्रिया जारी रहेगी और आज की वर्कशॉप का निश्चित ही जिले को लाभ मिलेगा। कार्यशाला को संबोधित करते हुए एमप्री के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसकेएस राठौर ने कहा कि हम स्टोन, मार्बल, ग्रेनाइट के वेस्ट को अपशिष्ट नहीं मानते। हमारा काम है कि वेस्ट से हम क्या बना सकते हैं और हमारा संस्थान इसी को लेकर लगातार काम कर रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अशोकन पी. ने मार्बल, स्टोन व ग्रेनाइट के वेस्ट से कैसे माड्यूल किचिन की सामग्री, टाइल्स, सीट सहित अन्य सामग्री बनाई जा सकती है और उसमें कौन सा मटेरियल उपयोग होता है, इस बात की जानकारी स्थानीय व्यवसायियों को दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने इकाई स्थापित करने के लिए उपयोग होने वाली मशीनों के संबंध में भी बताया और कहा कि वेस्ट मटेरियल से जो भी इकाई स्थापित होती हैं, वे हमारे देश में ही उपलब्ध हैं। एमप्री के वैज्ञानिक डॉ. मनोज गुप्ता व रवि पाटकर ने भी मार्बल, स्टोन व्यवसायियों और इस उद्योग से जुड़े व्यापारियों को वेस्ट मटेरियल का बेहतर उपयोग कर लाभ प्राप्त करने की जानकारी दी। सेडमैप भोपाल की अनुराधा सिंघई ने कार्यशाला में बताया कि उद्यमिता सामाजिक व आर्थिक रूप से किसी क्षेत्र में कैसे विकास होता है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि 10 साल पूर्व स्टोन को लेकर उन्होंने रिसर्च किया था और कटनी के स्टोन फेस्टिवल के माध्यम से एक नई दिशा इस क्षेत्र में काम करने की मिली है। उन्होंने स्टोन के वेस्ट मटेरियल से बनी सामग्री की मार्केटिंग आदि करने की जानकारी दी। बीआईएस श्रीधर पांडेय ने प्रोडक्ट को मार्का कैसे मिलता है, इस बात की जानकारी कार्यशाला में प्रदान की। वर्कशॉप में जिले के उद्योगपति, मार्बल, सेंट स्टोन व्यवसायी, माइंस संचालक शामिल रहे।

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