केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डीएसटी देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष रूप से अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए 75 विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) केंद्र स्थापित कर रहा है ताकि इन समुदायों की वैज्ञानिक प्रतिभा को बढ़ावा दिया जा सके और उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान हो सके

केंद्रीय मंत्री जेएनयू कन्वेंशन सेंटर में “भारत के जनजातीय समुदाय को सशक्त बनाने में प्रौद्योगिकी के महत्व” पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे
एसटीआई केंद्र कृषि, गैर-कृषि, अन्य संबद्ध आजीविका क्षेत्रों और ऊर्जा, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी विभिन्न आजीविका संपदाओं में विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से 30,000 से अधिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आबादी को सीधे लाभान्वित करेंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष रूप से अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए 75 विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) केंद्र स्थापित कर रहा है ताकि इन समुदायों की वैज्ञानिक प्रतिभा को बढ़ावा दिया जा सके और उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान किया जा सके।

जेएनयू कन्वेंशन सेंटर में “भारत के जनजातीय समुदाय को सशक्त बनाने में प्रौद्योगिकी का महत्व” विषय पर 2 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 33 ऐसे एसटीआई केंद्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और डीएसटी द्वारा जल्द ही 7 केंद्र चालू हो जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये एसटीआई केंद्र कृषि, गैर-कृषि, अन्य संबद्ध आजीविका क्षेत्रों और ऊर्जा, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि जैसी विभिन्न आजीविका संपदाओं में विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की 30,000 से अधिक आबादी को सीधे लाभान्वित करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) का साइंस फॉर इक्विटी एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट (एसईईडी- सीड) विभाग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के समग्र विकास के लिए कई ज्ञान संस्थानों (केआई), और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) आधारित गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को अनुदान सहायता प्रदान कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मई, 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पदभार ग्रहण करने के बाद आदिवासी समुदाय को एक “नई डील” दी गई और पिछले 8 वर्षों में उन्हें सरकार में न केवल अधिक प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया, बल्कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों सहित विभिन्न योजनाओं और हस्तक्षेपों के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने के भी प्रयास किए गए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि यूपीए सरकार के दौरान, आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए केवल 21,000 करोड़ रुपये प्रदान किए गए थे, लेकिन मोदी सरकार के तहत इसे बढ़ाकर 78,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस 15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा, “जब हम स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बात करते हैं, तो हम जंगलों में रहने वाले अपने आदिवासी समाज के योगदान को स्वीकार करना नहीं भूल सकते। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, अल्लूरी सीताराम राजू, गोविंद गुरु जैसे अनगिनत नाम हैं, जो स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बने और मेरे आदिवासी भाइयों तथा बहनों, माताओं और युवाओं को मातृभूमि के लिए जीने-मरने के लिए प्रेरित किया।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि यह मोदी सरकार ही है जिसने हर साल 15 नवंबर को अमृत महोत्सव के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश के आदिवासी समाज की कला-संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया जा रहा है और गर्व के साथ उन्हें सम्मानित किया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन पर विराम लगाते हुए कहा कि जब भारत 2047 में अपने 100 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दुनिया के नक्शे पर सबसे ऊंचा स्थान हासिल कर लेगा, तब 25 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदायों के पास अमृत काल में बताने के लिए अपना स्वर्णिम इतिहास होगा।

Leave a Reply