मौसम की बेरुखी से मक्का व सोयाबीन की फसलें होने लगी प्रभावित

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट

सीहोर । जिले में इस बार किसानों ने जून महीने में बरसात शुरू होते ही सोयाबीन और मक्का की फसल की बोवनी कर दी थी। किसानों को आगामी दिनों में बेहतर बरसात होने की उम्मीद थी, लेकिन बीते एक पखवाड़े से जिले में बरसात नहीं हो रही है। इस कारण से सोयाबीन और मक्का की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है, वहीं जमीन में दरारें पड़ने लगी हैं। यदि जल्द बरसात नहीं हुई तो खरीफ की फसलें प्रभावित होंगी। इसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। जिले में अभी तक यदि धान की फसल को छोड़ दिया जाए तो, अन्य खरीफ की फसल की बोवनी लगभग पूरी हो चुकी है। हालांकि इस बार सोयाबीन के बीज पर मंहगाई का असर अधिक होने के कारण से किसानों ने मक्का की फसल की भी बोवनी की है। इस कारण से जिले में मक्का के रकबे में इजाफा हुआ है। लेकिन अब बरसात नहीं होने के कारण से हालात यह है कि सोयाबीन की फसल में किसान कीटनाशकों का छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं।

अभी तक आधी भी नही हुई बरसात

जिले में 14 जुलाई तक आधी भी बरसात नहीं हुई है। जबकि किसानों ने एक पखवाडा पहले ही जून महीने में सोयाबीन और मक्का की फसल की बोवनी कर दी थी। अब बरसात नहीं होने के कारण से सोयाबीन की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों का कहना है कि पानी के जमाव वाले खेतों में तो सोयाबीन की फसल की स्थिति ठीक है, लेकिन जिन खेतों में नमी कम रहती है। ऐसे खेतों सोयाबीन और मक्का की फसल प्रभावित हो रही है। बीते साल की तुलना में इस बार अभी तक आधी भी बरसात नहीं हुई है।

किसानों पर पड़ सकती है दोहरी मार

किसानों का कहना है कि इस बार सोयाबीन, मक्का एवं अन्य खरीफ की फसलों की बोवनी के बाद से ही बरसात नहीं होने के कारण से फसल खराब होती है तो किसानों को दुबारा बोवनी की स्थिति से गुजरना पडेगा। जबकि इस बार सोयाबीन का बीज मंहगे दामों पर बिक रहा है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पडेगा। मानसून की खेंच के कारण से किसानों की चिंता बढ़ रही है।

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