संभागायुक्त ने रबी विपणन वर्ष 2021-22 की समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की, साइलो बैग की क्षमता बढ़ाने के दिये निर्देश

DG News India
रिपोर्टर मंगल देव राठौर की न्यूज

उज्जैन 09 मार्च। उज्जैन संभागायुक्त श्री संदीप यादव ने मंगलवार को रबी विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की संभाग के जिलों में हो रही तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने गेहूं के बम्पर उत्पादन की संभावना को देखते हुए गेहूं भण्डारण हेतु साइलो बैग की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिये। साथ ही निर्देश दिये कि संभाग के सभी जिले अपने नजदीक के जिले में भी भण्डारण की संभावना तलाशें। बैठक में सम्बन्धित अधिकारियों ने बताया कि रायसेन, मंडीदीप, पिपरिया, इटारसी, कन्नौद, खातेगांव, मक्सी आदि स्थानों पर उपार्जन को शिफ्ट कर उसका भण्डारण किया जा सकता है। संभागायुक्त ने तत्सम्बन्ध में भण्डारण की समुचित व्यवस्था की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में बारदाने, पेयजल, पंखे, छंटाई-बिनाई, तौलकांटे की व्यवस्था रहे। बताया गया कि इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल, चना एवं मसूर का 5100 रुपये एवं सरसों का 4650 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। किसानों को एसएमएस के द्वारा उपार्जन केन्द्र बुलाया जायेगा। एसएमएस प्राप्ति के सात दिवस के अन्दर किसानों को अपनी उपज उपार्जन केन्द्र में बेचनी होगी। जो किसान निर्धारित तिथि को अपनी उपज नहीं बेच पायेंगे, उन्हें बाद में पुन: एक अवसर दिया जायेगा।

बैठक में अवगत कराया गया कि कृषकों से उपार्जन कार्य सप्ताह में पांच दिवस सोमवार से शुक्रवार तक प्रात: 8 बजे से रात्रि 8 बजे तक किया जायेगा। शेष दो दिन में स्कंद का परिवहन, भण्डारण, लेखा का मिलान, अस्वीकृत गेहूं का अपग्रेडेशन एवं उसकी वापसी का निराकरण किया जायेगा। कृषक तौल पर्ची सायं 6 बजे तक जारी कर दी जायेगी। गोदाम स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण में पाये जाने वाले नान-एफएक्यू गेहूं का भण्डारण उपार्जन समिति द्वारा गोदाम, कैप या साइलो में नहीं किया जायेगा। बताया गया कि यदि किसी केन्द्र पर अधिकांश कृषकों के द्वारा गेहूं विक्रय पूर्ण कर लिया गया है तो संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण द्वारा एक्जिट प्रोटोकाल के अनुरूप उपार्जन कार्य दो सप्ताह बाद स्थगित किया जा सकेगा। राज्य, संभाग, जिला एवं खण्ड स्तर पर उपार्जन प्रबंधन एवं पर्यवेक्षण का दायित्व राज्य स्तरीय, संभाग स्तरीय, जिला स्तरीय एवं उप खण्ड स्तरीय उपार्जन समिति का होगा।
उपार्जन एवं भुगतान की सभी व्यवस्था कम्प्यूटरीकृत होगी। उपार्जन में तकनीकी समस्या के निराकरण हेतु संचालनालय स्तर पर हेल्पडेस्क बनाई जायेगी। बताया गया कि उपार्जन केन्द्र प्राथमिक रूप से गोदाम या कैप परिसर में ही स्थापित रहेंगे, जिससे कृषकों को त्वरित गति से भुगतान हो सके। गोदामों की अनुपलब्धता होने की दशा में ही उपार्जन केन्द्र को गोदाम परिसर से अन्यत्र स्थापित किया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन, निर्बाध विद्युत एवं जनरेटर की सुविधा यथासंभव रखी जायेगी। केन्द्र में कम्प्यूटर, प्रिंटर, डोंगल, स्केनर, लेपटॉप आदि भी रखे जायेंगे। इसके अलावा किसानों को सुविधा देने की दृष्टि से दरियां, पेयजल, शौचालय एवं छाया की व्यवस्था भी रखी जायेगी। संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि उपार्जन केन्द्रों में यथासंभव बड़े इलेक्ट्रॉनिक तौलकांटे रखे जायें। तौलकांटों का संचालन करने के लिये निर्धारित संख्या में तुलावटी एवं हम्माल की सेवाएं भी ली जायें। समिति स्तर से स्कंध के ट्रक में लोडिंग कार्य हेतु मजदूरों की व्यवस्था भी की जायेगी।

चना, मसूर की खरीदी मार्कफेड द्वारा की जायेगी। चना एवं मसूर के किसानों का पंजीयन भी पूर्ण हो चुका है। निर्धारित संख्या में उपार्जन केन्द्र भी स्थापित किये गये हैं। बताया गया कि नीमच एवं मंदसौर में उपार्जन केन्द्र की संख्या बढ़ाई गई है। 15 मार्च से खरीदी प्रारम्भ कर दी जायेगी। इस वर्ष 12 हजार मैट्रिक टन की खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संभागायुक्त ने निर्देश दिये कि गोदाम के पास ही उपार्जन केन्द्र रखें। बताया गया कि वर्तमान में सात हजार बारदाने की गठानें उपलब्ध हैं। संभागायुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अच्छी क्वालिटी का गेहूं, चना, सरसों, मसूर ही खरीदें। उन्होंने रबी की फसलों के उपार्जन की सभी तैयारियां समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिये और कहा कि तैयारियों में यदि कोई कठिनाई या समस्या आती है तो उन्हें इससे अवगत कराया जाये, ताकि वे प्राथमिकता से उन समस्याओं का निराकरण कर सकेंगे।

बैठक में नागरिक आपूर्ति निगम, जिला विपणन विभाग, खाद्य विभाग एवं एफसीआई विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

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