लॉक डाउन के दौरान संसाधनों के अभाव के बीच ग्रामीणों ओर छात्रों के बीच पहुचकर अपने कर्तव्य को बखूबी निभायाआदर्श शिक्षिका ललिता सिसोदिया ने

डीजी न्यूज इंडिया
मंगल देव
राठौर की रिपोर्ट

लॉक डाउन के दौरान संसाधनों के अभाव के बीच ग्रामीणों ओर छात्रों के बीच पहुचकर अपने कर्तव्य को बखूबी निभायाआदर्श शिक्षिका ललिता सिसोदिया ने

विश्व महिला दिवस पर विशेष
मन्दसौर।कोरोनाकॉल में जहां पूरे देश कोरोना जैसी भयानक बीमारी से भय में था,वही लोग घरों से बाहर तक नही निकल रहे थे,वही शैक्षणिक संस्थाएं भी पूरी तरह से बंद थी परन्तु इस भयानक महामारी बीमारी के बावजूदओर साधन नही होते हुए भी अपनी गाड़ी से प्रतिदिन डेली अपडाउन कर अपने कार्य को बखूबी निभाया,ऐसी साहसी ओर जागरूक महिला शिक्षिका पर हम सब को गर्व होना चाहिए, हम बात कर रहे है मन्दसौर जिले के मल्हारगढ तहसील के गरनाई माध्यमिक विद्यालय की आदर्श शिक्षिका ललीता सिसोदिया की जिन्होंनेअपने साहस का परिचय देते हुए ग्रामीणों के बीच पहुचकर ग्रामीणों को जागरूकता ओर बीमारी से बचने के लिए प्रतिदिन पहुचकर जिले का गौरव बड़ाया जो काबिले तारीफ है।
विश्व महिला दिवस पर ऐसी निडर साहसी महिला शिक्षिका को दिल से धन्यवाद देते हुए अन्य लोगो को भी प्रेरणा लेना चाहिए। वही शिक्षिका द्वाराअपने कई नए-नए प्रयोगों से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े रखा और शिक्षा का निरंतर प्रवाह जारी रखा, इस शिक्षण कार्य की ना केवल जिले के कलेक्टर,बल्कि जिला पंचायत सीईओ, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला के अन्य शिक्षा विभाग के आला अधिकारी ने भी शिक्षिका के कार्यो की सराहना की है।
कोरोना कॉल में आदर्श शिक्षिका द्वारा किये गए कार्य जो सेवा की मिसाल बन है।जो इस प्रकार है:-लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करना-इस महामारी से बचने के लिए लोगों से निरंतर संपर्क बनाए रखना तथा उन्हें इस बीमारी से बचने के उपाय बताना समस्त लोगों को सर्वप्रथम कोरोना से बचने के लिए अपने घर में रहने की सलाह दी,वही अपने हाथ को सैनिटाइजर से साफ रखने आपस में दूरी बनाकर तथा किसी के भी संपर्क में नहीं आने की सलाह दी,कोरोना से बचने के लिए शिक्षिका द्वारा घर-घर जाकर लोगों को मास्क वितरण किए गए तथा उन्हें लगा कर ही रखने की सलाह दी गई बिना मास्क के कोई भी नहीं रहे इस हेतु स्वयं के व्यय से मास्क खरीद कर गांव तथा स्कूल के समस्त बच्चों को वितरित किए, मुक तथा बधीर पशुओं को चारा खरीद कर खिलाना तथा हरा चारा भी पशुओं को खिलाया साथ ही फल फ्रूट भी खरीद पशुओं को खिलाया ओर मानवता का परिचय दिया। वही अपने विद्यालय क्षेत्र के गॉव में पालकों को जागरूक करते हुए घर घर जाकर समस्त बच्चों के पेरेंट्स तथा अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें जागरूक करना तथा कोरोना जैसी महामारी से निपटने की सलाह दी एवं घर पर ही बच्चों को पढ़ने की सुझाव दिया वही ऑनलाइन पढ़ाई-मोबाइल के माध्यम से ग्रुप बनाकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाया, तथा घर-घर जाकर बच्चों से संपर्क कर उन्हें अध्यापन कराया ,तथा डीजी लैप योजना का प्रचार कर प्रसार-शासन की योजनाओं को साकार करने हेतु डीजीलैप कार्यक्रम के पर्चे छपवा कर घर-घर वितरित कर गांव के चौपालों एवं दीवारों पर चस्पा की ताकि लोग जागरूक हो सके।वही
राशन वितरण-गरीबों तथा असहाय व्यक्ति जो कोरोना के कारण आर्थिक रूप से बहुत परेशान थे उन्हें शिक्षिका द्वारा राशन वितरण किया गया जिसमें आटा दाल तेल नमक मिर्च मसाला साबुन सैनिटाइजर इत्यादि गरीबों को प्रदान किया गया वहीलॉकडाउन में तैनात कर्मचारियों की सेवा-लाकडॉउन में लगाए गए कर्मचारी जैसे डॉक्टर पुलिस चौकीदार तथा अन्य समाजसेवी लोगो की सेवा करना उन्हें चाय तथा पानी जैसी सुविधा मुहैया करवाई,वही लोगों को कोविड-19 के बचाव संबंधी परछे वितरण करना-लोगों को कोविड-19 कोरोनावायरस महामारी के बचाव की जानकारी को पुष्ट करने के लिए उन्हें याद रखने के लिए पर्चे छपवा कर वितरित किए गए,तथा शिक्षा में सुधार हेतु लैपटॉप खरीदा बच्चों के लिए-बच्चों के गिरते स्तर को ऊंचा उठाने के लिए लैपटॉप खरीद कर डिजीलिप कार्यक्रम के माध्यम से पहुंचाया जा रहे वीडियो दिखाएं तथा अध्यापन करवाया,वही जब सारी सुविधाएं लगभग पूरी तरह से बंद थी उस समय में पक्षियों का भी ध्यान उनके दिमाग में आया और उन्होंने पानी के सकोरे खरीद कर जगह-जगह पर उन्हें लटका कर उनमें पानी भरकर पक्षियों को पिलाने का कार्य किया,कहानियां-बच्चों को गतिविधि का पूरा ध्यान रहे वह भुले नहीं इसलिए उन्हें कहानियों के माध्यम से गतिविधियां करते हए बच्चो को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया,लगातार शाला को सुधारने के प्रयास में स्वयं के व्यय से फर्नीचर खरीद कर शाला को स्मार्ट क्लास बनाया वही सूखा शासन की योजनाओं को बच्चों तक पहुंचाने के लिए उन्हें सूखा राशन गेहूं तथा तेल एवं दाल घर घर वितरित किया,वही-कोरोना जैसी महामारी में प्रभावित हुए बच्चों की पढ़ाई की भरपाई करने के लिए शिक्षिका द्वारा मोहल्ला क्लास से लगाकर उन्हें निरंतर स्तर को सुधारने का प्रयास किया गया।वार्षिक मूल्यांकन में बच्चों का स्तर प्रभावित ना हो वे फेल ना हो कोई बच्चा रुके नहीं इसे हेतु मंदिर तथा मोहल्ले क्लास के माध्यम से शिक्षिका के द्वारा निरंतर प्रयास कर उन्हें तैयार किया गया,स्वयं के शरीर में कमर दर्द जैसी तकलीफ होने के बावजूद भी डॉक्टर द्वारा प्रदान किया गया बेल्ट लगाकर बच्चों का स्तर सुधारने का प्रयास मोहल्ला क्लास के माध्यम से निरंतर गतिविधि करवाते हुए उन्हें तैयार किया,स्वच्छता के प्रति जागरूक-लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षिका के द्वारा सफाई संबंधी पर्चे छपवा कर वितरित किए गए तथा सफाई से होने वाले फायदे के बारे में बताया गया वहीदिव्यांग बच्चे की भी पढ़ाई प्रभावितनहीं हो इसके लिए स्पेशल में दिव्यांग बच्चे के घर जाकर उसे निरंतर अध्यापन करवाया गया।वही गर्भवती महिलाओं के लिए भी शिक्षिका के द्वारा पौष्टिक आहार का वितरण भी किया गया वही
लगातार हो रहे लॉकडाउन में जब हर तरफ से समस्त साधनों पर रोक लगी थी बहनों के चक्के थके हुए थे ऐसी स्थिति में 70 से 80 किलोमीटर प्रतिदिन अप डाउन किया गया तथा बच्चों के स्तर को बनाए रखा ताकि छात्र पढ़ाई में कमजोर नही रह सके। ऐसी त्याग और बलिदान की आदर्श शिक्षिका ने जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह जिले ही पूरे प्रदेश के लिए काबिले तारीफ है।

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