ज्योतिरादित्य मंदसौर से लड़ सकते लोकसभा चुनाव, ये बड़ा संकेत 5 पूर्व कांग्रेसियों की प्रदेश भाजपा में इंट्री से मिला, 1991, 99 और 2004 में समर्थकों को मंदसौर से दिला चुके हैं लोकसभा टिकट, मंदसौर आने की बड़ी वजह गुना सीट पर शिकस्त होना भी, मुश्किलों में फंसी कांग्रेस की बढ़ सकती है परेशानी

डीजी न्यूज इंडिया
मंगल देव राठौर की खास रिपोर्ट
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मंदसौर की सियासत को लेकर एक बड़ी खबर है। कांग्रेस के पूर्व नेता और भाजपा से राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया अगला लोकसभा चुनाव मंदसौर आकर लड़ सकते हैं। इसका बड़ा संकेत ये भी है कि हाल ही में सिंधिया ने प्रदेश भाजपा कार्यसमिति में अपने पुराने 5 साथियों की इंट्री कराई है। सभी वजनदार नेता हैं जो कुल मिलाकर मंदसौर लोकसभा की 8 में 5 विधानसभा कवर करते हैं। मंदसौर आने की प्रमुख वजह भी सामने आई है कि सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट गुना 2019 के चुनाव में हार के साथ ज्योतिरादित्य के हाथ से निकल चुकी। अब वे नए ठिकाने के रूप में अपनी पूर्व रिसायत के मंदसौर में अवसर तलाश रहे हैं, उनका परिवार साल 1991 में इसी सीट से महेंद्रसिंह कालूखेड़ा, 1999 में राजेंद्रसिंह गौतम, 2004 में पुन: गौतम को यहां से लोकसभा टिकट (कांग्रेस से) दिला चुका है। चूंकी मंदसौर सीट को जनसंघ से लेकर भाजपा तक अपना गढ़ मानते आए हैं और सिंधिया परिवार के जुड़ाव को देखते हुए इसे सेफ (सुरक्षित) सीट समझा जा रहा है। मीडिया हाउस लाइव के भाजपा के दिल्ली व भोपाल के सूत्रों के मुताबिक यदि सिंधिया 2024 चुनाव के लिए भाजपा की भी पहली पसंद होते हैं तो कोई अड़चन नहीं आएगी, ऐसे में वर्तमान सांसद सुधीर गुप्ता को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या संगठन विधानसभा चुनाव में उनकी सेवा ले सकता है।

भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में सिंधिया के कहने पर ही मंदसौर लोकसभा क्षेत्र की मंदसौर विस सीट से राजेंद्रसिंह गौतम को विशेष आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया गया। वहीं मुकेश काला कार्यसमिति सदस्य मनोनीत हुए। जावरा से भी सिंधिया परिवार के विश्वासपात्र केकेसिंह कालूखेड़ा, जावद से समंदर पटेल और मनासा से विजेंद्रसिंह मालाहेड़ा भी कार्यसमिति में आए। जबकि सिंधिया की पूर्व रिसायत में आने वाले निंबोद से यशपालसिंह सिसौदिया वर्तमान में मंदसौर विधायक हैं और परिवार से पुराने रिश्ते कायम हैं।

-गुना का मलाल मंदसौर से दूर करेंगे सिंधिया

2019 के चुनाव में गुना सीट से सिंधिया कांग्रेस से मैदान में थे और एक दौर में अपने ही विश्वासपात्र रहे कृष्णपालसिंह उर्फ केपी यादव से 1 लाख 25 हजार 549 मतों से लोकसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद कांग्रेस छोड़ी और भाजपा में इंट्री हुई। चूंकी सिंधिया परिवार में पहली बार कोई चुनाव हारा और भाजपा यहां बदलाव कर शायद ही जनभावना से जुड़ा जोखिम ले, भाजपा वहां अपनी साख से नहीं खेलना चाहेगी। ऐसे में मंदसौर सीट को लेकर शीर्ष नेतृत्व में शायद ही किसी को ऐतराज नहीं होगा। वर्तमान सांसद गुप्ता को चुनाव से पहले ही विधानसभा या संगठन, सत्ता में अन्य अहम पद पर सेवा ली जा सकती है। दिल्ली व भोपाल के सूत्रों के मुताबिक ऐसे में ये भी संभावना बढ़ी है कि नए समीकरण साधने को 2023 के विधानसभा चुनाव में मंदसौर संसदीय क्षेत्र की 8 सीटों में से 2 से 4 सीटों पर भाजपा से नए प्रत्याशी सामने हों।

-अब सवाल कांग्रेस का : मुश्किलों में फंसी कांग्रेस की बढ़ सकती है परेशानी

मंदसौर सीट पर 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन 3 लाख 3 हजार 649 मतों से चुनाव हारी थी। 2019 में हार की लीड बढ़कर 3 लाख 76 हजार तक जा पहुंची। सामने भाजपा से सुधीर गुप्ता थे। अब यदि मंदसौर में सिंधिया की इंट्री होती है तो कांग्रेस से कोई भी प्रत्याशी आए, मुश्किलें बढ़ना तय है क्योंकि मंदसौर से सिंधिया परिवार के पुराने जुड़ाव के अलावा लोकप्रियता होना बड़ा कारण है।

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