जेलर संतोष कुमार लड़िया के कारनामे पूरी जेल विभाग को बदनाम कर दिया, एक पापी पूरी नाव को डूबा देता, और एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती।

मन्दसौर से ब्यूरो चीफ
मंगल देव राठौर की खास रिपोर्ट
मो.+918305357955

जेल में बैठे बैठे करोड़ों का खेल, खेल लिया जेलर संतोष कुमार लड़िया ने।


अकाउंट हेंकर से करा लिया लोगों का मोबाइल और अकाउंट हैंक।


आज पूरे जैल विभाग को कलंकित करने वाला जेलर संतोष कुमार लड़िया भोपाल में अटैच।


सभी अधिकारी अपने घर लॉक अप करवाने के बाद लंच के लिए जाते थे और जेलर संतोष कुमार का लंच जेल में फैक्ट्री शाखा मैं कैदी अमर आनंद अग्रवाल के साथ होता था ओर साइबर क्राइम को अंजाम देता था।


भोपाल डीआईजी संजय पांडे जेल की व्यवस्था को देखते हुए उज्जैन पहुंच कर जायजा लिया और केदियो से पूछताछ की पूछताछ के दौरान कैदियों ने बताया जेल के अंदर जेलर संतोष कुमार लड़िया बंदी अमर आनंद अग्रवाल को घंटो लेकर बैठता था और इंटरनेट का उपयोग करता था।


एसआईटी जांच कर रही बयान के दौरान जेलर संतोष कुमार लड़िया से पूछा लैपटॉप कहां है, जेलर ने कहा लैपटॉप में कुछ नहीं है, बाद में लैपटॉप ला कर दिया तो नया वाला लैपटॉप एसआईटी को उपलब्ध कराया, तुरंत एसआईटी जांच अधिकारियों ने अपने खुले शब्दों में बोला पुराने घर पर दो लैपटॉप रखें उनको लेकर आओ, हमारे सूत्रधर बताते हैं एसआईटी जांच अधिकारी के सामने रोने लगा और बोलने लगा मुझसे गलती हो गई क्षमा कर दो मैंने इंटरनेट का उपयोग बंदी से करवाया लेकिन जीवन में कभी ऐसी गलती नहीं होगी।


जेलर संतोष कुमार लड़िया के कारनामे को देखते हुए कई जेल कर्मचारी शंका के घेरे में।


एसआईटी ने पूछा जब तुम्हारी शिकायत हुई थी, शिकायत के चलते भोपाल अटैच हुए, जांच पूर्ण नहीं होने के बाद भी आप का स्थानांतरण भोपाल से उज्जैन कैसे हुआ।


एसआईटी के कई प्रश्न का जवाब देने में जेलर संतोष कुमार लड़िया विफल रहा।


पूर्व में जो शिकायत हुई, उसके बाद शिकायत के चलते ही भोपाल से उज्जैन स्थानांतरण कराने वाला जेलर संतोष कुमार लड़िया ने लोगों से बोला, मैं गृह मंत्री के पीए पांडे के माध्यम से उज्जैन पहुंचा हूं जिसमें मेरे 4000000 रुपए खर्चा हुआ है, इस खबर की पुष्टि हम नहीं करते हमारे सूत्रधर से खबर प्रकाशित की जा रही है।


भोपाल जेल में बंद बंदी शिकायतकर्ता अमर आनंद अग्रवाल से एसआईटी लगातार पूछताछ कर रही है और कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रही हैं जिससे साबित हो रहा है जेल में बंदी से अपराध जेलर द्वारा कराया गया है।


जेलर संतोष कुमार लड़िया को एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारी पूछताछ के दौरान खुले शब्दों में बोला सही-सही बता दो वरना एसआईटी को दूसरा फार्मूला उपयोग करने के लिए मजबूर ना करें, आपने अपराध किया, यह तो सिद्ध हो गया, क्योंकि बंदी को इंटरनेट सुविधा जेल के अंदर किस कारण दी गई।

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