अब भोजन नहीं, भविष्य के अन्नकूटो पर विचार करें

डीजी न्यूज़ इंडिया
मंदसौर से ब्यूरो चीफ मंगल देव राठौर की खास रिपोर्ट
मो.+918305357955

हम सभी बेहतर समाज के लिए कार्य कर रहे है। हमारे पूर्वजों ने उस समय की आवश्यकताओ को समझ कर, अन्नकूट जैसे सामाजिक धर्मिक उत्सव की शुरुवात की है। उस समय गरीबी के चलते मिठाई मिष्ठान व सेहत मंद भोजन आम व्यक्ति की पहुच से दूर था। बहु संख्य में गरीब थे। अच्छा भोजन नसीब नहीं था । मुझे अच्छे से याद है 40 -45 साल पहले हमारे घर मे भी पोहे की चूरी व आंगनवाड़ी की ब्रेड एक टाइम का भोजन था। दूध हमारे नानाजी के यहां से आता था। क्योकि पिता जी को मिल से 80 या 90 रु तनख्वाह मिलती थी। छः भाई बहिन की परवरिश के चलते अच्छा भोजन दुर्बल वस्तुएं रही है। मेरी इस बात से, हम उम्र सहमत होंगे। उन्हें स्मरण होगा। क्योकि यह स्थिति हमारी ही नही, जहाँ हम रहते थे कमोबेस सभी के यही हालत थे। नब्बे के बाद सामाजिक बदलाव तेज गति से आए है। उन हालातो में हमारे पूर्वजों ने बड़ी मेहनत से बड़ी कठिनाई से समाज की उन्नति हेतु अन्नकूट जैसे उत्सवों की शुरुवात की है। आर्थिक विपन्नता के दौर में सामाजिक या लोककल्याण के आयोजन करना आसमान से तारे तोड़ने जैसा ही कार्य रहा होगा… लेकिन वे सतत प्रयत्नशील रहे है। जिसका परिणाम ही हम सब की उन्नति में दर्शित है।

समय बदल गया है पर हमारी परम्पराओ में बदलाव नही आया है। हम लगभग उसी लकीर पर आज भी चल रहे है। समय अनुरूप उस लकीर को बेहतर सृजन से आगे बढ़ाने के चिंतन की जरूरत है। नए स्वरूप में गढ़ने की जरूरत है।

परम्पराओ में सामाजिक आवश्यकताओं व लक्ष्य को भापकर सकारत्मक सुधार करें। वर्ना भगवान बुद्ध पूरे जीवन मूर्ति पूजा का विरोध करते रहे, उनके बाद उनकी ही मूर्ति बनाकर पूजना प्रारम्भ हो गया है, मतलब विचार छूट गया, बस, दर्शन रह गया। यही कमोबेश हमारे हिन्दू धर्म के उन्नति में बाधक है। हम बाते करते है पर उतारते नही है।

ईमानदारी की बाते करते है पर होते नही है। समाज जोड़ने की बाते करते है, जुड़ने देना नही चाहते है। प्रेम की बाते करते है और वैमनस्यता से भरे होते है। इसलिए उतने प्रभावी या मान प्राप्त नही कर पा रहे है जिसके लिए अधीर होकर हम, यह सब कर रहे है। लकीरे पीटने से नही, सृजन से होगा उन्नति का शिखर व जन मन मे मान।

आओ, भविष्य के अन्नकूट पर चिंतन करें, श्रेष्ठ परम्परा को सामाजिक उन्नति का सशक्त माध्यम बनाए, बेहतर सृजन के आयामो को जोड़े, भविष्य के लक्ष्य के लेकर, श्रेष्ठ दर्शन के साथ हर वर्ग के लिए प्रतिभा दर्शन व जुड़ने का अवसर बने। यह भविष्य का अन्नकूट हो सकता है।

आर.एन.राठौर
सामाजिक उत्प्रेरक
आओ, बेहतर सृजन करें
उभरता राठौर समाज मिशन

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