मैनिट के पीएचडी शोधार्थियों ने सांसद के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म की

भोपाल। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान(मैनिट) में पीएचडी शोधार्थियों ने विगत दस दिनों से जारी हड़ताल काे सांसद के आश्वासन के बाद खत्म किया। भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर शुक्रवार शाम को पीएचडी शोधार्थियों से मिलने पहुंची। सांसद ने शोधार्थियों से मिलकर उन्हें आश्वासन दिया कि आपकी मांगें मानी जाएगी। उन्होंने मैनिट के डीन एकेडमिक अरविंद मित्तल अौर रजिस्ट्रार विनोद डोले से मुलाकात की। मैनिट प्रशासन ने भी सांसद को भरोसा दिलाया कि शोधार्थियों की कुछ मांगें मानी जाएगी। उन्हें थोड़ा समय चाहिए। इसके बाद सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने शोधार्थियों से मिलकर उनका हड़ताल खत्म कराया।

उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण शोधार्थियों के सामने यह समस्या आई है। इसका मैनिट प्रशासन से समाधान करवाया। इसके बाद शोधार्थियों को आश्वासन मिला कि उन्हें शोध के लिए एक साल छूट दिया जाएगा। साथ ही एरियर, गृह भत्ता सहित अन्य मांगों को पूरा करने पर विचार किया जाएगा। दरअसल, मैनिट के पीएचडी शोधार्थी 10 जनवरी से अपनी मांगों को लेकर दिन-रात 24 घंटे शांतिपूर्वक क्रमिक विरोध जता रहे थे। शोधार्थी गुरुवार से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्वक अहिंसात्मक आंदोलन के लिए मैनिट के मुख्य प्रशासनिक भवन के सामने बैठ गए थे।

शोधार्थियों की मांग थी कि जुलाई 2019 से पीएचडी शोधार्थी को दी जाने वाली गृह भत्ता की राशि को एक माह अक्टूबर के बाद नहीं दिया गया। उसके बाद फिर से भत्ता की राशि रोक दी गई है। शोधार्थी मांग कर रहे हैं कि जब उनका प्रवेश मैनिट में हुआ। जुलाई 2019 से ही उन्हें गृह भत्ता की राशि का एरियर दिया जाए। कोरोना काल के कारण विगत डेढ़ वर्ष तक पीएचडी शोधार्थी मैनिट कैंपस में नहीं आए थे, जिससे उनका रिसर्च कार्य सही ढंग से नहीं हो पाया है, लेकिन मैनिट प्रशासन ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी कर पीएचडी शोधार्थी जिन्हें तीन वर्ष पूर्ण हो गए हैं उनकी स्टायफंड रोक दी है। सर्कुलर में उल्लेख किया गया है कि जो पीएचडी शोधार्थी तीन वर्ष पूर्ण होने पर रिसर्च पब्लिकेशन सबमिट नहीं करेगा। उसकी स्टायफंड बंद कर दी जाएगी। वही एससी/एसटी के पीएचडी शोधार्थी पर नियम विरुद्ध ट्यूशन फीस भरवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनके रजिस्ट्रेशन फार्म जमा करने से मैनिट प्रशासन द्वारा मना किया जा रहा है। शोधार्थियों का कहना है कि जर्नल्स में पेपर पब्लिकेशन के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है, क्योंकि डेढ़ साल तक कैंपस बंद रहा है तो कम से कम यह डेढ़ साल की अवधि हमें मिलना चाहिए, जिससे शोध कार्य पूरा कर सकें।

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