पत्रकारों और मीडिया घरानों पर छापे की कार्यवाही

देश दो प्रमुख मीडिया समूहों – ‘दैनिक भास्कर’ और हिंदी समाचार चैनल ‘भारत समाचार’ के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर सुबह से बड़े छापों से कुछ और बना-बिगड़ा न हो, सोशल मीडिया पर एक सवाल जरुर खड़ा हो गया है।  इस सवाल में दो पक्ष उभर कर आये हैं| एक पक्ष इसे स्वच्छ और निर्भीक पत्रकारिता पर हमला बता रहा है , तो दूसरा मीडिया के आवरण में अन्य उद्योगों की स्थापना और उनकी सुरक्षा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दैनिक भास्कर के मामले में छापेमारी भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गई है। उत्तरप्रदेश में टीवी समाचार चैनल भारत समाचार समूह पर इसी तरह से छापेमारी की गई। भास्कर समूह के खिलाफ की गई कार्रवाई में समूह के प्रवर्तकों के राजधानी भोपाल में स्थित आवासीय स्थानों पर भी छापे मारे जाना शामिल है।

एक पक्ष कह रहा है की यह सब दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्टों की एक सीरीज़ का परिणाम है जिसमें महामारी के दौरान आधिकारिक दावों की आलोचनात्मक दृष्टिकोण था,  विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, जहां शवों को गंगा के तट पर और नदी में तैरते हुए भी देखा गया था।
दूसरा पक्ष तेल, नमक,  खदान से लेकर शापिंग मालों को पत्रकारिता के आवरण में छिपाने और चलाने से लेकर हाल ही में विदेश से आये धन की बात कहता है।  सच क्या है?
सरकार जानती है, और लोकतंत्र का तकाजा है सरकार को फौरन स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।

सरकारों को इस बात का भी स्वत: स्पष्टीकरण देना चाहिए कि इन मीडिया संस्थानों में वे कानून कितने लागू  है?  जो सरकार ने पत्रकारों और गैर पत्रकारों के हक में बनाये हैं।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सैनिकों और राज्य पुलिस के कर्मियों को भोपाल की आयकर टीमों को सुरक्षा इस बात का प्रमाण है कि केंद्र के साथ राज्य सरकार को भी सब मालूम है। कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर सबसे पहले कहा कि भोपाल में आयकर विभाग के अधिकारी समूह के करीब छह परिसरों पर “मौजूद हैं”। इनमें राज्य की राजधानी भोपाल में प्रेस कॉम्प्लेक्स में स्थित समूह का कार्यालय भी शामिल है।
दिग्‍वजिय सिंह ने ट्वीट किया, “पत्रकारिता पर मोदी शाह का प्रहार!!  आज विपक्ष में बैठे इन नेताओं से सवाल है कि “दिल पर हाथ रखकर ईमानदारी से कहे कि “ सत्ता के सिंहासन” पर मचकते हुए उन्होंने मीडिया मालिकों को पत्रकारिता के नाम पर बड़े – बड़े लाभ कभी नहीं दिए?” सारे लाभ पत्रकारिता के नाम पर लेने देने के सिलसिले के प्रवर्तक कौन है?

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्विटर पर कहा कि ”सच को देश भर में निर्भिकता से उजागर कर रहे दैनिक भास्कर मीडिया समूह को दबाने का काम शुरू हो गया है ? अपने विरोधियों को दबाने के लिये , सच को सामने आने से रोकने के लिये ईडी , आईटी व अन्य एजेंसियो का दुरुपयोग यह सरकार शुरू से ही करती रही है और यह काम आज भी जारी है ?

दैनिक भास्कर अखबार और भारत समाचार न्यूज़ चैनल के कार्यालयों पर इनकम टैक्स का छापा मीडिया को दबाने का एक प्रयास है। मोदी सरकार अपनी रत्तीभर आलोचना भी बर्दाश्त नहीं कर सकती है। यह भाजपा की फासीवादी मानसिकता है जो लोकतंत्र में सच्चाई का आइना देखना भी पसंद नहीं करती है।

देश के सोशल मीडिया पर इस बवाल पर उठते सवाल मीडिया मुगलों, सरकार  और हाशिये पर धकेले जा रहे पत्रकारों से भी है , वे ये निर्धारित नहीं क्रर सकते तो कम से कम यह तो बता सकते है कि मीडिया की आज़ादी की सीमा क्या है।

एक बडा प्रश्‍न ट्रेंड हो रहा है,
क्‍या? पत्रकारों और मीडिया घरानों पर छापे की कार्यवाही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को डराने का प्रयास है.

अनिल मालवीय, अध्यक्ष, समाजसेवी अधिमान्य पत्रकार महासंघ

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