आवास एवं शहरी मामलों से संबद्ध संसदीय सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से संबद्ध संसदीय सलाहकार समिति की आज नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आवास एवं शहरी कार्य और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने की। इस बैठक में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री कौशल किशोर ने भी प्रतिभाग किया। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसदों ने भी हिस्सा लिया। इस बैठक का विषय ‘सभी के लिए आवास’ था।

बैठक के दौरान बताया गया कि भारत का तेजी से शहरीकरण हो रहा है। वर्ष 2011 में लगभग 37 करोड़ लोग शहरों में रहते थे और 2050 तक यह आंकड़ा 88 करोड़ से अधिक होने की संभावना है। रियल एस्टेट बाजार लगभग 120 अरब डॉलर का है और जीडीपी में 7% का योगदान दे रहा है। यह 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के संबंध में बताया गया कि यह एक परिवर्तनकारी कानून है, जिसे 2016 में प्रभाव में लाया गया था। यह रियल एस्टेट के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत कर रहा है। यह अधिनियम रियल एस्टेट क्षेत्र को नियमित करने और बढ़ावा देने के लिए है। यह पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने का प्रयास करता है। यह विवादों पर त्वरित निर्णय के जरिये उचित लेनदेन, समय पर सुपुर्दगी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करता है। 35 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने इन नियमों को अधिसूचित किया है और 30 राज्यों अथवा केंद्र शासित प्रदेशों ने नियामक प्राधिकरणों का गठन किया है। इस अधिनियम के तहत 67,844 परियोजनाएं पंजीकृत हैं और अब तक 70,000 से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है।

मॉडल टेनेसी (किराएदारी) अधिनियम के संबंध में बताया गया कि किराएदारी कानून राज्य का विषय है। मॉडल किरायेदारी अधिनियम राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से एमओएचयूए द्वारा तैयार किया गया है और इसे अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से उन्हें भेजा गया है। इसमें किराएदारों और मकान मालिकों के हितों तथा अधिकारों को जवाबदेह एवं पारदर्शी तरीके से संतुलित करने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य व्यवसायिक और टिकाऊ किराए के आवास का बाजार तैयार करना और किराए के उद्देश्य से खाली घरों को उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के संबंध में बताया गया कि इसमें वर्ष 2022 तक पात्र शहरी परिवारों को सभी मौसम के अनुकूल आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत सभी वैधानिक कस्बों और अधिसूचित योजना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह घर महिलाओं या संयुक्त स्वामित्व के नाम पर ही होना चाहिए। साथ ही इसमें स्वामित्व की पहली धारक महिला ही होगी। पीएमएवाई-यू के तहत घरों की अनुमानित मांग 1.12 करोड़ है। इसके सापेक्ष 1.13 करोड़ मकान स्वीकृत किए गए हैं, उनमें से 85 लाख का निर्माण किया जा रहा है। 50 लाख से अधिक पूर्ण अथवा वितरित कर दिए गए हैं।

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना या ऋण संबद्ध सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसके तहत, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी द्वारा घर की खरीद, निर्माण या वृद्धि को लिए जाने वाले गृह ऋण के ब्याज में छूट प्रदान की जाती है। 16.35 लाख सीएलएसएस लाभार्थियों में से 6 लाख से अधिक मध्यम आय वर्ग के हैं। पीएमयूवाई (यू) के तहत स्वीकृत सभी घरों के लिए प्रतिबद्ध केंद्रीय सहायता 1.82 लाख करोड़ रुपये है। इसमें से 1.06 लाख करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

शहरी प्रवासियों/गरीबों के जीवन को आसान बनाने के लिए किराये के किफायती आवास परिसरों की परिकल्पना की गई है। इन परियोजनाओं पर मार्च, 2022 तक विचार किया जाना है। यह सभी वैधानिक कस्बों, अधिसूचित योजना क्षेत्रों और विशेष क्षेत्र/विकास प्राधिकरणों/औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए है। सार्वजनिक/निजी क्षेत्र की संस्थाओं ने 1.02 लाख से अधिक घरों/छात्रावास बिस्तरों के लिए किराये के आवास देने की मंजूरी दी है।

यह भी बताया गया कि किफायती आवास के बुनियादी ढांचे की स्थिति के परिणामस्वरूप निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए उधार लेने की लागत कम हुई है। आवासीय/व्यावसायिक परिसरों, सड़कों, शिक्षा संस्थानों आदि के आवास निर्माण की परियोजनाओं में स्वत: मार्ग के तहत 100% एफडीआई की अनुमति दी गई है।

माननीय संसद सदस्यों ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में विभिन्न पहलों और योजनाओं के संबंध में कई सुझाव दिए। श्री पुरी ने सभी सदस्यों को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया।

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