कंगाली से जूझ रही “नाथ” सरकार नेताओं को खुश करने बनाएगी “विधान परिषद”

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने अपनी ही सरकार के भीतर मचल रहे तूफान को शांत करने अब नेताओं की ताजपोशी के लिए विधान परिषद के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। हजारों करोड़ के राजकोषीय घाटे में डूबी सरकार कर्ज़ के रहमो कर्म पर रेंग रही है। निर्माण कार्यों से लेकर प्रदेश के विकास कार्यों के लिए बजट का अभाव है,कर्मचारियों को वेतन विसंगतियों से निपटना पड़ रहा है। प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था ठीक नही है,फिर भी सरकार को 5 साल घसीटने के लिए नेताओं को खुश करने की सतरंजी बिसात बिछ चुकी है।
यह होगा खर्च :
विधान परिषद में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, के वेतन,भत्तों सहित सम्पूर्ण सुख सुविधाओं पर प्रति वर्ष करीब 1 करोड़ खर्च होगा। जबकि विधायकों के वेतन भत्ते एवं अन्य सुविधाओं सहित साढे चार करोड़ सालाना अनुमानित खर्च होगा। इसी प्रकार डेढ़ सौ अधिकारी कर्मचारियों की नियुक्ति ,सचिवालय,स्टाफ आदि पर भी करीब 10 करोड़ के खर्च का अनुमान है।
ताजपोशी : राज्य सरकार को परिषद गठन के उपरांत 70 नेताओं की ताजपोशी करने का अवसर मिल जाएगा।
यह भी होगा: राज्य सरकार अपने कुनबे को बढ़ाने में सफल हो जाएगी। करी 10 से 12 मंत्री मंत्रियों को मंत्रिमंडल में बढ़ाने की जुगाड़ हो जाएगी।
जनता को क्या ….? अब सवाल उठता है कि विधान परिषद के गठन से प्रदेश की जनता को क्या मिलेगा? क्या प्रदेश में विकास की गंगा,रोजगार,लाभ की खेती हो जाएगी …? नही…नही । बस सिर्फ पार्टी के नेताओं की गरीबी उन्मूलन हो जाएगा। पार्टी के भीतर नेताओं का असन्तोष दूर हो जाएगा। सरकार फिर आराम से पांच साल चल सकेगी।

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