गणतंत्र दिवस पर भी अखबार वालों को किया निराश


भोपाल। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर भी अखबार वालों के हाथ निराशा ही लगी। आज तक ऐसा कोई राष्ट्रीय पर्व नहीं हुआ होगा जब प्रदेश सरकार ने अखबारों को सरकारी विज्ञापन न दिया हो। पहले लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पत्रिकाओ के विज्ञापन पर कैंची चलाई गई इसके बाद अन्य डीएवीपी तथा मध्यप्रदेश की विज्ञापन सूची मे शामिल अखबारों को भी गणतंत्र दिवस के विज्ञापनों से पृथक कर दिया गया है।

आखिर सरकार अखबार वालों के पीछे हाथ धोकर क्यो पडी है,यह समझ से परे है। हर भारतवासी के लिए गणतंत्र दिवस एक महान राष्ट्रीय पर्व होता है। इस राष्ट्रीय पर्व पर हर प्रदेश अपने राज्य के समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी करते है । यह परंपरा अन्य प्रदेशों की तरह हमारे मध्यप्रदेश में निरंतर चली आ रही थी। चाहे सरकार किसी भी दल की रही हो पर कभी समाचार पत्र पत्रिकाओ के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया गया जो आज देखने को मिल रहा। सरकार मनमाने तरीके अपनाते हुए प्रदेश के समाचार पत्रों को आये दिन किसी न किसी प्रकार से उन पर दबाव बनाया जा रहा है।

अखबार वालों के साथ सरकार के नुमाइंदे इस तरह पेश आ रहे है जैसे हम लोग पत्रकार नहीं कोई माफिया हो। इस सरकार मे अखबार वालों की कोई बात ही नहीं सुनी जा रही है। पिछले लगभग पन्द्रह दिनों से साप्ताहिक तथा मासिक पत्र पत्रिकाओं को गणतंत्र दिवस पर विज्ञापन देने की मांग विभिन्न संगठनों द्वारा की जा रही थीं। एक हफ्ते से रोजाना हमारे पत्रकार साथी कभी जनसम्पर्क मन्त्री तो कभी काग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और जनसम्पर्क सॅचालनालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर विज्ञापन की गुहार लगाते रहे। पर इन पत्रकारों की आवाज़ को किसी ने भी गम्भीरता से नहीं लिया। सभी ने आश्वासन का लॉलीपॉप थमा दिया और दैनिक अखबारों को भी गणतंत्र दिवस का विज्ञापन नहीं दिया गया। अब प्रदेश में अखबारों का भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। आगे और क्या क्या देखने को मिलेगा,यह तो समय बताएगा।

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