भारी भ्रष्टाचार को छुपाना चाहता है सहकारिता विभाग


सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी ना देने के लिए बेवजह ही नया कानून बना डाला सहकारिता विभाग ने

DG NEWS NARSINGHGARH

डीजी न्यूज़ नरसिंहगढ़ से अंकिता जोशी की रिपोर्ट

नरसिंहगढ़ । विचारणीय तथ्य यह है कि मत्स्य समितियों की ऑडिट रिपोर्ट जब सहकारिता विभाग से मांगी गई तो सहकारिता विभाग ने एक लेटर थमा दिया जिसमे लिखा था आपके द्वारा प्रस्तुत आवेदन सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत नहीं किया गया है अब चाहे तथ्य है कि ऑडिट सहकारिता विभाग से होता है। तो सहकारिता विभाग का अधिकारी ही ऑडिट की प्रतिलिपि देने के लिए बाध्य होगा । बात सिर्फ यह है कि भ्रष्टाचार छुपाने के लिए न जाने कहां-कहां से नए नियम सहकारिता विभाग द्वारा लागू कर दिए जाते हैं जबकि सहकारिता विभाग में कई फर्जीवाड़े हो रहे हैं जिसकी भनक किसी को नहीं लग पाती कारण है कि उनके गड़े हुए नियम लोगों के ऊपर चिपका देते हैं। आपको बता दें कि सहकारिता विभाग से ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई थी जबकि सूत्रों से यह पता लगा है कि सहकारी समितियां ऑडिट कराती ही नहीं है अधिकारी मनमर्जी से पिछला रिकॉर्ड उठाकर कॉपी पेस्ट कर देते हैं और उसी के आधार पर मत्स्य विभाग से अनुदान की राशि समितियों को मिल जाती है सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा मत्स्य समितियों को लेकर सामने आया है जिसमें हर जगह भ्रष्टाचार उजागर हो रहे हैं फर्जी समितियां फर्जी ऑडिट रिपोर्ट और अनुदान राशि। सहकारिता विभाग अपने आप में नया कानून बनाते जा रहे हैं यह समस्या सिर्फ जिलेभर की नहीं है पूरे मध्यप्रदेश की है लेकिन जिला कलेक्टर को इस पर संज्ञान लेने की आवश्यकता है। बेशक लड़ाई अभी जारी रहेगी लेकिन सहकारिता विभाग का फर्जीवाड़ा सामने आना बेहद जरूरी है।

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