Neeraj Chopra: आसान नहीं रही है ‘गोल्ड’ की राह, वर्षों की कड़ी मेहनत और लगन से मिली है ये कामयाबी

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संवाददाता सुरेश मालवीय 8871288482

कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिभा इन तीनो का संगम हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। नीरज की कहानी इसकी गवाही देती है।

टोक्यो । ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने गोल्ड मेडल जीतकर एक ऐसा इतिहास रचा है, जो पिछे कई वर्षों से देश के सैकड़ों खिलाड़ियों का सपना रहा है। जैवलिन थ्रो के फाइनल में नीरज ने 87.58 की सर्वश्रेष्ठ दूरी तय करते हुए गोल्ड पर कब्जा किया। वो क्वालिफिकेशन राउंड से लेकर फाइनल मुकाबले के तीनों राउंड में लगातार टॉप पर रहे। लेकिन टॉप पर पहुंचने का ये सफर किसी भी तरह आसान नहीं रहा है।उनके संघर्ष की कहानी कहता है उनका ये 4 साल पुराना ट्वीट, जब उन्होंने ओलंपिक में पदक जीतने का सपना देखना शुरु कर दिया था। उसके बाद से नीरज चोपड़ा लगातार हफ्ते में छह दिन, छह घंटे की कड़ी ट्रेनिंग करते रहे हैं। लगातार चार सालों तक एक ही लक्ष्य पर नजर रखना और उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करना, किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन नीरज ने ये कर दिखाया और उन्हें इसका इनाम भी मिला। हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गांव में 24 दिसंबर 1997 को नीरज का जन्म हुआ था। उनके पिता सतीश कुमार किसान हैं। खेतीबाड़ी से घर का खर्च चलता है। इन्हें पढ़ाई के साथ पिता और चाचा के साथ खेत पर जाकर काम करना पसंद था। लेकिन किस्मत ने इनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। बचपन में नीरज काफी मोटे हुआ करते थे। ऐसे में 11 साल की उम्र में घरवालों ने मोटापे को कम करने के लिए उन्हें किसी खेल में शामिल होने की सलाह दी। नीरज पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में खेलने के लिए जाने लगे। वहीं उन्होंने स्टेडियम में जेवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करते हुए खिलाड़ियों को देखा, और उन्हें ये खेल भा गया। इसके बाद से नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में आगे बढ़ने लगे।

शुरु हुआ उपलब्धियों का दौर

नीरज चोपड़ा की प्रतिभा का नमूना 2012 में लखनऊ में आयोजित नेशनल जूनियर चैंपियनशिप में दिखा।उस टूर्नामेंट में चोपड़ा ने अंडर-16 स्पर्धा में 68.46 मीटर भाला फेंककर रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। 2013 नेशनल यूथ चैंपियनशिप में नीरज ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने दूसरा स्थान हासिल करते हुए उस वर्ष यूक्रेन में होने वाली IAAF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में जगह पक्की की। साल 2015 में नीरत ने ऑल इंडिया इंटर- यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में 81.04 मीटर दूर भाला फेंककर इस एज ग्रुप का नया रिकॉर्ड बनाया।
नीरज ने 2016 में पोलैंड में हुए IAAF वर्ल्ड U-20 चैम्पियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता। 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों में भी नीरज ने 86.47 मीटर भाला फेंका और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा एशियन गेम्स 2018 में नीरज ने अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए 88.06 मीटर भाला फेंका और जेवलिन थ्रो में भारत को पहला गोल्ड दिलाया। 2020 टोक्यो ओलंपिक में भी नीरज, जैवलिन थ्रो के क्वालिफिकेशन राउंड में भी पहले नंबर पर रहे थे। फाइनल मुकाबले में फिर टॉप पोजिशन हासिल करते हुए ओलंपिक दोल्ड हासिल किया। 2017 से ही नीरज की निगाहें ओलंपिक पर टिकी थीं, और उन्होंने अपनी प्रतिभा और क्षमता को बढ़ाने की कड़ी मेहनत की। उसी का नतीजा है कि आज वो जेवलिन थ्रो में दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी बन गये हैं और उनका परिवार ही नहीं, सारा देश उनकी उपलब्धियों पर गर्व कर रहा है।

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