प्रदेश के लाखों कागजी एनजीओ खा रहे मलाई, सिर्फ 10 फीसदी पाए गए सही

भोपाल। प्रदेश में फर्जी एनजीओ की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेता और अधिकारियों की मिलीभगत से इन एनजीओ का संचालन सिर्फ कागजों पर हो रहा है। इसकी जानकारी सरकार को भी है। सरकार से जुड़े और विपक्ष के कई बड़े नेता अपने चहेतों को एनजीओ के माध्यम से उपकृत कर रहे हैं। सरकार की जांच में यह खुलासा भी हो चुका है कि दस फीसदी एनजीओ को छोड़ दे तो शेष के पास कोई काम नहीं है पर इन एनजीओ पर अब तक लगाम नहीं कस पाई है। हर साल फर्म एंड सोसायटी में 20 से 25 हजार एनजीओ रजिस्टर्ड होते हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी प्रदेश में रजिस्डर्ट एनजीओ की संख्या 6 लाख से ज्यादा है। इनमें से 30 से 40 हजार एनजीओ ऐसे हैं, जो कुछ काम कर रहे हैं। हकीकत तो यह है कि 5 हजार से भी कम एनजीओ ऐसे हैं, जो सही तरीके से सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं। इनमें से हजारों एनजीओ तो नेता और अफसरों ने अपने चहेतों के नाम पर खोल रखे हैं, जिनके माध्यम से सरकारी विभागों के बजट को हड़पा जा रहा है। ऐसे एनजीओ भी लाखों की संख्या में हैं, जिनका पंजीयन निरस्त हो चुके हैं।
ग्वालियर और चंबल में 60 फीसदी एनजीओ फर्जी
सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों सरकार के निर्देश पर कराई गई जांच में ग्वालियर और चंबल में 60 फीसदी एनजीओ फर्जी पाए गए थे। जिसकी खबर सरकार के पास भी पहुंची थी। इसके बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए। सामाजिक न्याय विााग ने माना है कि भिंड-मुरैना-ग्वालियर सहित प्रदेशभर में एनजीओ का बड़ा गिरोह सक्रिय है, बड़ी संख्या में फर्जी एनजीओ चल रहे हैं। फर्जी एनजीओ से मिलकर यहां पैसों की बंदरबांट की जा रही है। फर्जी एनजीओ के पीछे नेता और अफसरों के शामिल होने की भी बात सामने आ चुकी है।

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