ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से प्राप्त 10 पुरातन वस्तुएं (मूर्तियां) आज नई दिल्ली में तमिल नाडु सरकार को सौंपी गईं

ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से प्राप्त 10 पुरातन वस्तुएं (मूर्तियां) आज नई दिल्ली में तमिल नाडु सरकार को सौंपी गईं“प्रधान मंत्री जी के व्यक्तिगत संबंधों और इन देशों के विश्व नेताओं के साथ मधुर संबंधों ने संबंधित देशों को चोरी किए गए की पुरावशेषों की तेजी से पहचान करने और उनकी वापसी तक निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है” : श्री जी किशन रेड्डी
“इतिहास अपने भूगोल से जुड़ा  है, एक सतत जीवंत सभ्यता के रूप में भारत की विरासत मंदिरों और उन स्थानों की है जहां से इसे ले जाया  गया था। अपने देव विग्रहों को वापिस लाना एक ऐसी पहल ही है जो हमारी विरासत को संरक्षित करने,उसे बढ़ावा देने और समृद्ध  करने में निहित है” : श्री जी किशन रेड्डी

ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका से प्राप्त दस पुरातन  वस्तुएं (मूर्तियां) आज नई दिल्ली में तमिल नाडु सरकार को सौंप दी गईं। श्री जी किशन रेड्डी, केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और उत्तरी पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), नई दिल्ली में तमिल नाडु सरकार को इन 10 मूर्तियों के इस हस्तान्तरण समारोह में भाग लिया। संस्कृति राज्य मंत्री, श्रीमती मीनाक्षी लेखी; संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री, श्री एल मुरुगन के साथ संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, विदेश मंत्रालय और तमिल नाडु सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 8 वर्षों मे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने हमारी प्राचीन सभ्यता के लोकाचार को संरक्षित करने, हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करने और भारतीय ज्ञान प्रणालियों और विश्वभर में परम्पराओं का प्रचार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अपने देव विग्रहों को वापिस लाना अर्थात ब्रिंग आवर गॉड्स होम एक ऐसी ही पहल है जो हमारी विरासत को संरक्षित, बढ़ावा और प्रचारित करने में निहित है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री जी  के व्यक्तिगत संबंधों और इन देशों के विश्व नेताओं के साथ मधुर संबंधों ने संबंधित देशों को चोरी से ले जाए गए  पुरावशेषों की तेजी से पहचान करने और उनकी वापसी तक निरंतर सहयोग करने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए सारा श्रेय हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जाता है। उन्होंने न केवल इन पुरावशेषों को पुनः प्राप्त करने में मदद करने के प्रयास किए हैं, बल्कि विदेश में अपने आधिकारिक दौरों के दौरान व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने साथ वापस भी लेकर  आए हैं ।

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तमिल नाडु सरकार को सौंपे गए पुरावशेषों के संग्रह में द्वारपाल, नटराज, कनकलामूर्ति कदयम, नदीकेश्वर कदयम, चतुर्भुज विष्णु, श्री देवी, शिव और पार्वती, खड़े हुए बाल संबंदर और बाल सांभर नाम की मूर्तियां शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री श्री जी किशन रेड्डी ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की और 2014 के बाद से वापिस लाई गई मूर्तियों की संख्या में वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि "हमारे माननीय प्रधान मंत्री की अमेरिका (यूएसए) यात्रा के दौरान, 157 पुरावशेषों को भारत वापस लाया गया जो भारत को अब तक मिला सबसे बड़ा एकल संग्रह है। आपको पता ही होगा कि पिछले 8 वर्षों में सरकार 228 विरासत वस्तुओं को वापस ला चुकी है। स्वतंत्रता प्राप्ति  और 2013 के बीच केवल 13 पुरावशेषों को ही भारत वापस लाया गया। मित्रों, आंकड़े अपने आप ही यह बता देते और दर्शाते हैं कि यह सरकार हमारी विरासत को कितना महत्व देती है। भारत सरकार के निरंतर प्रयास और 2014 से अब तक 228 पुरावशेषों को वापस लाए जाने से अब इनकी कुल संख्या 241 हो गई है।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारत आजादी का अमृत महोत्सव के माध्यम से अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। अब  भारत अमृत काल के 25 साल में प्रवेश कर रहा है इसलिए यह स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं और विरासत के वैश्विक रक्षक के रूप में नेतृत्व करने का एक अवसर है। यह समारोह  और चुराई हुई हमारी विरासत को वापस लाने की प्रक्रिया उपनिवेशवाद से स्वतन्त्रता पर एक खुली और ईमानदार बातचीत की अनुमति भी  देगी । 

इस अवसर पर दस पुरावशेषों पर एक पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।

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