कड़ाके की सर्दी से ठिठुर रहे लोग, अलाव का सहारा

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट 8871288482

सीहोर । जिले समेत नगर में दिन प्रतिदिन ठंड का कहर बढ़ता ही जा रहा है। लोगों को जाड़े ने जकड़ कर रखा है, तो लोग घरों के परिसर में ही अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाने की जुगत कर रहे हैं, तो वहीं लोगों को कोहरे की मार भी जमकर पड़ रही है। नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड से आमजन-जीवन अस्त-व्यस्त बना हुआ है।

कड़ाके की ठंड के चलते समूचा तहसील क्षेत्र मानो ठाठुर सा गया है। शहर में गलन व ठिठुरन भरी ठंड के कारण लोगों ने अलाव का सहारा ही बेहतर समझा। मंगलवार को हल्की सी धूप तो खिली, लेकिन दिन में भी तापमान कोई ज्यादा अधिक नहीं रहा। धूप का कोई प्रभाव महसूस नहीं हुआ, जिससे लोग अलाव से दूर जाने की हिम्मत नहीं कर पाए, जिसका असर बाजार पर देखा भी साफ देखा गया। ग्राहकों की कमी को देखते हुए दुकानदारों की रुचि भी अलाव तापने में ही ज्यादा रही। दिन ढलते ही फिर से सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। नगरवासी राम पंड्या ने कड़ाके की ठंड के बारे में बताया कि भैया हमने तो इतने जोर की ठंड कभी महसूस नहीं की, ऐसी ठंड में तो अलाव ही एकमात्र सहारा है। साथ ही उनके साथी सुनील शर्मा ने बताया कि नवंबर माह के तीसरे हफ्ते में जिले भर में काफी तेज ठंड रहती ही है यही वजह है कि इन दिनों सुबह के समय शहर कोहरे के आगोश में रहता है।

सड़कों पर पसरा सन्नााटा

कोहरे और ठंड के कारण अब जहां लोग सुबह जरूरी काम होने पर भी घरों से नहीं निकल रहे हैं, तो वहीं पाला पड़ने के कारण सड़कों पर सन्नााटा पसरा रहता है, तो वही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने ठंड के असर को कम करने के लिए मोटे अनाज का सेवन करना प्रारंभ कर दिया है, जिसमें लोग गेहूं के आटे की जगह मक्का के आटे का प्रयोग करते देखे जा रहे हैं।

पेसेंट के लिए डॉ. व स्टॉप हर समय कड़ाके की ठंड में भी मौजूद है

वही डॉ. अमित तीवारी ने बताया कि मरीजों के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए पेसेंट वैसे ही परेशान होते है तभी वह हॉस्पिटल आते है डॉ. के ऊपर ही भरोशा करते है जैसे लोग भगवान पर भरोशा करते है वही दर्जा डॉ. को दिया गया है । एवं डॉक्टरों की प्राथमिकता है कि वह मरीजों को अच्छे से अच्छा उपचार प्रदान करे उसी श्रृंखला में हम काम कर रहे है ।

वही इछावर नगर के राहुल वर्मा ने बताया कि अभी तक जितनी ठंड पड़ी है, उतनी तो फसलों के लिए वरदान सिद्ध हो ही रही है, लेकिन यदि आगे सर्दी का पारा दोडिग्री या तीन डिग्री तक जाता है तो सर्दी से फसल जल भी सकती है। मसलन यहां सर्दी फसलों के लिए अभिशाप भी सिद्ध हो सकती है।

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