वित्त मंत्रालय एवं कारपोरेट कार्य मंत्रालय के आइकोनिक वीक समारोह के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, श्री राव इंद्रजीत सिंह, पंकज चौधरी जी, श्री भागवत कृष्ण राव कराड जी, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों !

बीते वर्षों में Ministry of Finance और Ministry of Corporate Affairs, उन्‍होंने अपने कायों के द्वारा सही समय पर सही निर्णयों के द्वारा अपनी एक legacy बनाई है, एक बेहतरीन सफर तय किया है। आप सभी इस विरासत का हिस्सा हैं। देश के सामान्य जन के जीवन को आसान बनाना हो, या फिर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करना हो, बीते 75 वर्षों में अनेक साथियों ने बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन किया है।

ये iconic week ऐसे हर साथी को, अतीत के ऐसे हर प्रयास को जीवंत करने का अवसर है। आज़ादी के अमृतकाल में हम अपने इस अतीत से प्रेरित होकर अपने प्रयासों को और बेहतर कर सकें, ये इस दिशा में बहुत अच्छा कदम है। आज यहां रुपए की गौरवशाली यात्रा को भी दिखाया गया, इस सफर से परिचित कराने वाली डिजिटल प्रदर्शनी भी शुरु हुई, और आज़ादी के अम़ृत महोत्सव के लिए समर्पित नए सिक्के भी जारी किए गए।

ये नए सिक्के देश के लोगों को निरंतर अमृतकाल के लक्ष्य याद दिलाएंगे, उन्हें राष्ट्र के विकास में योगदान के लिए प्रेरित करेंगे। अगले एक हफ्ते में अनेक कार्यक्रम आपके विभाग के द्वारा होने वाले हैं। इस अमृत कार्य से जुड़े सभी विभागों को, आपकी हर छोटी-मोटी इकाई को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज़ादी का ये अमृत महोत्सव सिर्फ 75 वर्षों का उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि आज़ादी के हमारे नायक-नायिकाओं ने आज़ाद भारत के लिए जो सपने देखे थे, उन सपनों को सेलिब्रेट करना, उन सपनों को परिपूर्ण करना, उन सपनों में एक नया सामर्थ्‍य भरना और नए संकल्‍प को ले करके आगे बढ़ने का ये पल है। आज़ादी के लंबे संघर्ष में जिसने भी हिस्सा लिया, उसने इस आंदोलन में एक अलग dimension को जोड़ा, उसकी ऊर्जा बढ़ाई।

किसी ने सत्याग्रह का रास्ता अपनाया, किसी ने अस्त्र–शस्त्र का रास्ता चुना, किसी ने आस्था और आध्यात्म का रास्ता चुना, तो किसी ने intellectually आज़ादी की अलख को जगाने में अपनी कलम की ताकत का उपयोग किया। किसी ने कोर्ट-कचहरी में मुकदमे लड़ करके देश की आजादी में एक नई ताकत भरने का प्रयास किया। इसलिए आज जब हम आज़ादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहे हैं, तो प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है कि वो अपने-अपने स्तर पर, अपने-अपने विशिष्‍ट योगदान राष्ट्र के विकास में जरूर जोड़े।

आप देखिए, अगर हम राष्ट्र के तौर पर देखें, तो भारत ने बीते आठ वर्षों में अलग-अलग आयामों पर नित्‍य नूतन कदम उठाए हैं, नवीन काम करने का प्रयास  किया है। इस दौरान देश में जो जनभागीदारी बढ़ी, उन्होंने देश के विकास को गति दी है, देश के गरीब से गरीब नागरिक को सशक्त किया है।

स्वच्छ भारत अभियान ने– गरीब को सम्मान से जीने का अवसर दिया। पक्के घर, बिजली, गैस, पानी, मुफ्त इलाज जैसी सुविधाओं ने हमारे गरीब की गरिमा बढ़ाई, हमारे नागरिकों के आत्‍मविश्‍वास में एक नई ऊर्जा भर दी और साथ-साथ सुविधा भी बढ़ाई।

कोरोना काल में मुफ्त राशन की योजना ने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को भूख की आशंका से मुक्ति दिलाई। देश की आधे से अधिक आबादी जो देश के विकास के विमर्श से, फॉर्मल सिस्टम से वंचित थी, excluded थी, उसका inclusion हमने मिशन मोड पर किया। Financial Inclusion का इतना बड़ा काम, इतने कम समय में दुनिया में कहीं नहीं हुआ है। और सबसे बड़ी बात, देश के लोगों में अभाव से बाहर निकलकर सपने देखने और सपनों को साकार करने का नया हौसला हमें देखने को मिला।

साथियों,

आज़ादी के 7 दशक बाद ये जो इतना बड़ा परिवर्तन आया है, उसके केंद्र में People-Centric Governance है, Good Governance का लगातार प्रयास है। एक समय था, जब हमारे देश में नीतियां और निर्णय Government-Centric होते थे। यानि किसी योजना के शुरू होने के बाद ये लोगों की जिम्मेदारी थी कि वो सरकार तक पहुंच कर उसका लाभ उठाएं। इस तरह की व्यवस्था में सरकार और प्रशासन, दोनों की ही जिम्मेदारी कम हो जाती थी। अब जैसे किसी गरीब छात्र को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की जरूरत होती थी, तो पहले वो अपने परिवार, अपने रिश्तेदारों या अपने दोस्तों से मदद लेने के लिए मजबूर था। इसी काम के लिए सरकार की जो भी योजनाएं थीं, उसमें इतनी ज्यादा प्रक्रियाएं होती थीं, कि वो उस मदद को पाने के लिए आगे ही नहीं बढ़ता था, उस प्रक्रिया में ही थकान महसूस करने लगता था।

इसी तरह अगर किसी entrepreneur, किसी व्यापारी-कारोबारी को लोन की जरूरत होती थी, तो उसे भी अनेक जगह चक्कर लगाने पड़ते थे, अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। अक्सर ये भी होता था कि अधूरी जानकारी की वजह से वो मंत्रालय की वेबसाइट तक भी नहीं पहुंच पाता था। ऐसी मुश्किलों का नतीजा ये होता था कि छात्र हो या व्यापारी, अपने सपने बीच में ही छोड़ देता था, उन्हें पूरा करने के लिए कदम ही नहीं उठाता था।

पहले के समय government-centric गवर्नेंस का देश ने बहुत बड़ा खामियाजा उठाया है। लेकिन आज 21वीं सदी का भारत, People-Centric गवर्नेंस की अप्रोच के साथ आगे बढ़ा है। ये जनता ही है, जिसने हमें अपनी सेवा के लिए यहां भेजा है। इसलिए हमारी ये सर्वोच्च प्राथमिकता है कि हम खुद जनता तक पहुंचे, हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना, उसे पूरा लाभ पहुंचाना, ये दायित्‍व हम पर है।

अलग-अलग मंत्रालयों की अलग-अलग वेबसाइटों के चक्कर, उसे लगाने से बेहतर है कि वो भारत सरकार के एक पोर्टल तक पहुंचे और उसकी समस्या का समाधान हो। आज जनसमर्थ पोर्टल लॉन्च किया गया है, वो इसी लक्ष्य के साथ बनाया गया है। अब भारत सरकार की सभी credit-linked schemes अलग-अलग माइक्रोसाइटों पर नहीं बल्कि एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी।

ये जनसमर्थ पोर्टल छात्रों का, entrepreneurs का, व्यापारियों-कारोबारियों का, किसानों का जीवन तो आसान बनाएगा ही, उन्हें अपने सपने पूरे करने में भी मदद करेगा। अब छात्र आसानी से जानकारी ले पाएंगे कि कौन सी सरकारी योजना का उन्हें सबसे ज्यादा लाभ होगा, वो कैसे उसका फायदा उठा सकते हैं। इसी तरह हमारे युवा आसानी से ये तय कर पाएंगे कि उन्हें मुद्रा लोन चाहिए या स्टार्ट अप इंडिया लोन चाहिए।

जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से अब देश के युवाओं को, मध्यम वर्ग को end-to-end delivery का एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिला है। और जब लोन लेने में आसानी होगी, कम से कम प्रक्रियाएं होंगी तो ये भी स्वभाविक है कि ज्यादा से ज्यादा लोग लोन लेने के लिए आगे आएंगे। ये पोर्टल, स्वरोजगार को बढ़ाने में, सरकार की योजनाओं को सभी लाभार्थियों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाने वाला है। मैं जनसमर्थ पोर्टल के लिए देश के युवाओं को विशेष रूप से बधाई देता हूं।

आज यहां इस कार्यक्रम में बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज भी मौजूद हैं। मेरा उनसे आग्रह है कि सारे बैंकर्स भी जनसमर्थ पोर्टल को सफल बनाने के लिए, युवाओं को लोन मिलना आसान बनाने के लिए अपनी भागीदारी ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं।

साथियों,

कोई भी सुधार हो, Reform हो, अगर उसका लक्ष्य स्पष्ट है, उसके Implementation को लेकर गंभीरता है, तो उसके अच्‍छे नतीजे भी आना तय है। बीते आठ वर्षों में देश ने जो Reforms किए हैं, उनमें बड़ी प्राथमिकता इस बात को भी दी गई है कि हमारे देश के युवाओं को अपना सामर्थ्य दिखाने का पूरा मौका मिले।

हमारे युवा अपनी मनचाही कंपनी आसानी से खोल पाएं, वो अपने enterprises आसानी से बन पाएं, उन्हें आसानी से चला पाएं, इस ओर जोर दिया गया है। इसलिए 30 हजार से ज्यादा compliances को कम करके, डेढ़ हजार से ज्यादा कानूनों को समाप्त करके, कंपनीज एक्ट के अनेक प्रावधानों को decriminalize करके, हमने ये सुनिश्चित किया है कि भारत की कंपनियां ना सिर्फ आगे बढ़ें बल्कि नई ऊंचाई को प्राप्त करें।

साथियों,

Reforms- यानि सुधार के साथ ही हमने जिस बात पर फोकस किया है, वो है सरलीकरण, Simplification. केंद्र और राज्य के अनेक टैक्सों के जाल की जगह अब GST ने ले ली है। और इस Simplification का नतीजा भी देश देख रहा है। अब हर महीने GST कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए के पार जाना सामान्य बात हो गई है। EPFO registrations की संख्या में भी हम लगातार बढ़ोतरी देख रहे हैं। सुधार, सरलीकरण से आगे बढ़कर अब हम सुगम व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं।

GeM पोर्टल की वजह से entrepreneurs और enterprises के लिए सरकार को अपना Product बेचना बहुत आसान हो गया है। इसमें भी खरीद का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए को पार कर रहा है। आज देश में निवेश करने के लिए कहां-कहां संभावनाएं हैं, वो जानकारी Invest India portal के माध्यम से आसानी से उपलब्ध है।

आज अनेक तरह की clearances के लिए single window clearance portal है। इसी कड़ी में ये जनसमर्थ पोर्टल भी देश के युवाओं, देश के स्टार्ट अप्स को बहुत मदद करने वाला है। आज हम सुधार, सरलीकरण, सुगमता की शक्ति के साथ आगे बढ़ते हैं तो सुविधाओं का नया स्तर प्राप्त होता है। सभी देशवासियों को आधुनिक सुविधाएं देना, उसके लिए नित नए प्रयास करना, नए संकल्प लेकर उन्हें सिद्ध करना हम सभी का दायित्व है।

साथियों,

बीते 8 वर्षों में हमने दिखाया है कि भारत अगर मिलकर कुछ करने की ठान ले तो वो पूरी दुनिया के लिए एक नई उम्मीद बन जाता है। आज दुनिया सिर्फ एक बड़े consumer market के रूप में ही नहीं, बल्कि एक समर्थ, game changer creative, innovative ecosystem के रूप में आशा और अपेक्षाओं से हमारी तरफ आज दुनिया देख रही है। दुनिया के एक बड़े हिस्से को भारत से समस्याओं के समाधान की अपेक्षाएं हैं। ये इसीलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि बीते 8 सालों में हमने सामान्य भारतीय के विवेक पर भरोसा किया। हमने जनता को Growth में intelligent participants के रूप में प्रोत्साहित किया।

हमें देश की जनता पर पूरा विश्वास रहा है कि जो भी टेक्नॉलॉजी सुशासन के लिए लाई जाएगी, उसे देश की जनता स्वीकार करेगी और सराहेगी भी। इसी जनविश्वास का परिणाम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिजिटल ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म UPI यानि Unified Payment Interface के रूप में सबके सामने है। आज दूर-सुदूर गांवों से लेकर शहरों के मोहल्लों में रेहड़ी-ठेले पर भी 10-20 रुपए से लेकर लाखों की ट्रांजेक्शन देशवासी इस पर आसानी से कर रहे हैं।

हमें भारत के युवाओं में इनोवेशन और entrepreneurship को लेकर जो जुनून है, उस पर भी बहुत अधिक विश्वास था। देश के नौजवानों में छुपे इसी जुनून को रास्ता देने के लिए start-up India का प्लेटफॉर्म दिया गया। आज देश में लगभग 70 हज़ार स्टार्ट अप्स हैं और हर रोज़ इसमें दर्जनों नए सदस्य जुड़ रहे हैं।

साथियों,

आज देश जो हासिल कर रहा है, उसमें बहुत बड़ी भूमिका स्व-प्रेरणा की है, सबके प्रयास की है। देशवासी आत्मनिर्भर भारत अभियान से, वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों से भावनात्मक रूप से जुड़ गए हैं। इसमें अब आप सभी की, Ministry of Finance और Ministry of Corporate Affairs की भूमिका बहुत बढ़ गई है। अब हमें योजनाओं के सैचुरेशन तक तेज़ी से पहुंचना है।

हमने Financial Inclusion के platforms तैयार किए हैं, अब हमें इनके सदुपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ानी है। जो Financial Solutions भारत के लिए तैयार किए हैं, वो अब दुनिया के दूसरे देशों के नागरिकों को भी समाधान दें, इसके लिए भी प्रयास होना चाहिए।

हमारे बैंक, हमारी करंसी इंटरनेशनल सप्लाई चेन का, इंटरनेशनल ट्रेड का व्यापक हिस्सा कैसे बनें, इस पर भी फोकस ज़रूरी है। मुझे विश्वास है कि आज़ादी के अमृतकाल में बेहतर फाइनेंशियल और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को आप निरंतर प्रोत्साहित करते रहेंगे। आज इस समारोह के लिए और 75 स्थानों पर जो भी साथी बैठे हैं उन सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देते हुए मैं मेरी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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