उत्पाद और पेटेंट बनाने वाली अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक-निजी सहयोगात्मक वित्त पोषण के प्रभाव को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन

 

अनुसंधान नवाचार और प्रौद्योगिकी को प्रभावित करना (इम्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी-आईएमपीआरआईएनटी) II योजना के अंतर्गत परियोजनाओं के परिणामों को प्रदर्शित करने वाली एक दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन कल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में 22 मई, 2023 को किया गया। इसका उद्देश्य उत्पादों और पेटेंट बनाने वाली अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक-निजी सहयोगात्मक वित्त पोषण को सामने लाना था।

इम्प्रिंट परिणामों के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के उद्घाटन के अवसर पर सचिव, विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता अपने सम्बोधन में कहा कि “इम्प्रिंट (आईएमपीआरआईएनटी) पहल एक अनूठा उदाहरण है जहां सरकार और शिक्षा जगत शुरू से ही उद्योगों के साथ ऐसे विचारों पर काम कर रहे हैं जिन्हें बाजार में ले जाया जा सकता है, और इस योजना से कई प्रौद्योगिकियां और उत्पाद बाजार में पहुंच गए हैं”।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस तरह के उद्योग-संचालित अनुसंधान के लिए समर्थन सार्वजनिक –निजी–सहभागिता (पीपीपी) मोड पर उद्योग द्वारा संचालित विचारों पर काम करने के मॉडल को स्वरुप देने के साथ ही भारतीय उद्योग को और अधिक नवीन बना सकता है एवं अधिक गहन तकनीकी स्टार्टअप को प्रोत्साहित कर सकता है तथा उन्हें विकसित देशों के बराबर उच्च स्तर पर बना सकता है।

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग/विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसन्धान बोर्ड ( डीएसटी /एसईआरबी) और शिक्षा मंत्रालय (एमओई) की पहल की इस प्रदर्शनी जिसमें इम्प्रिंट II के 10 कार्यक्षेत्रों (डोमेन) के अंतर्गत लगभग 60 परियोजनाओं के परिणाम को प्रोटोटाइप/पोस्टर/अन्य प्रासंगिक प्रदर्शनों के रूप में प्रदर्शित किया गया, लगभग लगभग विभिन्न हितधारकों से 300 व्यक्ति- वैज्ञानिक समुदाय, शिक्षाविद/शोधकर्ता, उद्योग, सरकारी अधिकारी आदि की भागीदारी देखी गई।

आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने समाज में उन समस्याओं की पहचान करने की आवश्यकता पर जोर दिया जहां प्रौद्योगिकी एक बदलवा ला सकती है और कहा कि इम्प्रिंट के अंतर्गत वे प्रौद्योगिकियां, जिनमें से कई प्रदर्शनी में प्रदर्शित हैं, का उद्देश्य समाज के लिए लाभकारी उत्पादों को सामने लाना है। शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती सौम्या गुप्ता ने कहा कि अनुसंधान नवाचार और प्रौद्योगिकी को प्रभावित करना (इम्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी -आईएमपीआरआईएनटी) जैसी पहलों ने समाज की जरूरतों को पूरा किया,उन्होंने प्रभाव पैदा करने के लिए सहयोग और समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया ।

अनुसंधान नवाचार और प्रौद्योगिकी को प्रभावित करना (इम्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी -आईएमपीआरआईएनटी) योजना को 5 नवंबर, 2015 को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत उच्च स्तर के नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जो उद्योग की जरूरतों को सीधे प्रभावित करता है और इस तरह उद्योग के भारतीय विनिर्माण इकोसिस्टम की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में सुधार करता है ।

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हमारे देश की आवश्यकताओं के लिए प्रासंगिक 10 चयनित कार्यक्षेत्रों (डोमेन) में प्रमुख इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य उन शोध परियोजनाओं के लिए सहयोगी वित्त पोषण करना था जो उत्पाद और पेटेंट तैयार करेंगे। ये 10 डोमेन हैं- पर्यावरण और जलवायु, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकी, टिकाऊ आवास, जल संसाधन, उन्नत सामग्री, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, विनिर्माण प्रौद्योगिकी, नैनो-प्रौद्योगिकी और सुरक्षा और रक्षा।

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