गांव के दोनों सरकारी टयूबवेल बंद, टंकिया बनी शोपीस व ग्रामीण एक किमी दूर से पानी लाने को मजबूर

DG NEWS RAJGARH

राजगढ़ से कल्पना कीर की रिपोर्ट

राजगढ़ । जिले में गर्मी की दस्तक के साथ ही पेयजल संकट भी शुरू हो गया है। यही कारण है कि कई गांवों में अभी से जल संकट गहराने लगा है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला है समीपस्थ ग्राम लाखिया में, जहां पर दोनों सरकारी टयूबवेल व आधा दर्जन हैंडपंप बंद पड़े हैं। पानी के लिए बनी टंकियां शोपीस बनी हुई है व ग्रामीण एक किमी दूर से पेयजल लाने को मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक लाखिया गांव में करीब 200 घरों की आबादी है। यहां पर पहले से आधा दर्जन हैंडपंप लगे हैं व दो सरकारी ट्यूबवेल भी लगी हुई है, लेकिन दो साल से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। सभी हैंडपंप बंद अवस्था में पड़े हैं। इसके अलावा दोनों सरकारी टयूबवेलों का उपयोग पिछले करीब डेढ़-दो वर्ष से नहहीं हो पा रहा है। उधर पेयजल के लिए बनी पानी की टंकियां भी अब शोपीस का काम कर रही हैं। ग्रामीण करीब गांव से एक किमी दूर खेतों पर स्थि निजी टयूबवेलों से पानी लाने को मजबूर हैं। जिसको जो खेत व टयूबवेल पास पड़ती है वह वहीं से पानी ले आते हैं। ने बताया कि पेयजल के लिए गांव के बाहर एक किमी दूर से पानी लेकर आना पड़ता है। हर दिन महिलाएं व छोटे-छोटे बच्चों को पेयजल के लिए एक किमी दूर जाना पड़ता है, तब कहीं जाकर पीने का पानी व अन्य घुरैलू कामकाज के लिए पानी मिल पाता है।

ट्रांसफार्मर जलने के बाद से बंद है ट्यूबवेल

जानकारी के मुताबिक जिस ट्रांसफार्मर से दोनों सरकारी ट्यूबवेल चलती थी वह ट्रांसफार्मर पिछले करीब 2 वर्ष से खराब है। जब से वह खराब हुआ है तब ही से सरकारी ट्यूबवेल बिजली के अभाव में नहीं चल पा रही है। जिस समय ट्यूबवेल चलती थी उस दौरान गांव के पास से ही उक्त दोनों टयूबवेलों से ग्रामीण पीने का पानी भर लेते थे। ग्रामीणों की मानें तो वह कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन समस्या का हल अब तक नहीं किया जा सका है।

गर्मी में रहती है सर्वाधिक समस्या

ग्रामीणों की मानें तो बारिश के समय कुछ हैंडपंप चालू हो जाते हैं, जबकि गर्मी आते-आते उनका जल स्तर नीचे जाने से बंद हो जाता है। इसके अलावा सर्दी के समय कुओं पर टूयबवेलें व पानी की मोटरें चलने से ग्रामीण पानी भर लेते हैं, लेकिन गर्मी क समय सर्वाधिक दिक्कत आती है। क्योंकि कुओं की मोटरें व ट्यूबवेल भी सिंचाई बंद होने के साथ बंद हो जाती है। ऐसे में कई लोगों को खींचकर पानी लाना पड़ता है।

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