दिल्ली में अपनी पहचान बना रहे पड़ाना के बुनकर कारीगर

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राजगढ़ से कल्पना कीर की रिपोर्ट

दिल्ली में अपनी पहचान बना रहे पड़ाना के बुनकर कारीगर

राजगढ़ । जिले के सारंगपुर जनपद की ग्राम पंचायत पड़ाना देश भर में हैंडलूम पर अपनी शानदार कारीगरी से खादी से बनी सामग्री निर्माण करने के लिये दशकों से मशहूर है। जिसें अब और भी अधिक पंसद किया जाने लगा है। पड़ाना में बुनकरों द्वारा अपने हाथो से बनाई गई बेड्सीट्स और अन्य सामग्री को अब देश के साथ-साथ दिल्ली से बाहर भी अन्य देशों में पंसद किया जा रहा है। दिल्ली के प्रगति मैदान में जारी सरस इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (आइआइटीएफ-2021) में प़ड़ाना हैंडलूम को खासा पंसद किया जा रहा है। पड़ाना से जिला पंचायत के माध्यम से आजीविका मिशन अंतर्गत गठित उत्कृष्ट स्वयं सहायता समूह ने अपनी कला के दम पर इसमें जगह बनाई और दिल्ली में 14 से 27 नवंबर तक आयोजित सरस मेले में अपना जलवा बिखेर रहा है। पड़ाना बुनकर स्व. सहायत समूह की सदस्य नसीम रईस अंसारी ने बताया कि लोग जमकर हमारे द्वारा निर्मित की गई बेडसीट्स की खरीदारी कर रहे है और अभी तक 1 लाख तक की ब्रिक्री हो चुकी है। विक्रेता ताहिर रजा ने बताया कि इस मेले में 18 नवंबर तक वीआइपी एंट्री के बाद अब आमजनों का प्रवेश शुरू हो गया है, जिसमें अच्छी बिक्री होंगी। सारंगपुर एसडीएम आरएम त्रिपाठी ने बताया कि शासन-प्रशासन द्वारा आजीविका मिशन के माध्यम से हैंडलूम निर्माण में लगे समूह परिवारों को बाजार से जोड़ने के लगातार अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी के तहत शनिवार को भोपाल के आईएएस गेस्ट हाउस में प्रदर्शनी सह विक्रय स्टाल लगाई गई। जिसमें सिर्फ 2 घंटे में 35 हजार के समान की बिक्री हुई। इस प्रदर्शनी से हैंडलूम के प्रति खरीददारों में रुझान बढ़ा हैं। इस तरह के आयोजन से उत्पादक परिवार खासे उत्साहित हैं। उल्लेखनीय है कि पड़ाना में बुनकर परिवारों की 70 से अधिक महिलाएं समूह से जुड कर निर्माण कार्य में लगी हुई है। बुनकरों का कहना है कि सरकार यदि पड़ाना के हम कार्यकुशल बुनकरों को भरपुर काम उपलब्ध कराएं तो हम और भी बेहतर उत्पादन करने में सक्षम है।

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