समाज में समरसता प्रसार में मानस का ज्ञान जरूरी : राज्यपाल श्री पटेल

राजभवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान की कार्यकारिणी की बैठक हुई

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समाज में संवेदनशीलता, पारस्परिक सहयोग और सदभावनाओं को मज़बूत बनाने का दायित्व समाज के सभी वर्गों और सदस्यों का है। समाज में समरसता के प्रसार के लिए रामचरित मानस के ज्ञान का प्रसार किया जाना जरूरी है। राज्यपाल ने प्रतिष्ठान के समस्त सदस्यों की बैठक करने के लिए कहा है।

राज्यपाल श्री पटेल तुलसी मानस प्रतिष्ठान की कार्यकारिणी की बैठक को राजभवन में संबोधित कर रहे थे। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुश्री उषा ठाकुर और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए उसके सदस्यों में निःस्वार्थ भाव और जरुरतमंदों की सेवा की भावना होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुदरत की सबसे समर्थ रचना मानव है। उसके पास जो शक्तियाँ है, वह जरुरतमंदों की मदद के लिए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान जहाँ एक ओर बड़ी संख्या में लोगों ने मानवता की सेवा में अपने जीवन का त्याग कर दिया, वही कुछ दृष्टांत ऐसे भी हुए जिन्होंने मानवता को शर्मसार किया है। उन्होंने कहा कि समाज को इस पर चिंतन करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कोविड महामारी में बचाव, नियंत्रण, राहत प्रयासों और समाज-सेवियों के सम्मान में जिस प्रकार से समाज का नेतृत्व किया, वह नेतृत्व का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अच्छी बातों को जानना ही काफी नहीं है। वह समाज के आचरण में दिखे, ऐसे प्रयास किए जाना चाहिए।

संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने बताया कि प्रतिष्ठान द्वारा रामचरित मानस के अयोध्या कांड के अध्ययन पर आधारित ऑनलाइन प्रतियोगिता की गई है। प्रतियोगिता के विजेताओं को राम जन्म-भूमि (अयोध्या) की हवाई यात्रा का पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मानस से जुड़े जनजाति समाज के नायकों पर आधारित कार्यक्रम भी किए गए हैं। प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा ने बताया कि रामचरित मानस को जनजातीय बोलियों में तैयार कराया गया है। प्रतिष्ठान की संरचना की भी जानकारी दी।

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