कंपनियों से निकलने वाले जहरीले धुआं व दूषित जल से मानव व जीव जंतुओ को जीवन का खतरा… आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिया ज्ञापन

झाबुआ। जिले के औद्योगिक क्षेत्र मेघनगर में इकाइयों से निकलने वाले धुवाँ व जहरीले जल को लेकर आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए 15 जुलाई 2021 को कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई एवं 10 दिन बाद कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेश स्तर पर विशाल प्रदर्शन की बात कही। बताया गया कि मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र है,लेकिन इन कंपनियों से निकलने वाला वेस्ट मटेरियल केमिकल युक्त पानी ओर जहरीली गैस 24 घण्टे छोड़ी जाती है, जिससे यहां का पर्यावरण दूषित हो रहा है।जिला झाबुआ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है मेघनगर अधिसूचित क्षेत्र है भारतीय संविधान अनुसार अनुच्छेद (13) 3 (क) के अनुसार रूड़ी व्यवस्थाओं को विधि का बल प्राप्त है, आदिवासी समाज शांति प्रिय निसर्गवादी समाज है, जिनकी दुनिया स्वर्ग से भी अति सुंदर है, मेघनगर जहां पर 15000 से 16000 तक की आबादी निवासरत हैं जो कि पर्यावरण प्रेमी ओर अपने जीवन यापन के लिए कृषि पर निर्भर करता है। इसलिये दुनियाभर के वैज्ञानिक, शुभचिंतक और पर्यावरणविद भी कहते है, जैसे आदिवासी जीवन जीते है,वैसा जीवन जियो मेघनगर को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया है फैक्ट्रियों से लगे गांव जैसे फतेहपुरा, आमली पठार, फुटतालाब, अगराल, घोसलिया छोटा, बेडावली राखडिया आदि गॉव प्रभावित है। इन गांवों में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है दूषित पानी से कई प्रकार की बीमारियां जैसे युवाओं के हाथ पैर में दर्द, कुपोषण, दाद खाज, खुजली, इससे कई प्रकार की अन्य गम्भीर बीमारियां हो रही है जिससे बहुत से पालतू पशु-गाय-बेल,बकरियां मारी गई है, जनहानि भी अधिक हो रही है, भविष्य में ये संकट गंभीर रूप ले सकता है, क्योंकि इकोसिस्टम एवम बायोलॉजिकल डायवर्सिटी प्रभावित एव प्रदूषित हो रहा है।नदी,नाले में प्रदूषित केमिकल युक्त यह पानी गारिया नाले से होता हुआ अनास नदी में जाकर मिलता है जिससे अनास नदी के साथ साथ पीने का जल, सिंचाई जल दूषित हो रहे है।घोसलिया छोटा होते हुए फॉरेस्ट के जंगल के रास्ते राखड़ीया बेडावली होते हुए जाता है। घोसलिया छोटा फॉरेस्ट की जमीन जो है उसमें राष्ट्रीय पक्षी मोर भी रहता है, नीलगाय भी रहती है,एवं कई प्रकार के जंगली जानवर रहते हैं।
दूषित पानी की वजह से सभी जलीय जीव नष्ट हो गए,ग्रामीणों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है और भविष्य में मानवजाति के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकती है। पर्यावरण, इकोसिस्टम, बायो डायवर्सिटी ओर मानवजाति के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए महोदय जी से निवेदन है कि इन अवैद्य, वातावरण दूषित, पर्यावरण दूषित करने वाली सभी कंपनियों के खिलाफ तत्काल-जल,वायू प्रदूषण एक्ट, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, soil conservation एक्ट, फारेस्ट conservation एक्ट 1951, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, बायोलॉजिकल डायवर्सिटी एक्ट 2002, एवम एट्रोसिटी एक्ट 1989 के तहत तत्काल कड़ी से कड़ी कार्यवाही का अनुरोध है।
उचित कार्यवाही न करने की दशा में 10 दिन बाद सम्पूर्ण आदिवासी समाज मध्यप्रदेश द्वारा इसके विरोध में वृहद प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदेही शासन-प्रशासन की रहेगी। इस दौरान सुरेखा, सविता, सन्नू, रेखा, रमीला, मंगला ,मनीषा, जेला, अनीता, रमीला, कमतू ,मलि, सुनीता ,मीरा, लासू ,बबली ,जेमती नारी शक्ति सुमित्रा मैडा आदि उपस्थित रहे।

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