मैली चादर ओढ के कैसे द्वार तुम्हारे आउं, विणा वादीनी वर दे जैसे मधुर गीतों के साथ जिला पेंशनर एसोसिएशन ने मनाया बंसत पंचमी पर्व

झाबुआ । शनिवार को जिला पेंशनर कार्यालय में जिला पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा मां सरस्वतीजी के जन्म दिवस एवं कवि सूयकांत त्रिपाठी निराला का जन्म दिन श्रद्धा के साथ मनाया गया । जिला पेंशनर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष बालमुकुन्द चैहान, सचिव पीडी रायपुरिया एवं जिला प्रचार सचिव राजेन्द्रकुमार सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व प्राचार्य अरवीन्द व्यास, ने माता सरस्वतीजी का पूजन अर्चन कर उन्हे माल्यार्पण किया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि अरवीन्द व्यास ने बसंत पंचमी के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि बसंत ऋतु में हमारे जीवन में एक अद्भुत शक्ति लेकर आती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इसी ऋतु में ही पुराने वर्ष का अंत होता है और नए वर्ष की शुरुआत होती है। इस ऋतु के आते ही चारों तरफ हरियाली छाने लगती है। सभी पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं। आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं हैं और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं हैं। इसी स्वाभाव के कारन इस ऋतु को ऋतुराज कहा गया है। इस ऋतु का स्वागत बसंत पंचमी या श्रीपंचमी के उत्सव से किया जाता है । उन्होने मां सरस्वतीजी की वंदना में ’’कवि निराला ’’ की पंक्तियां वर दे विणा वादीनी वर दे’’ को गाकर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया । इस अवसर पर सुभाष दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे शास्त्रों में विद्यारंभ के समय सबसे पहले ’’ सरस्वत्यै नमस्तुभ्यम् ’’मंत्र से बच्चों की शिक्षा आरंभ की जाती है । दुबे ने पौराणिक कथा के माध्यम से ’’मां सरस्वतीजी की उत्पत्ति एवं भगवान विष्णुजी द्वारा ब्रह्माजी की सृष्टि रचना के बारे में बताया। उन्होने कहा कि आज ही के दिन मांता सरस्वतीजी का जन्म हमस ब वैदिक पूजा पाठ कर मनाते आरहे है ।
शायर एवं कवि एजाज धारवी ने भी मधुर स्वर में ’’ मैली चादर ओढ के कैसे द्वार तुम्हारे आउं मैं’’ ने उपस्थित जनों की तालिया बटोरी । नगर के कवि भेरूसिंह चैहान ने ज्ञान का दीप शीर्षक से कविता हंस वाहीनी वेद धारीणी ज्ञान का दीप जलादे रचना सुनाई । इस अवसर पर गोविन्दराम वर्मा कल्याणपुरा ने भी सस्वर अपनी कविता सुनाई । जयेन्द्र बेरागी ने भी अपने विचार प्रस्तुत करते हुए मां सरस्वती जी की प्रार्थना प्रस्तुत की। इस अवसर पर बालमुकुन्दसिंह चैहान, शशिकांत त्रिवेदी, श्रीनाथसिंह चैहान, राजेन्द्र सोनी ने भी अपने विचार व्यक्त किये । कार्यक्रम के अन्त में मां सरस्वतीजी की आरती कर प्रसादी का वितरण किया गया ।
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