कुण्डली में नवमांश का महत्व

आचार्य पं. नवीन शर्मा

. ।। ।।
🚩🌞 सुप्रभातम् 🌞🚩
📜««« आज का पंचांग »»»📜
कलियुगाब्द……………………5121
विक्रम संवत्…………………..2076
शक संवत्……………………..1941
रवि………………………..दक्षिणायन
मास…………………………..अश्विन
पक्ष……………………………..कृष्ण
तिथी……………………………दशमी
दोप 04.36 पर्यंत पश्चात एकादशी
सूर्योदय………..प्रातः 06.16.06 पर
सूर्यास्त………..संध्या 06.22.45 पर
सूर्य राशि……………………….कन्या
चन्द्र राशि……………………….कर्क
नक्षत्र………………………….पुनर्वसु
प्रातः 10.25 पर्यंत पश्चात पुष्य
योग…………………………….परिघ
दोप 03.30 पर्यंत पश्चात शिव
करण……………………………विष्टि
दोप 04.36 पर्यंत पश्चात बव
ऋतु……………………………..शरद
दिन…………………………मंगलवार

🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
24 सितम्बर सन 2019 ईस्वी |

☸ शुभ अंक………………….6
🔯 शुभ रंग………………काला

👁‍🗨 राहुकाल :-
दोप 03.18 से 04.48 तक ।

🌞 उदय लग्न मुहूर्त :-
कन्या
05:43:19 07:59:57
तुला
07:59:57 10:19:48
वृश्चिक
10:19:48 12:38:45
धनु
12:38:45 14:43:07
मकर
14:43:07 16:25:45
कुम्भ
16:25:45 17:53:29
मीन
17:53:29 19:18:41
मेष
19:18:41 20:54:10
वृषभ
20:54:10 22:50:00
मिथुन
22:50:00 25:04:58
कर्क
25:04:58 27:25:39
सिंह
27:25:39 29:43:19

🚦 दिशाशूल :-
उत्तरदिशा – यदि आवश्यक हो तो गुड़ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें ।

चौघडिया :-
प्रात: 09.18 से 10.48 तक चंचल
प्रात: 10.48 से 12.17 तक लाभ
दोप. 12.17 से 01.47 तक अमृत
दोप. 03.17 से 04.47 तक शुभ
रात्रि 07.47 से 09.17 तक लाभ ।

📿 आज का मंत्र :-
|| ॐ भक्ततत्पराय नम: ||

📯 संस्कृत सुभाषितानि :-
अनुकूलां विमलाङ्गीं कुलीनां कुशलां सुशीला सम्पन्नाम् ।
पञ्चलकारां भार्यां पुरुषः पुण्योदयात् लभते ॥
अर्थात :-
अनुकूल, निर्मल, कुलीन, कुशल, और सुशील – ऐसे पाँच ‘ल’ कार वाली पत्नी, पुरुष के पुण्योदय होने पर हि मिलती है ।

🍃 आरोग्यं :
हरे प्याज़ के घरेलू उपचार :-

आंखों की रोशनी
हरे प्याज का लगातार सेवन करते रहने से आंखों की रोशनी लगातार बनी रहती है। आंख से धुंधलापन दूर करने में भी सहायक होता है। क्योंकि हरे प्याज में कई प्रकार के विटामिन्स होते है।

ब्लड प्रेशर से मिलता है आराम
हरा प्याज के सेवन से ब्लड प्रेशर नार्मल रहता है, क्योंकि इसमें सल्फर की मात्रा काफी पाई जाती है। जोकि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी मदद करता है।
ज्योतिषाचार्य पं. नवीन शर्मा
*9893874881
7987530825

आज का राशिफल :-

🐏 राशि फलादेश मेष :-
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
विवाद वाले स्थान से दूर हट जाएं। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। यात्रा का कार्यक्रम बनेगा। कारोबार अच्‍छा चलेगा। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। मनोरंजन के आनंददायक अवसर प्राप्त होंगे। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।

🐂 राशि फलादेश वृष :-
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
स्थायी संपत्ति के रुके कार्य पूर्ण होकर बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होंगे। घर-बाहर सभी ओर से सफलता प्राप्त होगी। प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होगा। आराम का समय प्राप्त होगा।

👫 राशि फलादेश मिथुन :-
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
पार्टी व पिकनिक का आनंददायक कार्यक्रम बन सकता है। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा। मित्रों का साथ मिलेगा। नए संपर्क बन सकते हैं।

🦀 राशि फलादेश कर्क :-
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कोई बुरी सूचना मिल सकती है। मन खट्टा होगा। उत्साह में कमी रहेगी। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। विवेक से कार्य करें। लाभ होगा। भागदौड़ रहेगी। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। धैर्य रखें।

🦁 राशि फलादेश सिंह :-
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
स्वास्थ्य अच्‍छा रहेगा। उत्साह व प्रसन्नता से कार्य कर पाएंगे। आराम व मनोरंजन का अवसर प्राप्त होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। किसी बड़ा काम करने की इच्‍छा जागृत होगी।

👩🏻‍🦰 राशि फलादेश कन्या :-
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
लोगों की मदद कर पाएंगे। परिवार में अतिथियों का आगमन होगा। व्ययवृद्धि होगी। प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होगा। किसी से बहस न करें। ईर्ष्यालु व्यक्तियों से सावधान रहें। किसी मांगलिक कार्य में शामिल हो सकते हैं।

राशि फलादेश तुला :-
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
यात्रा लंबी व मनोरंजक हो सकती है। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य सुदृढ़ रहेगा। उत्साह व प्रसन्नता में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

🦂 राशि फलादेश वृश्चिक :-
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
किसी भी तरह के विवाद व बहस में हिस्सा न लें। बात बिगड़ सकती है। कुसंगति से हानि होगी। फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। बाहर जाने का मन बनेगा। मित्रों के सहयोग से बाधा दूर होगी।

🏹 राशि फलादेश धनु :-
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
डूबी हुई रकम प्राप्ति के योग हैं। भरपूर प्रयास करें। यात्रा मनोरंजक रहेगी। मित्रों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। थकान रह सकती है। जल्दबाजी में कोई कार्य न करें। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। मनोरंजन का अवसर प्राप्त होगा। विवाद न करें।

🐊 राशि फलादेश मकर :-
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
कार्यस्थल पर कुछ परिवर्तन की संभावना है। योजना फलीभूत होगी। मित्रों व रिश्तेदारों का सहयोग कर पाने का अवसर प्राप्त होगा। मान-सम्मान मिलेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जीवन सुखमय व्यतीत होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🏺 राशि फलादेश कुंभ :-
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
अध्यात्म में रुझान रहेगा। किसी धार्मिक स्थल की यात्रा हो सकती है। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है। कार्य की बाधा दूर होकर लाभ की स्‍थिति बनेगी। मित्रों के साथ समय अच्‍छा व्यतीत होगा।

🐡 राशि फलादेश मीन :-
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आने-जाने तथा कार्य करते समय लापरवाही न करें। विवाद को बढ़ावा न दें। किसी से कहासुनी हो सकती है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

आज मंगलवार है अपने नजदीक के मंदिर में संध्या 7 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में अवश्य सम्मिलित होवें |

।। 🐚 शुभम भवतु 🐚 ।।

🇮🇳🇮🇳 भारत माता की जय
🚩🚩

कुंडली के बारे में जानते -पढ़ते -सुनते समय नवमांश कुंडली का जिक्र आप लोगों ने कई बार सुना होगा। तब मन में ये प्रश्न आता होगा कि ये नवमांश कुंडली आखिर है क्या ? कई जिज्ञासु पाठक व कई मित्र जो ज्योतिष में रूचि रखते हैं वे कई बार आग्रह कर चुके हैं कि आप नवमांश कुंडली पर भी कुछ कहें। क्या होती है ?कैसे बनती है आदि-:

सामान्यतः आप सभी को ज्ञात है कि कुंडली में नवें भाव को भाग्य का भाव कहा गया है। यानि आपका भाग्य नवां भाव है। इसी प्रकार भाग्य का भी भाग्य देखा जाता है ,जिसके लिए नवमांश कुंडली की आवश्यकता होती है। जागरूक ज्योतिषी कुंडली सम्बन्धी किसी भी कथन से पहले एक तिरछी दृष्टि नवमांश पर भी अवश्य डाल चुका होता है।बिना नवमांश का अध्य्यन किये बिना भविष्यकथन में चूक की संभावनाएं अधिक होती हैं। ग्रह का बलाबल व उसके फलित होने की संभावनाएं नवमांश से ही ज्ञात होती हैं। लग्न कुंडली में बलवान ग्रह यदि नवमांश कुंडली में कमजोर हो जाता है तो उसके द्वारा दिए जाने वाले लाभ में संशय हो जाता है। इसी प्रकार लग्न कुंडली में कमजोर दिख रहा ग्रह यदि नवमांश में बली हो रहा है तो भविष्य में उस ओर से बेफिक्र रहा जा सकता है ,क्योंकि बहुत हद तक वो स्वयं कवर कर ही लेता है।अतः भविष्यकथन में नवमांश आवश्यक हो जाता है .नवमांश कुंडली(डी-9)

षोडश वर्ग में सभी वर्ग महत्वपूर्ण होते है लेकिन लग्न कुंडली के बाद नवमांश कुंडली का विशेष महत्व है।नवमांश एक राशि के नवम भाव को कहते है जो 3 अंश 20 कला का होता है।नो नवमांश इस प्रकार होते है जैसे, मेष में पहला नवमांश मेष का, दूसरा नवमांश वृष का, तीसरा नवमांश मिथुन का, चौथा नवमांश कर्क का, पाचवां नवमांश सिंह का, छठा कन्या का, सातवाँ तुला का, आठवाँ वृश्चिक का और नवा नवमांश धनु का होता है।नवम नवमांश में मेष राशि की समाप्ति होती है और वृष राशि का प्रारम्भ होता है।वृष राशि में पहला नवांश मेष राशि के आखरी नवांश से आगे होता है।इसी तरह वृष में पहला नवमांश मकर का, दूसरा कुंभ का, तीसरा मीन का, चौथा मेष का, पाचवा वृष का, छठा मिथुन का, सातवाँ कर्क का, आठवाँ सिंह का और नवम नवांश कन्या का होता है। इसी तरह आगे राशियों के नवमांश ज्ञात किए जाते है। नवमांश कुंडली से मुख्य रूप से वैवाहिक जीवन का विचार किया जाता है।इसके अतिरिक्त भी नवमांश कुंडली का परिक्षण लग्न कुंडली के साथ-साथ किया जाता है।यदि बिना नवमांश कुंडली देखे केवल लग्न कुंडली के आधार पर ही फल कथन किया जाए तो फल कथन में त्रुटिया रह सकती है या फल कथन गलत भी हो सकता है।क्योंकि ग्रहो की नवमांश कुंडली में स्थिति क्या है?नवमांश कुंडली में ग्रह कैसे योग बना रहे है यह देखना अत्यंत आवश्यक है तभी ग्रहो के बल आदि की ठीक जानकारी प्राप्त होती है।इसके अतिरिक्त अन्य वर्ग कुण्डलिया भी अपना विशेष महत्व रखते है।लेकिन नवमांश इन वर्गों में अति महत्वपूर्ण वर्ग है। लग्न और नवमांश कुंडली परीक्षण-:

यदि लग्न और नवमांश लग्न वर्गोत्तम हो तो ऐसे जातक मानसिक और शारीरिक रूप से बलबान होते है।वर्गोत्तम लग्न का अर्थ है।लग्न और नवमांश दोनों कुंडलियो का लग्न एक ही होना अर्थात् जो राशि लग्न कुंडली के लग्न में हो वही राशि नवमांश कुंडली के लग्न में हो तो यह स्थिति वर्गोत्तम लग्न कहलाती है।इसी तरह जब कोई ग्रह लग्न कुंडली और नवमांश कुंडली में एक ही राशि में हो तो वह ग्रह वर्गोत्तम होता है वर्गोत्तम ग्रह अति शुभ और बलबान होता है।जैसे सूर्य लग्न कुंडली में धनु राशि में हो और नवमांश कुंडली में भी धनु राशि में हो तो सूर्य वर्गोत्तम होगा।वर्गोत्तम होने के कारण ऐसी स्थिति में सूर्य अति शुभ फल देगा।वर्गोत्तम ग्रह भाव स्वामी की स्थिति के अनुसार भी अपने अनुकूल भाव में बेठा हो तो अधिक श्रेष्ठ फल करता है। शुभ राशियों में वर्गोत्तम ग्रह आसानी से शुभ परिणाम देता है और क्रूर राशियों में वर्गोत्तम ग्रह कुछ संघर्ष भी करा सकता है। जब कोई ग्रह लग्न कुण्डली में अशुभ स्थिति में हो पीड़ित हो, निर्बल हो या अन्य प्रकार से उसकी स्थिति ख़राब हो लेकिन नवमांश कुंडली में वह ग्रह शुभ ग्रहो के प्रभाव में हो, शुभ और बलबान हो गया हो तब वह ग्रह शुभ फल ही देता है अशुभ फल नही देता।इसी तरह जब कोई ग्रह लग्न कुंडली में अपनी नीच राशि में हो और नवमांश कुंडली में वह ग्रह अपनी उच्च राशि में हो तो उसे बल प्राप्त हो जाता है जिस कारण वह शुभ फल देने में सक्षम होता है।ग्रह की उस स्थिति को नीचभंग भी कहते है।चंद्र और चंद्र राशि से जातक का स्वभाव का अध्ययन किया जाता है।लग्न कुंडली और नवमांश कुंडली में चंद्र जिस राशि में हो तथा यदि नवमांश कुंडली के चंद्रराशि का स्वामी लग्न कुंडली के चंद्रराशि से अधिक बली हो और चंद्रमा भी लग्न कुंडली से ज्यादा नवमांश कुंडली में बली हो तो जातक का स्वभाव नवमांश कुंडली के अनुसार होगा।ऐसे में जातक के मन पर नवमांश कुंडली के चंद्र की स्थिति का प्रभाव अधिक पड़ेगा।यदि नवमांश कुंडली का लग्न, लग्नेश बली हो और नवमांश कुंडली में राजयोग बन रहा हो और ग्रह बली हो तो जातक को राजयोग प्राप्त होता है। नवमांश कुंडली मुख्यरूप से विवाह और वैवाहिक जीवन केलिए देखी जाती है यदि लग्न कुंडली में विवाह होने की या वैवाहिक जीवन की स्थिति ठीक न हो अर्थात् योग न हो लेकिन नवमांश कुंडली में विवाह और वैवाहिक जीवन की स्थिति शुभ और अनुकूल हो, विवाह के योग हो तो वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त होता है।

पाठक अब देखें की नवमांश कुंडली का निर्माण कैसे होता है व नवमांश में ग्रहों को कैसे रखा जाता है। हम जानते हैं कि एक राशि अथवा एक भाव 30 डिग्री का विस्तार लिए हुए होता है। अतः एक राशि का नवमांश अर्थात 30 का नवां हिस्सा यानी 3. 2 डिग्री। इस प्रकार एक राशि में नौ राशियों नवमांश होते हैं। अब 30 डिग्री को नौ भागों में विभाजित कीजिये-:

पहला नवमांश ०० से 3.२०

दूसरा नवमांश 3. २० से ६.४०

तीसरा नवमांश ६. ४० से १०. ०

चौथा नवमांश १० से १३. २०

पांचवां नवमांश १३.२० से १६. ४०

छठा नवमांश १६. ४० से २०. ००

सातवां नवमांश २०. ०० से २३. २०

आठवां नवमांश २३. २० से २६. ४०

नवां नवमांश २६. ४० से ३०. ००

मेष -सिंह -धनु (अग्निकारक राशि) के नवमांश का आरम्भ मेष से होता है।

वृष -कन्या -मकर (पृथ्वी तत्वीय राशि ) के नवमांश का आरम्भ मकर से होता है।

मिथुन -तुला -कुम्भ (वायु कारक राशि ) के नवमांश का आरम्भ तुला से होता है।

कर्क -वृश्चिक -मीन (जल तत्वीय राशि ) के नवमांश आरम्भ कर्क से होता है।

मेष -सिंह -धनु (अग्निकारक राशि) के नवमांश का आरम्भ मेष से होता है।

वृष -कन्या -मकर (पृथ्वी तत्वीय राशि ) के नवमांश का आरम्भ मकर से होता है।

मिथुन -तुला -कुम्भ (वायु कारक राशि ) के नवमांश का आरम्भ तुला से होता है।

कर्क -वृश्चिक -मीन (जल तत्वीय राशि ) के नवमांश आरम्भ कर्क से होता है।

इस प्रकार आपने देखा कि राशि के नवमांश का आरम्भ अपने ही तत्व स्वभाव की राशि से हो रहा है। अब नवमांश राशि स्पष्ट करने के लिए सबसे पहले लग्न व अन्य ग्रहादि का स्पष्ट होना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए मानिए कि किसी कुंडली में लग्न ७:०३:१५:१४ है ,अर्थात लग्न सातवीं राशि को पार कर तीन अंश ,पंद्रह कला और चौदह विकला था (यानी वृश्चिक लग्न था ),अब हम जानते हैं कि वृश्चिक जल तत्वीय राशि है जिसके नवमांश का आरम्भ अन्य जलतत्वीय राशि कर्क से होता है। ०३ :१५ :१४ मतलब ऊपर दिए नवमांश चार्ट को देखने से ज्ञात हुआ कि ०३ :२० तक पहला नवमांश माना जाता है। अब कर्क से आगे एक गिनने पर (क्योंकि पहला नवमांश ही प्राप्त हुआ है ) कर्क ही आता है ,अतः नवमांश कुंडली का लग्न कर्क होगा। यहीं अगर लग्न कुंडली का लग्न ०७ :१८ :१२ :१२ होता तो हमें ज्ञात होता कि १६. ४० से २०. ०० के मध्य यह डिग्री हमें छठे नवमांश के रूप में प्राप्त होती। अतः ऐसी अवस्था में कर्क से आगे छठा नवमांश धनु राशि में आता ,इस प्रकार इस कुंडली का नवमांश धनु लग्न से बनाया जाता।

अन्य उदाहरण से समझें ……. मान लीजिये किसी कुंडली का जन्म लग्न सिंह राशि में ११ :१५ :१२ है (अर्थात लग्न स्पष्ट ०४ :११:१५ :१२ है )ऐसी अवस्था में चार्ट से हमें ज्ञात होता है कि ११ :१५ :१२ का मान हमें १०.०० से १३. २० वाले चतुर्थ नवमांश में प्राप्त हुआ। यानी ये लग्न का चौथा नवमांश है। अब हम जानते हैं कि सिंह का नवमांश मेष से आरम्भ होता है। चौथा नवमांश अर्थात मेष से चौथा ,तो मेष से चौथी राशि कर्क होती है ,इस प्रकार इस लग्न कुंडली की नवमांश कुंडली कर्क लग्न से बनती। इसी प्रकार अन्य लग्नो की गणना की जा सकती है।

इसी प्रकार नवमांश कुंडली में ग्रहों को भी स्थान दिया जाता है। मान लीजिये किसी कुंडली में सूर्य तुला राशि में २६ :१३ :०७ पर है (अर्थात सूर्य स्पष्ट ०६ :२६ :१३ :०७ है ) चार्ट देखने से ज्ञात कि २६ :१३ :०७ आठवें नवमांश जो कि २३. २० से २६. ४० के मध्य विस्तार लिए हुए है के अंतर्गत आ रहा है। इस प्रकार तुला से आगे (क्योंकि सूर्य तुला में है और हम जानते हैं कि तुला का नवमांश तुला से ही आरम्भ होता है ) आठ गिनती करनी है। तुला से आठवीं राशि वृष होती है ,इस प्रकार इस कुंडली की नवमांश कुंडली में सूर्य वृष राशि पर लिखा जाएगा। इसी प्रकार गणना करके अन्य ग्रहों को भी नवमांश में स्थापित किया जाना चाहिये।

ज्योतिष के विद्यार्थियों अथवा शौकिया इस शाश्त्र से जुड़ने वालों के लिए भी नवमांश का ज्ञान होना उन्हें अपने सहयोगी ज्योतिषी से एक कदम आगे रखने में बहुत मददगार साबित होगा ऐसा मेरा विश्वास है। बहुत सरल शब्दों में नवमांश का दिया गया ये उदाहरण आशा है आप सब जिज्ञासुओं को सहायक होगा।

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