राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की टीम ने वास्तविक स्थिति जानने, मिशन के कार्यान्वयन में हुई प्रगति तथा इसमें तेजी लाने के बारे में विचार-विमर्श करने हेतु झारखंड राज्य का दौरा किया

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन की एक बहु-विषयक टीम 14 से 17 दिसंबर, 2021 के दौरान झारखंड के तीन जिलों रांची, सरायकेला खरसावां और पूर्वी सिंघम में दौरे पर है। अपने इस दौरे के दौरान टीम के सदस्य विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं। यह टीम राज्य में इस मिशन की कार्यान्वयन में हुई प्रगति के विभिन्न पहलुओं, वास्तविक स्थिति जानने के साथ-साथ नल के पानी के कनेक्शन का प्रावधान करने के लिए सभी परिवारों की शत प्रतिशत कवरेज की योजना के बारे में विचार-विमर्श करेगी। यह टीम अधिकारियों, स्थानीय ग्राम समुदायों, ग्राम पंचायतों के सदस्यों आदि के साथ भी बातचीत कर रही है। जिलों का दौरा करने के बाद यह टीम विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए राज्य की टीम के साथ भी बातचीत करेगी।

झारखंड की योजना 2024 तक सभी ग्रामीण घरों औरमार्च, 2022 तक स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, आश्रमशालाओं और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रावधान करने की है। भारत के लगभग 3 प्रतिशत ग्रामीण परिवार झारखंड में हैं, लेकिन लगभग 4.7 प्रतिशत बकाया नल के पानी के कनेक्शन झारखंड में उपलब्ध कराए जाने हैं। 59.23 लाख ग्रामीण परिवारों में से केवल 9.79 लाख (यानी 17 प्रतिशत) घरों में ही नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान है।राज्य ने अभी तक2021-22 में योजना बनाए गए 9.5 लाख परिवारों में से 2.39 लाख (यानी 24.5 प्रतिशत) घरों में ही नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं।

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वर्ष 2020-21 में राज्य को 572.24 करोड़ रुपये की केंद्रीय अनुदान राशि आवंटित की गई थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने केंद्रीय आवंटन को चार गुना बढ़ाकर 2,479.88 करोड़ रुपये कर दिया है। इस बढ़े हुए केन्द्रीय आवंटन और इतने ही राज्य के योगदान से झारखंड को वर्ष 2021-22 में जल आपूर्ति कार्यों के लिए जल जीवन मिशन के तहत 5,235.62 करोड़ रुपये की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।

इसके अलावा वर्ष 2021-22 मेंग्रामीण स्थानीय निकायों/पीआरआई को जल एवं स्वच्छता के लिए 15वें वित्त आयोग अनुदान के रूप में750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह अगले पांच साल यानी 2025-26 तक के लिए 3,952 करोड़ रुपये का सुनिश्चित वित्त पोषण है।

जल जीवन मिशन को ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण अपनाते हुए विकेन्द्रीकृत तरीके से लागू किया गया है, जिसमें स्थानीय ग्राम समुदाय योजना से लेकर कार्यान्वयन तक और प्रबंधन से संचालन और रखरखाव तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके लिए राज्य सरकार, ग्राम, जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/पानी समिति को मजबूत बनाने, अगले पांच वर्षों के लिए प्रत्येक गांव में ग्राम कार्य योजना विकसित करने, ग्राम समुदायों को सहायता प्रदान करने के लिए कार्यान्वयन राज्य एजेंसियों (आईएसए) को शामिल करने, लोगों में व्यापक जागरूकता पैदा करने जैसी सहायता गतिविधियों का आयोजन करती है। झारखंड राज्य को प्रत्येक घर में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव तथा दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

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जल जीवन मिशन के तहत, समुदाय को समय-समय पर जल स्रोतों और वितरण बिंदुओं की निगरानी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि आपूर्ति किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जा सके।पीएचई विभाग ग्राम समुदायों को उनके गांवों में नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए प्रशिक्षण और सुविधा उपलब्ध करा रहा है। झारखंड में ‘जल सहिया’ जल गुणवत्ता परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें ग्राम पंचायतों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। झारखंड में, ये जल सहिया जमीनी स्तर पर पेयजल सेवा वितरण का एक महत्वपूर्ण संवर्ग हैं, जिन्हें अक्सर जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन से संबंधित गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होते हुए देखा जाता है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुएआपूर्ति किए गए पीने के पानी की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जिसके लिए देश में 2,000 से अधिक जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं आम जनता के लिए खोली गई हैं ताकि आम लोग जब चाहें नाममात्र की लागत पर अपने पानी के नमूनों की जांच करवा सकें।झारखंड में 30 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं।

15 अगस्त,2019 को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित, जल जीवन मिशन 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए राज्यों के साथ भागीदारी के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है। वर्ष2021-22 में जल जीवन मिशन का कुल बजट 50,011 करोड़ रुपये का है। राज्य के अपने संसाधनों और 15वें वित्त आयोग द्वारा इस साल आरएलबी/पीआरआई को पीने के पानी और स्वच्छता के लिए दी गई26,940 करोड़ रुपये की अनुदान राशि के साथ ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में इतने बड़े निवेश सेगांवों में रोजगार के अवसरों के सृजन द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

वर्ष 2019 में मिशन की शुरुआत में, देश में कुल18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (यानी 17 प्रतिशत) घरों में नल के पानी की आपूर्ति हो रही थी। कोविड-19 महामारी के कारण आई चुनौतियों और उसके बाद लॉकडाउन के बावजूद, 5.43 करोड़ (यानी 28 प्रतिशत) से अधिक परिवारों को इस मिशन के शुभारंभ के बाद नल से पानी की आपूर्तिकराई गई है। वर्तमान में, 8.67 करोड़ (45 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों को नल के माध्यम से पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, पुडुचेरी और हरियाणा ‘हर घर जल’ वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।अर्थात् इनमें शत प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के घरों में नल के पानी की आपूर्ति हो रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ विज़न के सिद्धांत का अनुपालन करते हुए इस मिशन का आदर्श वाक्य है कि ‘कोई भी छूटे नहीं’ और प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में, 83 जिलों के प्रत्येक घर और 1.28 लाख से अधिक गांवों में नल से पानी की आपूर्ति हो रही है।

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