पत्थर ‘ पड़े व्यवस्था पर !

पत्थर ‘ पड़े व्यवस्था पर !

उज्जैन । शहर की शांत फिजों में उस वक्त हलचल मच गई , जब संवेदनशील क्षेत्र में विवाद हो गया और चंद मिनटों में सैकडा पत्थर बरस गए । वाहन टूटे , लोगों को चोट लगी । शहर में बवाल की खबर फैली तो हलचल मच गई और कई सवाल खड़े हुए । कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार समूह बनाना , चल समारोह निकालना , भीड़ पर रोक है । इसके बाव भी रैली को अनुमति क्यों दी गई , लोग चाहकर भी पारिवारिक आयोजन को सीमित संख्या में कर रहे हैं । शोक निवारण की रस्म चलित उठावने के तौर पर निभाई जा रही है । फिर ऐसी क्या मजबूरी या दबाव था।

सवाल तो यह भी पूछा जा रहा है कि जनजागरण के नाम पर रैली अनुमति ली गई थी या नहीं … ?
यदि अनुमति ली थी तो रैली के लिए शर्ते क्या थी ?
रैली के लिए रूट क्या था … ?
अनुमति के रूट में यदि संवेदनशील क्षेत्र शामिल था तो अनुमति देने वाले अफसर या थाने ने विवाद के इस हिस्से या क्षेत्र पर क्यों नहीं किया ? इस सब के अलावा महत्वपूर्ण मुद्दा तो यह कि अयोध्या में जिस शौर्यगाथा के साथ मंदिर निर्माण हो रहा हैं यह पूरी दुनिया को पता चल चुका है , तो फिर रैली के नाम पर प्रचार क्यों , वह भी उस क्षेत्र में जहां पर विवाद की आशंका हो ऐसे क्षेत्र जाने और नारेबाजी का औचित्य क्या है ? रैली को संवेदनशील क्षेत्र में जानबूझकर लेकर जाना और अधिकारियों का अनुमति देना किसी भी नजरिए से उचित नहीं है । कतिपय असामाजिक तत्वों ने बेगमबाग क्षेत्र में पथराव कर दिया । रैली पर पथराव होते ही अफरातफरी , भगदड़ और शहर में अफवाह की स्थिति बन गई । पथराव की वजह से लोग घायल हुए है । अतिरिक्त पुलिस बल भेजकर स्थिति काबू की । ‘ पत्थरों ने सवालों से तत्र पर पथराव कर दिया ।

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