कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अज़ा मनाया जा रहा हैं अकीदत के साथ।✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️उज्जैन संभाग ब्यूरो चीफ एस एस यादव

कुर्बानी का त्यौहार ईद-उल-अज़ा मनाया जा रहा हैं अकीदत के साथ।
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उज्जैन संभाग ब्यूरो चीफ एस एस यादव
नीमच— इस्लाम का प्रमुख त्यौहार ईद-उल-अज़ा ( कुर्बानी ) का त्यौहार आज भोपाल में अकीदत के साथ घरों के अंदर मनाया जा रहा हैं।
हज़रत इब्राहीम अलै. की याद में ईद-उल- अज़ा का त्यौहार इस्लामी साल के आखरी महीने हज की 10वी तारीख़ को मनाया जाता हैं इस्लामी मान्यता के अनुसार इस दिन कुर्बानी करना अल्लाह को सबसे ज़्यादा पसंद हैं और कुर्बानी से बढ़कर आज के दिन कोई अमल नही हैं इसलिए मुस्लिम समाज के लोग इस दिन अपनी-अपनी हैसियत के मुताबिक कुर्बानी करते हैं या कुर्बानी के जानवर में हिस्सा लेते हैं। कुर्बानी का ये सिलसिला तीन दिन तक चलता हैं और कुर्बान हुए जानवरो की खाल ज़रूरतमंद लोगो को तकसीम की जाती हैं या उनको बेचकर उसका पैसा गरीबो,बेसहारा,यतीमो को दिया जाता हैं कुर्बानी के बाद जानवर के माँस के तीन हिस्से किए जाते हैं एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता हैं दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों को जिनके यहाँ कुर्बानी नही हुई हैं उनको दिया जाता हैं तीसरा हिस्सा खुद की ज़रूरत के लिए रखा जाता हैं।
बहरहाल इस समय कोरोना महामारी और लॉक डाउन के चलते लोगो मे वो उत्साह और उमंग नज़र नही आ रही हैं जो उमूमन ईद-उल-अज़ा में नज़र आती थी मुस्लिम समाज के लोगो ने घरों में ईद की दोगाना नमाज़ अदा की और जिसको नही आती हैं उसने चार रकअत चाशत की नमाज़ अपने घर मे अदा की। इसके बाद घरों में कुर्बानी के जानवर की कुर्बानी की। कुर्बानी के जानवरों में ऊंट,बकरा,दुम्बा,पड़ा और बोदे की कुर्बानी की जाती हैं। भोपाल में इस समय 10 दिनों का टोटल लॉक डाउन लगा हैं जो चार अगस्त को खत्म होगा सामूहिक कुर्बानी और खुले में कुर्बानी का सरकार की तरफ से सख्त मनाही हैं और जो इन निर्देशों का उलंघन करेगा उस पर प्रशासन की तरफ से कार्यवाही की जाएगी।

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