जावद टीआई राजेशसिंह ने महिला से मांगे 50 हजार,आरोपियों से समझौता करने के लिए भी बनाया दबाव, पीडित महिला ने नीमच पुलिस अधीक्षक को की लिखित शिकायत, कार्रवाई की मांग

नीमच:——धोखाधड़ी का फर्जी मामला दर्ज करने के बाद न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत के दस्तावेज नही लेने, एक संगीन मामले में समझौते केे लिए दबाव बनाने, रिश्वत की मांग करने का आरोप महिला ने जावद टीआई व अनुसंधानकर्ता पर लगाया। महिला ने इसकी शिकायत नीमच जिला पुलिस अधीक्षक को लिखित में की व आरोप लगाया कि सिविल मामले को पुलिस ने सांठ-गांठ कर फौजदारी में बदल दिया। जिसकी उच्ची स्तरीय जांच होना चाहिए। इन्दौर निवासी श्रीमती गीता राठौर ने बताया जावद जिला नीमच में मैंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के एक सेंटर का रजिस्ट्रेशन 6 लाख रुपये देकर महाराष्ट्र के विष्णु पिता अर्जुन दलवी, नितिन पाटिल, सैफअली सैय्यद इत्यादि से करवाया था, जिसके संचालन के लिए मौखिक तौर पर मल्हारगढ़ के सुखलाल सोलंकी को संचालक नियुक्त किया, जो मेरे मल्हारगढ़ जिला मंदसौर सेंटर पर पार्टनर भी था। थाना जावद के टीआई व अनुसंधानकर्ता ने मल्हारगढ़ जिला मंदसौर निवासी सुखलाल सौलंकी से सांठ-गांठ कर मेरे ही खिलाफ एक असत्य एफआईआर 16 फरवरी 2022 को जावद थाने में दर्ज करा दी। जो मेरी मेरी सामाजिक छबि को बिगाड़ने व संगीन मामले में आरोपियों को बचाने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई। जबकि में खुद जावद सेन्टर की मालिक हंू और इस केस में मैं खुद 29 जनवरी 2021 से जावद थाने पर फरियादी हंू। राठौर ने बताया जावद थाने जाकर मैंने बयान भी दिया, लेकिन मेरे आवेदन पर कार्यवाही न करते हुए एक मामले में विष्णु पिता अर्जुन दलवी व सैफअली सैय्यद से समझौता करने पर विवश किया जा रहा है। मुझे व मेरे पति को जावद सत्र न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत दी जा चुकी है, क्योंकि यह एक सिविल प्रकृति का वाद है, जिसे षडयंत्र पूर्वक जावद थाने द्वारा फौजदारी में बदला गया। राठौर ने बताया जब हम 17 मई 2022 की अग्रिम जमानत अपने अधिवक्ता के साथ भरवाने गए तो टीआई व अनुसंधानकर्ता ने मुझसे इस असत्य एफआईआर को रद्द करने के लिए 50 हजार रुपयों की अनुचित मांग की। मैने देने से इनकार कर दिया तो मुझे थाने पर कहा कि तुमसे तुम्हारी मूल पार्टनरशीप डीड को लेकर हम फाड़ देंगे, जिसके आधार पर तुम्हें अग्रिम जमानत मिली है फिर तुम्हारी अग्रिम जमानत रद्द करवाकर हम साबित करेंगे कि हमने सही कैस बनाया है। उसी दिन हम पर दबाव बनाते हुए धारा 91 का नोटिस जबरदस्ती तामिल करवाया। श्रीमती राठौर ने बताया अगले दिन हम जावद थाने पर पुनः दस्तावेज जमा कराने गए तो जमा नही किये और रिसिप्ट देने से भी इंकार किया। फिर बड़ी मुश्किल से हमने मूल पार्टनरशीप डीड की (समन्धित नोटरी अधिवक्ता से सर्टिफाइड कर) कॉपी जमा कराने के आवेदन पर रिसिप्ट ली और 10 दिनों के भीतर अपने जावद अधिवक्ता को बाय पोस्ट की वो भी तीन बार थाने गए। लेकिन उनसे भी दस्तावेज लेकर जमा नहीं किये। श्रीमती राठौर ने बताया फिर दुबारा टीआई ने धारा 91 का एक नोटिस बैक डेट में दिलवाकर 10 सितंबर 2022 को थाने पर उपस्थित होने को कहा। जबकि वह नोटिस हमें 14 सितंबर 2022 को इंदौर में प्राप्त हुआ। उसके पश्चात इस विषय पर मेरे इंदौर हाईकोर्ट अधिवक्ता ने जावद अनुसंधान कर्ता श्रीमती शशिकला चैहान से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि अभी 28 सितंबर 2022 तक में थाने पर नही रहूंगी, उसके बाद आना। इस प्रकार मुझे अग्रिम जमानत के बाद भी बार-बार इंदौर से जावद थाने बुलाकर परेशान किया जा रहा है। मुझे व मेरे परिवार को उक्त अपराधियों से जान का खतरा बना हुआ है। मुझ पर हुए जानलेवा हमले के मामले में मैंने लिखित शिकायत की, लेकिन फिर भी पुलिस द्वारा उन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। उल्टा संगीन मामले में आरोपियों को बचाने के लिए इस केस में एक गवाह राजकुमार राठौर को प्रभावित कर उसके साथ सांठ-गांठ कर सोशल मीडिया पर असत्य जानकारी वायरल करवाई गई। मुझे व मेरे परिवार पर मानसिक रूप से दबाव बनाया जा रहा है।
पुलिस को सहयोग नही कर रही महिला, आरोप कुछ भी लगाए जा सकते है:-
जावद टीआई राजेशसिंह चैहान का कहना है महिला द्वारा लगाए गए आरोप असत्य है, कोर्ट के आदेशानुसार हमने जो दस्तावेज महिला से मांगे है वह पेश नही किए जा रहे है। कोर्ट के आदेशानुसार पुलिस अनुसंधान में महिला सहयोग नही कर रही है। आरोप तो कुछ भी लगाए जा सकते है।

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