जिला जेल कनावटी में राशन घोटाला, कैदियों के मुंह का निवाला छिन रहे है जेलर एल.के त्रिपाठी

जेल में हिटलरशाही, विभिन्न एजेंसियों के पास पहुंची शिकायतें, ऑफ लाईन टैंडर में किया बडा खेल, फर्जी फर्मां के जरिए खाद्यान्न की खरीदी, शिकायत के बाद निकाली ऑन लाईन रि-टैंडर की विज्ञप्ति, जिला जेल कनावटी में वित्तिय अनियमितता का मामला भोपाल पहुंचा
नीमच। नीमच जिला कनावटी जेल में जेलर डॉ.एल.के.त्रिपाठी द्वारा बंदियों के साथ आए दिन मारपीट की जा रही है और उन्हें प्रताडित किया जा रहा है। जेलर के कार्यकाल में बंदी नारीकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे है। स्थिति यह है कि नीमच के तमाम अधिकारियों को जेलर त्रिपाठी की करतूतों के बारे में जानकारी होते हुए भी वे एक बार भी जेल का निरीक्षण नहीं कर रहे है। वहीं तानाशाह रवैया की आड में जेलर त्रिपाठी द्वारा बडा खेल किया जा रहा है। पिछले वर्ष जेल में बंद कैदियों के खाने के लिए ऑन लाईन टैंडर जारी किए जाने थे, लेकिन जेलर ने भ्रष्टाचार को बढावा देते हुए कैदियों के मुंह का निवाला छिनने के लिए ऑफ लाईन टैंडर जारी किए, उज्जैन और इंदौर की फर्जी फर्मां को मौका दिया गया, नीमच कनावटी जेल में खाद्यान्न पहुंचाने वाली फर्मां के जीएसटी, टीन नंबर रजिस्ट्रेशन सहित अन्य अते-पते तक नहीं है। जेल में करीब डेढ साल से चल रही वित्तिय अनियमितता की शिकायतें लोकायुक्त सहित कई जांच एजेंसियों के पास पहुंच गई है। जेल मुख्यालय पर भी इस मामले की शिकायतें हुई है। शिकायत के बाद हडकंप मच गया है। वहीं दूसरी और अब रि-टैंडर की प्रक्रिया ऑन लाईन की गई है। आज स्थानीय अखबार में जेल में शेष खाद्यान्न खरीदी की विज्ञप्ति जारी की गई, जबकि पूर्व में एक बार भी विज्ञप्ति जारी नहीं की गई थी और ऑफ लाईन टैंडर में लाखों रूपए का घालमेल जेलर त्रिपाठी ने किया है।
1 जुलाई 2019 से 2020 तक बंदियों को खाने की सामग्री और सब्जियों को ऑन लाईन टैंडर या कोटेशन न कर ऑफ लाईन कोटेशन लिए जाकर इंदौर के व्यापारी से सांठगांठ कर एक ही व्यापारी के अलग- अलग तीन पते पर कोटेशन लेटरपेड पर लिये और चुपचाप एक वर्ष तक उंचे दाम में खाद्यान्न व सब्जियां खरीद कर जेलर त्रिपाठी शासन को चूना लगाया। यदि ऑन लाईन टैंडर या कोटेशन होते तो अनेक पार्टिया भाग लेती और प्रतिस्पर्धा होती तो वस्तुओं की दरें भी कम होती और शासन को लाभ होता। जबकि शासन का नियम है कि रूपए एक लाख से अधिक की खरीदी पर ऑन लाईन कोटेशन या टैंडर किया जाए। यहां यह भी विचारणीय है कि क्या इंदौर से नीमच प्रतिदिन सब्जी भेजी जा सकती है। सब्जी आज भी नीमच के राजकुमार नामक सब्जी वाले से ली जा रही है। राजकुमार को आठ माह का पेंमेंट भी त्रिपाठी ने नहीं दिया है। जबकि इंदौर वाले के सब्जी के बिल हर माह निकाल लेता है।
इस साल भी त्रिपाठी ने लोकल व्यापारियों को टैंडर की कोई जानकारी न देकर उज्जैन इंदौर जो कि उक्त व्यापारी ने इंदौर की बजाय उज्जैन के नाम की फर्म बदलकर इस साल का ठेका लिया है। उक्त पते पर कोई दुकान ही नहीं है। इस प्रकार त्रिपाठी द्वारा लाखों का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिला जेल कनावटी में त्रिपाठी द्वारा झूठे बिल फर्मों से बनाकर पैसा अपनी जेब में रखा जा रहा है। बंदियों को भूखे मार रहा है। कम राशन देता है। सिर्फ चार-चार रोटिया ही जो कि पतली- पतली रहती है। बंदियों से गेहूं भी घर या बाजार से उनके परिजनों से मंगवाता है। इस काम में संदीप राठौर जो कि खाना व गोदाम में काम करता है। यह बंदियों से वसूली कर त्रिपाठी को देता है।
उल्लेखनीय है कि कनावटी जेल ब्रेक 22 जून 2019 को हुआ था, इसके बाद 24 जून 2019 को एलके त्रिपाठी जेलर के रूप में नीमच आए। करीब डेढ वर्ष से कनावटी जेल को मर्जी से चला रहे है। लॉक डाउन में भी भरपूर भ्रष्टाचार किया। वर्तमान में कनावटी जिला जेल में करीब 500 कैदी है। कैदी भी शिकायतें से डरते है, क्योंकि उनके साथ मारपीट की जाती है। ठंड में गर्म कपडे नहीं दिए जा रहे है। जेलर ने यमदूत का रूप धारण कर जेल को नर्क बना दिया है। अन्य कर्मचारियों को भी प्रताडित किया जा रहा है। इन तमाम मामलो में खुली जांच होना चाहिए।

अवकाश में भी घालमेल-
सूत्र बताते है कि सालभर में जेलर को 31 अवकाश स्वीकृत होते है, लेकिन जेलर करीब तीन माह तक अवकाश पर रहा। अवकाश पर रहते हुए भी वेतन प्राप्त किया। दो दिन के अवकाश की जगह पंद्रह-पंद्रह दिन के अवकाश में जेलर रहा है।

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