अफवाहों की भेंट चढ़ा पंचायती विभाग, दर-दर भटक रहे अनुभवी वाटर सेट के कर्मचारी
डेढ़ साल से बेरोजगार बैठे वाटरशेड के अनुभवी कर्मचारी

भोपाल (ईएमएस) – कभी अपने अनुभव से धरती को सींचने वाले वाटरशेड के अनुभवी कर्मचारी दाने दाने को मोहताज हो रहे है। दरअसल 2010-2011 से वाटरशेड परियोजना में काम कर रहे ब्लॉक अभियंता और ब्लॉक समन्यक को 2018-2019 में परियोजना पूर्ण होने पर नौकरी से निकाल दिया था। इसके बाद वाटरशेड कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी। न्यायालय ने कर्मचारियों की पीड़ा को देखते हुए इन्हे निकलने के निर्णय पर रोक लगाते हुए ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को इनका संविलियन करने के निर्देश दिए थे। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी आज तक इन कर्मचारियों का संविलियन नहीं हो पाया है।

मनरेगा में होना है संविलियन
2006 से खाली पड़े 2527 पद

मनरेगा में 2006 से 962 उपयंत्री और लगभग 1565 ब्लॉक प्रबंधक के पद खाली है। इन पदों पर वाटरशेड के कर्मचारियों का संविलियन कर इसे भरा जाना है । वही मनरेगा योजना में 65 प्रतिशत कृषि एवं संबंधित गतिविधियों पर खर्च होना है। वाटरशेड के कर्मचारियों जल संरक्षण और कृषि के क्षेत्र में 15 वर्षों का अनुभव है।
103 विकासखंड अभियंता और 131 ब्लॉक समन्यक के पास कृषि और सिविल वर्क से संबंधित योग्यता भी है। ऐसे में मनरेगा में वाटरशेड के कर्मचारियों का संविलियन कर इनकी योग्यता और अनुभव का लाभ लिया जा सकता है।

निचला अमला कर रहा विरोध
मनरेगा में एपीओ का दबदवा

सूत्रों की माने तो मनरेगा में कार्य कर रहा निचला अमला अपने समकक्ष अन्य कर्मचारियों के काम करने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है। निचला अमला अपने विभाग के अधिकारियों को विभिन्न माध्यमों से दबाव डालकर वाटरशेड के कर्मचारियों का मनरेगा में संविलियन रुकवाना चाहता है। इसके लिए संगठनो ने अपनी कमर कस ली है। वे किसी भी कीमत पर इनका संविलियन नहीं होने देना चाहते है। वर्तमान में मनरेगा में एपीओ का दबदवा चलता है।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मनरेगा परिषद् की सशक्त समिति में वाटरशेड कर्मचारियों के संविलियन की सहमति बन गई थी। इसके बाद इसे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की अध्यक्षता में मनरेगा कार्यकारणी की बैठक में रखा गया। विभाग मनरेगा में वाटरशेड के कर्मचारियों के अनुभव का लाभ लेना चाहता था। सूत्रों की माने तो अधिकारी मनरेगा के निचले अमले के दबाव में वाटरशेड कर्मचारियों का मनरेगा में संविलियन का निर्णय नहीं ले पा रहे है।।

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