पंचायत चुनाव की आस में आमजनता , जल्द चुनाव कराने की मांग


चिट्ठियों के खेल में उलझा पंचायत चुनाव


टलते जा रहे चुनाव के साथ विकास कार्य..!


नीमच:—- मध्यप्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लगभग 1 वर्ष से अधिक समय से टलते जा रहे हैं समय पर चुनाव नहीं होने की वजह से प्रदेश की आम जनता में प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रोश देखने को मिल रहा है आमजन प्रदेश सरकार की चुनाव कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे है प्रदेश की आम जनता का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं करा कर प्रदेश की जनता को क्या संदेश देना चाहते है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को पूरा हुए लगभग 1 वर्ष बीत गया परंतु शासन के पंचायत विभाग के लचीले सिस्टम की वजह से प्रदेश में अभी तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही ऐसे में प्रदेश की जनता ने चुनाव आयोग से जल्द त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की मांग की है
देश में लोकसभा राज्यसभा विधानसभा के साथ ग्राम सभा का गठन संविधान में दर्शाया गया है पंचायत की ग्राम सभा में पंचायत आबादी क्षेत्र में विकास कार्यों
की रूपरेखा के साथ ठहराव प्रस्ताव पारित कर कार्य को किया जाता है लेकिन विगत मध्यप्रदेश में 1 वर्षों से लंबित पंचायत चुनाव नहीं होने से गांव की नई सरकारें नहीं बन पा रही है जिससे आमजनता से जुड़े विकास कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो रही है
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के उलझन का खेल आमजन की समझ से परे नजर आ रहा है आम जनों का मानना है कि विगत वर्ष मध्यप्रदेश में कोरोना लॉक डाउन की स्थिति में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव चुनाव आयोग द्वारा किए गए तो आखिर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होना क्यों संभव नहीं हो रहा..?
चिट्ठियों के खेल में उलझा पंचायत चुनाव –
मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को चिट्ठी लिखकर जल्द चुनाव कराने की मांग की इच्छा जाहिर की तो वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर आयोग का जवाब दिया परंतु चिट्ठियों के खेल में प्रदेश की आमजनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है
संविधान की अवहेलना –
एक तरफ भारतीय संविधान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नियम बने हुए हैं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के कार्यकाल समाप्त होते ही नए सिरे से चुनाव प्रक्रिया को पूरा कराने का नियम बना हुआ है लेकिन ‌वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन संविधान के विपरीत फैसले लेता नजर आ रहा है

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