पूर्व में हुए सीमांकन को किया चैलेंज
सरपंच पटवारी सहित संबंधित अधिकारी भी मोन व्यापार में दल्लो की भी हुई चांदी

निप्र नीमच करण नीमा बाबा
पूर्व में हुए ग्राम पंचायत जमुनिया कला के हल्का नंबर 11 के 45 नंबर शासकीय आम रास्ते की विवाद में 56 नंबर भूमि स्वामी द्वारा अतिक्रमण की बात को लेकर प्रशासनिक शिकायतों के चलते संबंधित अधिकारियों ने सीमांकन कर आम रास्ते की निर्धारित सीमा तय की
परंतु कहीं स्थानीय लोगों ने सीमांकन से असंतुष्ट होकर मौका पंचनामा पर अपने हस्ताक्षर करने से इनकार किया बावजूद इसके 56 नंबर वर्तमान भूमि स्वामी ने प्रशासनिक सांठगांठ से अपनी इच्छा अनुसार सुरक्षा बाउंड्री बनवा दी उसके कुछ समय बाद उसी आम रास्ते से लगी 56 नंबर के ऑपोजिट दिशा में भूमिका व्यापार हुआ इसमें वर्तमान भूमि स्वामी ने उस सीमांकन को चैलेंज करते हुए आम रास्ते में सीमेंट पोल गढ़वा कर अपना कब्जा जताया इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से चर्चाएं भी हुई पर उनका यह कहना है कि आपकी शिकायत पर हम कार्रवाई कर देंगे पर आप सीएम हेल्पलाइन पर कोई शिकायत ना करें लेकिन संबंधित बच्चों से मौखिक चर्चा से कोई हल नहीं निकला आज मौके पर ज्यों की त्यों स्थिति बरकरार है इस संबंध में ग्राम पंचायत जमुनिया कला के वर्तमान सरपंच विनोद कुमार जयसवाल से गांव के आम व्यक्ति द्वारा चर्चा होने पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं तुम से बोल रहा हूं आप रोक लगाए मैं साथ हूं में किरोना के कारण नही आ रहा यह बोलकर मौके पर खड़े होने से अपना पल्लू झाड़ दिया इसी प्रकार पूर्व में सरपंच के निठल्ले पर और लापरवाही के कारण आज ग्राम पंचायत जमुनिया कला में अतिक्रमणओं का अंबार है या तो सरपंच महत्वपूर्ण डिसीजन लेने के योग्य नहीं है या फिर अतिक्रमण कर्ताओं के साथ मिलकर अपना उल्लू सीधा कर रहा है या गलत लोगों का खौफ है क्योंकि वर्तमान भूमि व्यापार को लेकर आम नागरिकों का विरोध होने से दल्लो के भी चेहरे लटके हुए दिखाई दे रहे हैं अब सोचने वाली बात यह है हम रास्ते से लगा 56 नंबर भूमि स्वामी सही है या उसी रास्ते से ऑपोजिट दिशा से लगा हुआ भूमि स्वामी सही है यदि यह सही है तो उसको पीछे हटना है और यदि वह सही है तो इसको पीछे हटना है इससे यह अंदेशा लगाया जाता है की पूर्व भूमि स्वामी अपनी जमीन का जो विक्रय किया है उसमें शासकीय भूमि का 45 नंबर आम रास्ते के सोदे का खुलकर संबंधित सभी व्यक्तियों से चर्चा कर ही इस पूरे खेल को खेला गया सोचने वाली बात है शिकायतकर्ता मौजूद होने के बाद संबंधित व्यक्ति किसी प्रकार का कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं यदि जहां कोई आवाज उठाने वाला बोलने वाला ना हो वहां पर इन व्यक्तियों की कालाबाजारी कैसी चल रही होगी अगर समय रहते उन्होंने अपना रवैया नहीं बदला और मौखिक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की तो वह सभी संभव कार्रवाई के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे बाद में शिकायत करताओ से निवेदन करने की बजाय अगर संबंधित अधिकारी अपने कार्य के प्रति निष्ठावान रहते हुए अपने पद का निर्वहन करते हैं तो यह कसौटी पर खरा उतरने का काम होगा

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