✍🏻 महामारी ने बताया कितना विकास किया सरकारों ने

✍🏻 ना हमारे पास पर्याप्त अस्पताल है, ना चिकित्सक, ना नर्सिंग स्टाफ, ना लैब, ना दवाई, ना इंजेक्शन, ना ऑक्सीजन, ना आधुनिक एम्बुलेंस है, और कहने को छाती ठोक कर कहती है सरकारें हमने बहुत विकास किया है हमें फिर से चुनो
मंदसौर। देश में जब-जब महामारी आई तब-तब उससे निपटने में सरकारों का तेल निकल गया, झागोट आ गए। इस बार कोरोना महामारी पूरे विश्व में फैली जिससे भारत बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पिछली सरकारों की तरह वर्तमान सरकारें चाहे केंद्र हो या राज्य सरकार सबकी पतलून ढीली हो चुकी है महामारी से निपटने में, संसाधन कम पड़ चुके है, चिकित्सक कम है, सेवानिवृत चिकित्सको और नर्सिंग स्टाफ कि सेवाएं लेने की नौबत आ चुकी है, इंजेक्शन की कालाबाजारी हो रही है, दवाईयों के रेट बढ़ चुके है, ऑक्सीजन सिलेंडर की मारामारी है, अस्पतालों में बेड कम पड़ गए है, ये सब बातें सबूत है इस बात का की हमने देश की आजादी के बाद से लेकर वर्तमान तक जितनी भी सरकारें चुनी (वो चाहे केंद्र हो या राज्य) सबने हमें झब्बु दिया है, मूर्ख बनाया, सबने हमें हथेली में हाथी दिखाया। नेताओं ने अपने घर भरे है, ना कि देश का विकास किया है। अगर सरकारें हकीकत में विकास पर ध्यान देती तो मेरा दावा है आज कोरोना महामारी को सरकारें बहुत आसानी से हरा देती। अरे विकास की बात करते है आप,,, आपने कितना विकास किया ये इसीसे साबित होता है कि आज आपके अधिकारियों को सुबह से लेकर शाम तक ऑक्सीजन सिलेंडर इकट्ठा करने के लिए गांव-गांव, गली-गली भटकना पड़ रहा है और आप कहते है की भारत में बहुत विकास हुआ है, शर्म नहीं आती इतना बड़ा झूठ बोलते हुए। अगर आज देश में इतनी बड़ी विपदा नहीं आई होती तो हम तो इसी गुमान में रहते की हमारा देश बढ़ रहा, विकास कर रहा है। विकास हुआ है साहब,,, बहुत विकास हुआ है लेकिन देश का नहीं नेताओं और उनके रिश्तेदारों का, नेताओं के छर्रों और दलालों का,,, विकास हुआ है भ्रष्ट अधिकारियों का,,, हजारों करोड़ रुपए एक-एक नेता के पास है भारत और विदेशी बैंको में (कुछेक को छोडकर) ज़रा सोचिए की जितना पैसा अचल संपत्ति जो राजनीति के जरिये जुटाई नेताओं ने वो अकूत दौलत जो देश के सारे नेताओं के पास है वो लाखों करोड़ में है, अगर सफेदपोश और लाल फिताशाही के भ्रष्ट अपनी बजाए देश के विकास पर ध्यान केंद्रित करते तो आज हमारे देश में बड़े-बड़े आधुनिक सुविधाओं से लैस सरकारी अस्पताल होते, पर्याप्त चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ होता। रेमडेसीवीर इंजेक्शन पूर्ति करने के बाद भी एडवांस में पड़ा होता। चिकित्सक कम नहीं पड़ते, अस्पतालो में बेड कम नहीं पड़ते और बकवास करते है कि विकास हुआ है, बंद किजिये ये बकवास, बंद किजिये जनता से सफ़ेद झूठ बोलना, बंद किजिये अनाप-शनाप दौलत इकट्ठा करना, देश का विकास किजिये, विकास का मतलब होता है आवश्यकताओ की पूर्ति करना। जो कमी आज महसूस हुई है वो वर्तमान सरकार की गलतियों से नहीं बल्कि अाजादी के बाद से अब तक जितनी भी सरकारें बनी उनकी गलती से हुई है, लेकिन वर्तमान सरकार को अब सुधार के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए। मुझे नहीं लगता की अब भी सरकारें सुधार पर ध्यान देंगी, सुधार हमेशा नेताओं की आर्थिक स्थिति में हुआ है और आगे भी क्रम जारी रहेगा! ऐसे देश विकसीत राष्ट्र कभी नहीं बन पाएगा साहब,,, अभी तो देश में जरूरत के संसाधन तक नहीं तो हम विकसित राष्ट्र की कल्पना कैसे करें ? चलो ये तो कोरोना आने पर हमें पता चलें कि हम स्वास्थ्य सेवाओं को लागु करने में बिलकुल फिसड्डी साबित हुए है, अगर भगवान ना करें कभी किसी देश से युद्ध हो गया तो उस समय पता चलेगा कि हमारी सेना पर्याप्त है या नहीं, हमारे पास युद्ध के लिए आधुनिक हथियार है या नहीं, हमारे पास युद्ध के चलते राशन पानी कि व्यवस्था है या नहीं, क्योकि हम भारतीय बहुत भोले और भावुक होते है जिन्हें घाघ नेता बहुत आसानी से पटा लेते है, बहुत आसानी से समझा देते है की वो जो बोल रहे है सिर्फ वही सच है, तभी तो गवांर, अनपढ़, कुख्यात बदमाश और दो कोड़ी के लोग भी चुन लिए जाते है जनता के द्वारा। हमारे देश की राजनितिक पार्टियों की ये परंपरा है कि जिसे मौका मिला उसीने देश को नोंच डाला, तो विकास कहां से होता।

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