नेता लोग कह रहे हैं नीमच में रिकार्ड तोड़ आक्सीजन की सप्लाई हो रही है पर जमीनी हकीकत ये की लोग एडियां रगड कर सड़कों पर मर रहे हैं

नीमच। नीमच गवर्नमेंट हॉस्पिटल में वेंटिलेटर बेड आक्सीजन रेमिडीसिविर कुछ नहीं है।अवस्‍थी जी कह रहे हैं नीमच में रिकार्ड ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई हो रही है। इस समय जितनेे ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई हो रही है इसके पहले उतने ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई कभी नहीं हुई थी। इसका मतलब आप समझ सकते हैं, अधिकारियों के पास बताने के लिए कुछ नहीं है। अवस्‍थी जी से कोई पूछने वाला है ? कि हे प्रभु इसके पहले नीमच में इतने ऑक्‍सीजन की मांग कब हुई थी ? इसके पहले नीमच में इतनी भारी संख्‍या में मरीजों को ऑक्‍सीजन की जरूरत कब पड़ी थी ? और इसके पहले नीमच के अस्‍पतालों पर नो बेड का बोर्ड कब लगा था ? इसके पहले बीच सड़क पर एडिंयां रगड़-रगड़ कर ऑक्‍सीजन के लिए लोग कब मरे थे ? इसके पहले कोरोना जैसी महामारी कब आई थी ?
यदि सरकारी रिकार्ड और जमीनी हकीकत का फर्क समझना चाहते हैं तो किसी भी दिन नीमच गवर्नमेंट हॉस्पिटल के कोविड वार्ड के बाहर या हॉस्पिटल गेट के बाहर एक घंटा खड़ा हो जाइए। भांग खाकर थेंथरई कर रहे अधिकारियों के आंकड़ों की सच्‍चाई सामने आ जाएगी। मैं हॉस्पिटल के कोविड वार्ड के गेट पर तीन घंटे तक लाइन लगाकर हाकिम लोगों का ‘फील गुड’ देख, महसूस कर चुका हूं।
तीन घंटे तक पूरे शहर के अस्‍पतालों का दरवाजा खटखटाने के बाद भी कहीं ऑक्‍सीजन वाला बेड नहीं मिला। दो रात और दो दिन यहां-वहां काटने के बाद जब हॉस्पिटल में प्रवेश मिला तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंतिम सांस गिन रहे मरीज को यदि गवर्नमेंट हॉस्पिटल में तीन दिन बाद बेड मिले तो माफ कीजिएगा आप भूल गए हों तो भूलिए मुझे 2004 वाला ‘फील गुड’ और उसके बाद का परिदृश्‍य भी याद है। जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी।
यह आक्रोश मेरा नहीं हर उस व्‍यक्ति का है जिसने मेरी तरह अपना कोई करीबी खोया है। और माफ कीजिएगा यह आक्रोश केवल इसलिए भी नहीं है कि सरकारी मशीनरी के नशे में होने के कारण मैने अपना करीबी खोया है। आक्रोश इसलिए भी है कि मेरे जैसे सैकड़ों लोगों ने केवल अधिकारियों की लापरवाही, बदइंतजामी, धुर्तता के कारण अपनों को खोया है और नेता एवं अधिकारियों, जिम्‍मेदारों के चेहरे पर इसका कोई शिकन तक नहीं है।
अवस्‍थी जी, आपकी सफाई हमारे और हमारे जैसों के जख्‍मों पर नकम छिड़कने का काम कर रही है। आप और आप जैसे अधिकारी लोगों को बचा नहीं पा रहे हैं तो कम से कम थेथरई तो मत कीजिए, अपने चेहरे पर बेचारगी का भाव तो लाइए। लोग सड़कों पर ऑक्‍सीजन के बिना मर रहे हैं और आपके अधिकारी भांग खाकर ‘फील गुड’ कर रहे हैं।
कुछेक भले अधिकारी हैं जो स्थिति खराब है कह कर ठंडी सांस ले रहे हैं —

Leave a Reply